भाजपा के लोगों को अपने प्रधानमंत्री पर शर्म आनी चाहिए: राहुल

लखनऊ  कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने रायबरेली में एक जनसभा को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए बेहद कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि भाजपा ने अमेठी-रायबरेली को कुछ दिया नहीं बल्कि जो था वह भी छीन लिया। यहां हाईवे बनने वाले थे, नहीं बने। फूड पार्क बनने वाला था वो भी नहीं बना।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी झूठ बोलते हैं। वह पहले भगवान का नाम लेते हैं और फिर झूठ बोलते हैं। न नौकरी दी और न ही 15 लाख रुपये किसी को दिये। राहुल गांधी ने जनता से कहा कि अब जब भाजपा के लोग यहां आएं तो उनसे कहिए कि आपको अपने प्रधानमंत्री पर शर्म आनी चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा कि हमारी केंद्र में सरकार बनी तो अमेठी व रायबरेली का विकास करेंगे। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यूपी में पूरे दम से लड़ेगी। हम मायावती जी, अखिलेश यादव व मुलायम सिंह यादव का सम्मान करते हैं लेकिन अपनी विचारधारा के लिए लड़ेंगे।
राहुल गांधी ने कहा कि अमेठी व रायबरेली से मेरा राजनीतिक नहीं बल्कि पारिवारिक रिश्ता है। मैं कहीं भी जाऊं यहां के लिए ही काम करता हूं।
पुरानी पेंशन बहाली की मांग घोषणा पत्र में करेंगे शामिल
राहुल गांधी अमेठी दौरे के दूसरे दिन पुरानी पेंशन बहाली मंच के कार्यकर्ताओं से मिले। कार्यकर्ताओं ने उनसे मिलकर पुरानी शर्तों के अनुसार पेंशन बहाली की मांग की जिस पर राहुल गांधी ने मुद्दे को लोकसभा चुनाव के घोषणा पत्र में शामिल करने का भरोसा दिलाया।
राहुल गांधी ने कल रात रायबरेली के भुएमऊ गेस्ट हाउस में रात्रि विश्राम किया। बृहस्पतिवार सुबह से ही उनसे मिलने के लिए रायबरेली व अमेठी के नेताओं व कार्यकर्ताओं की भीड़ लगी रही।
एससी-एसटी संशोधन एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट का रोक लगाने से इनकार
नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम में संशोधनों पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अनुसूचति जाति-अनुसूचित जनजाति अधिनियम में संशोधनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर पहले से ही लंबित पुनर्विचार याचिका के साथ सुनवाई की जाएगी।
पिछले साल पिछले साल अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम में सेक्शन 18 जोड़ दिया था जिसने इस तबके के लहिलाफ अपराधों को गैर जमानती बना दिया था। ऐसे मामलों में सरकारी कर्मचारी के खिलाफ भी कार्रवाई करने के लिए पुलिस को इजाजत लेने की जरूरत नहीं है।
वर्तमान में रिटायर हो चुके जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने पिछले साल मार्च में एससी-एसटी अत्याचार के मामलों में तुरंत गितफ़्तार पर रोक लगाकर जांच की बात कही थी। अपने आदेश में कोर्ट ने यह भी कहा था कि सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी के लिए पुलिस को नियुक्त करने वाले प्राधिकरण से इजाजत लेनी होगी। गैर सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक की अनुमति अनिवार्य थी।
जिसके बाद एससी एसटी समुदाय की नाराजगी और राजनीतिक दबाव में आकर केंद्र ने कोर्ट में पुनर्विचार याचिका डाली थी मगर कोर्ट ने अपने आदेश पर रोक लगाने से इंकार कर दिया था।
सुनवाई के दौरान पीठ ने इस मामले के अग्रिम जमानत के प्रावधान करने के अपने आदेश को सही मानते हुए कहा कि यह जरूरी है। पीठ ने कहा कि इस मामले में अधिकतम दस वर्ष की सजा का प्रावधान है जबकि न्यूनतम सजा छह महीने है। जब न्यूनतम सजा छह महीने है, तो अग्रिम जमानत का प्रावधान क्यों नहीं होना चाहिए। वह भी तब जबकि गिरफ्तारी के बाद अदालत से जमानत मिल सकती है। जिसके बाद केंद्र ने कोर्ट के आदेश को पलटने के लिए दोनों सदनों में अध्यादेश पेश किया था।