【विशेष-रिपोर्ट】* ✍️ मंगल भारत *संजय टाइगर रिजर्व में 8 वयस्क बाघ शावक लापता ? *रहस्यमय तरीके से गायब हो रहे बाघ* ? *करोड़ों खर्च करने के बाद भी टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ोतरी नहीं*

*【विशेष-रिपोर्ट】* ✍️

मंगल भारत
*संजय टाइगर रिजर्व में 8 वयस्क बाघ शावक लापता

? *रहस्यमय तरीके से गायब हो रहे बाघ*

? *करोड़ों खर्च करने के बाद भी टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ोतरी नहीं*
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*सीधी जिले के संजय टाइगर रिजर्व में बाघों का रहस्यमय तरीके से गायब होना सुर्खियों में बना हुआ है।*
*यहां यदि बाघों का आंकलन किया जाए तो विगत चार वर्षों में लगातार शावक बड़े होकर गायब होते रहे और विभागीय अधिकारी अपने हाथ से ही अपनी पीठ ठोकते रहे परिणामतहः यहाँ बाघों की संख्या स्थिर बनी रहना तो दूर उल्टा कम होती गई।*

*दुबरी रेंज से ही गायब हुए बाघ…*
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संजय दुबरी टाइगर रिजर्व में जो भी बाघ गायब हुए सभी दुबरी रेंज से है। आज भी दुबरी रेंज बाघों की बर्बादी के कगार पर खड़ा है इस पर विभाग आज भी अन्य दूसरे कार्यों में मशगूल है और मूल उद्देश्य से भटक गया है। इसमें विभाग की लापरवाही और संदिग्धता से इंकार नहीं किया जा सकता।

*अतीत पर नजर…*
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पूरे मामले पर अतीत से यदि नज़र डालें तो एक बाघिन जो डेवा क्षेत्र में अपना रहवास बनाये हुए है चार वयस्क बाघशावकों को बड़े करके छोड़ी किन्तु चारों शावक कहाँ गए पता नहीं चला ? और शासन का करोड़ों रुपये प्रति बाघ खर्च होता रहा। वहीं पूर्व में गोइदवार/बहेरवार क्षेत्र में एक बाघिन ने चार बच्चे बड़े करके छोड़ी जो आज तक गायब है…? इस प्रकार आठ वयस्क शावक बाघ अभी तक लापता रहे हैं।

*फिर होगी नई चुनौती सामने…*
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आज टाइगर रिजर्व के सामने एक नई चुनौती है जब बाघिन टी-11 तीन वयस्क बाघ छोड़कर अगले माह बच्चे देने की संभावना पर है। ये तीन वयस्क बाघ जैसे ही महुआ और तेंदूपत्ता का सीजन प्रारंभ होगा इनके गायब होने की पूरी संभावना है। पिछले आठ बाघों के गायब होने के बाद अब तीन बाघ कुछ ही दिनों के मेहमान हो सकते हैं। जिन्हें आज तक रेडियो कालर नही लगाया गया है।

*आखिरकार कहाँ गए बाघ…?*
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अपनी जिम्मेवारी से बचने के नाम पर विभाग का कहना रहता रहा है कि बाघ अन्य जंगलों में चले गए किन्तु आसपास बफर क्षेत्र या टेरिटोरियल जंगल के किसी अधिकारी या कर्मचारी ने बाघ होने की पुष्टि नहीं की। अब शंका है कि बाघ या तो शिकारियों द्वारा मारे गए या ग्रामीणों द्वारा ? जिसकी जानकारी में विभाग के पास मौन रहने के सिवा कोई चारा नहीं है। सुरक्षा व्यवस्था में आज तक कोई सुधार या बाघों के गायब होने का कारण नहीं जाना जा सका।

*आखिर क्या करता है राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण…?*
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मध्यप्रदेश का छठां बाघ रहवास क्षेत्र संजय दुबरी टाइगर रिजर्व जहाँ प्रायः दिल्ली से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण के बाघ विशेषज्ञ भ्रमण पर आते हैं किन्तु आज तक यह पता लगाने में असफल रहे कि बाघ कहाँ जा रहे हैं ? अभी तक अनेक टाइगर रिजर्व जैसे,कान्हा,बाँधवगढ, पेंच ,पन्ना एवं सतपुड़ा में बाघों को रेडियो कालर लगाकर बाघ विचरण क्षेत्र का पता लगा लिया जाता है परन्तु बाघों के इतने नुकसान के बावजूद प्रति बाघ प्रति वर्ष लगभग एक करोड़ शासन की राशि खर्च करने के बाद बाघों के संबंध में किसी प्रकार की जानकारी विभाग को नहीं हो सकी।
*इस मामले में वन विभाग के अधिकारी कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। पर वो ये भी सुधार नहीं कर रहे हैं कि टाइगर रिजर्व से शावक कम हुए हैं। कॉलर आईडी लगाने को लेकर भी वो स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं।*
*यह बात सिद्ध करती है कि अधिकारी किसी भी प्रकार से शासन के इस क्षति के लिए ज़िम्मेवारी लेने को तैयार नहीं है।*

*इनका कहना है…*
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संजय टाइगर रिजर्व से शावक गुम होने की बात सही नहीं है। उत्तरी शहडोल की ओर पार्क का बफर एरिया है, उस ओर वो चले जाते हैं और आगे भी उनका आना-जाना लगा रहता है। इस जगह को टाइगर अपने बच्चे देने के लिए मुख्य रूप से यूज करते हैं और यहां से बड़े होकर पलायन कर जाते हैं। यही वजह है कि मप्र में आॅवरआॅल टाइगरों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।
*यू. प्रकाशम*
*(पीसीसीएफ)*
*वाइल्ड लाइफ,*
*म.प्र. शासन, भोपाल*
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