राकेेश को प्रदेशाध्यक्ष पद से मुक्त करने की मुहिम शुरू

भोपाल (मंगल भारत)। अनुशासित, कैडरबैस व कुलीनों

की पार्टी कही जाने वाली मप्र भारतीय जनता पार्टी में झाबुआ विधानसभा उपचुनाव में हार के साथ ही कलह शुरू हो गई है। इस हार के लिए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह को जिम्मेदार माना जा रहा है। उन्हें हटाने के लिए पार्टी के भीतर ही मुहिम शुरू हो गई है।
पहले भाजपा के वरिष्ठ विधायक केदारनाथ शुक्ला ने कहा की राकेश सिंह ने पार्टी को चौपट कर दिया और झाबुआ हार के लिए राकेश की अकर्मण्यता जिम्मेदार है और अब भाजपा के वरिष्ठ नेता रघुनंदन शर्मा और पूर्व सांसद मेघराज जैन ने यह कहकर राकेश सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह पर सवाल उठा दिए हैं कि झाबुआ विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की बड़ी हार है। इसके लिए कौन-कौन नेता जिम्मेदार है, इस पर चिंतन होना ही चाहिए। बताते हैं कि भाजपा की इस अंदरूनी कलह को संघ ने गंभीरता से लिया है। झाबुआ उपचुनाव में मिली हार ने भाजपा को न सिर्फ बैकफुट पर ला दिया है, बल्कि प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह की नेतृत्व क्षमता पर केदार शुक्ला और रघुनंदन द्वारा खड़े किए जा रहे सवालों ने उसकी बेचैनी भी बढ़ा दी है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राकेश सिंह के खिलाफ विरोध के स्वर इसलिए भी उठ रहे हैं कि जब से वे पार्टी के मुखिया बनाए गए हैं, वे पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से सामंजस्य नहीं बना पाए हैं। कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से उनकी संवादहीनता को लेकर कार्यकर्ता यहां-वहां पार्टी फोरम पर दबे स्वरों में सवाल उठाते रहे हैं। इसके अलावा राकेश सिंह को लेकर कार्यकर्ता यह भी कहते रहे हैं कि ऐसा लगता ही नहीं हैं, कि वे मप्र भाजपा के अध्यक्ष हैं। महाकौशल तो दूर उनका कार्यक्षेत्र जबलपुर तक ही सीमित होकर रह गया है। इसके साथ उन पर मीडिया से संवादहीनता पर सवाल उठते रहे हैं। कहा जाता है कि वे मीडिया से बात करने में कतराते हैं।
कलह से संघ नाराज
बताते हैं कि झाबुआ उपचुनाव में हार के बाद पार्टी में जिस तरह से आंतरिक कलह उभरी है, उसने संघ को चिंता में डाल दिया है। संघ ने भाजपा के संगठन महामंत्री सुहास भगत से इस बारे में जानकारी मांगी है। इस कलह को शांत करने के लिए पार्टी हाईकमान से बात की है।
क्यों उठ रही है कलह
पार्टी सूत्रों के अनुसार जब राकेश सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था, तो पार्टी के भीतर ही एक धड़ा कतई नहीं चाहता था कि उन्हेें अध्यक्ष बनाया जाए। उस समय पार्टी के भीतर सिर्फ पूर्व नरोत्तम मिश्रा ही ऐसे नेता थे, जिनको लेकर यह कहा जाने लगा था कि उन्हें ही अध्यक्ष बनाया जाएगा। लेकिन तब कहते हैं कि शिवराज पार्टी हाईकमान के सामने अड़ गए थे कि नरोत्तम के अलावा कोई भी चलेगा। ऐसे में कई नाम सामने आए, लेेकिन राकेश सिंह के नाम पर शिवराज सहमत हुए, और उन्हेें पार्टी अध्यक्ष बना दिया गया। बताते हैं कि अब झाबुआ उपचुनाव हार के बाद भाजपा के भीतर से ही राकेश को हटाने की मुहिम शुरू हो गई है। केदार, रघुनंदन और मेघराज जैन के स्वर उसी विरोध का हिस्सा हैं। कहा जा रहा है कि यदि प्रदेश अध्यक्ष को लेकर पार्टी हाईकमान ने जल्द कोई फैसला नहीं लिया तो प्रदेश अध्यक्ष को लेकर यह कलह अभी और गहराएगी।
अमित शाह भी नाराज
पार्टी सूत्रों के अनुसार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह कहीं न कहीं भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष और गृहमंत्री अमित शाह की पसंद माने जाते हैं। पार्टी के भीतर राकेश को लेकर उठते विरोध के स्वरों से वे नाराज हैं। बताते हैं कि इसलिए जब केदार ने राकेश के खिलाफ विरोध के स्वर उठाए तो तत्काल उन्हें नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
शिवराज की कार्यशैली पर भी सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की कार्यशैली पर रघुनंदन शर्मा ने जो सवाल उठाए हैं, कहा जा रहा है कि वह पार्टी के आम कार्यकर्ता की पीड़ा है। कार्यकर्ता कहने लगे हैं की माफ करो शिवराज। पार्टी ने उन्हें सदस्यता अभियान का राष्ट्रीय संयोजक बनाकर पूरे देश में पार्टी के ज्यादा से ज्यादा सदस्य बनाने का जिम्मा दिया है लेकिन वे बजाय इस कार्य को अंजाम देने के पूरे समय मप्र में ही सडक़ से लेकर सदन में दिख रहे हैं। वे खुद भी कई दफे कह चुके हैं कोई कुछ भी कर ले, मैं मध्यप्रदेश छोडक़र कहीं नहीं जाऊंगा। उनकी इस सक्रियता से विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पार्टी की मंशानुसार राजनीतिक दायित्वों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं। एक तरह से शिवराज लगातार मप्र में सक्रियता बनाए रखकर राजनीतिक संभावनाओं वाले नेताओं को सोच-समझी रणनीति के तहत साइन लाइन करने में लगे हुए हैं।
नहीं उभर पा रहा नेतृत्व
भाजपा के ही पदाधिकारी कहते हैं कि प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अव्यावहारिक कार्यशैली से मप्र में पार्टी में दूसरी पंक्ति का नेतृत्व नहीं उभर पा रहा है। जबकि भाजपा हाईकमान चाहता है कि शिवराज के बाद मप्र में पार्टी नेतृत्व के रूप में कैलाश विजयवर्गीय, गोपाल भार्गव, नरोत्तम मिश्रा और भूपेंद्र सिंह को आगे लाया जाए। हालांकि पार्टी हाईकमान ने कैलाश विजयवर्गीय को पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाकर उन्हें उनकी क्षमताओं को तोहफा दे दिया है।

x

Check Also

स्कूली के बच्चों का सामान्य ज्ञान बढ़ाने की कवायद, केबीसी की तरह होगी स्पर्धा

भोपाल (मंगल भारत)। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों में सामान्य ज्ञान वृद्धि के लिए अब सरकार नया प्रयोग करने ...