अतिथि शिक्षकों की दीपावली काली कर फिर कोरिया की सैर करने जाएंगे अफसर

भोपाल (मंगल भारत)। एक तरफ प्रदेश के सरकारी

स्कूलों में पढ़ाई का जिम्मा उठा रहे करीब 45 हजार अतिथि शिक्षकों को वगैर वेतन के दीपावली जैसा पर्व मनाने को मजबूर होना पड़ा है, तो दूसरी ओर शिक्षा सुधार के अध्ययन के नाम पर शिक्षा विभाग के अफसर विदेश की सैर पर सैर कर रहे हैं। अब तक तीन दलों में करीब सौ अफसर दक्षिण कोरिया की सैर कर चुके हैं और अब फिर से एक और दल जाने की पूरी तैयारी कर चुका है। यह दल दो नवंबर को रवाना हो रहा है। विभाग के अफसरों ने अध्ययन के नाम पर सैर सपाटा का यह अच्छा बहाना बना लिया है। यह अध्ययन ऐसे समय किया जा रहा है जब की प्रदेश के सरकारी स्कूल मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। खास बात यह है कि प्रदेश के हजारों स्कूल भवन विहीन हंै और कई तो एक कमरे में चल रहे हैं पर अफसर सरकार को यहां के स्कूलों को साउथ कोरिया के थ्री स्टार स्कूलों की तर्ज पर बेहतर बनाने का सपना दिखा रहे हैं। गौरतलब है कि बीते पांच माह में मंत्री समेत आला अफसरों के दल तीन बार साउथ कोरिया की सैर कर चुके हैं तो चौथा दल 2 नवंबर को फिर साउथ कोरिया के लिए रवाना हो जाएगा। इन यात्राओं पर करीब चार करोड़ रुपए खर्च किया जा चुका है। दूसरी तरफ प्रदेश के सरकारी स्कूलों में करीब डेढ़ माह पहले रखे गए करीब 45 हजार अतिथियों को वेतन के लाले पड़े हुए हैं। जिसकी वजह से अतिथियों की दीपावली फीकी रह गई।
किस दल में कितने अफसरों ने की सैर
प्रदेश के स्कूलों की शिक्षण व्यवस्था में सुधार के नाम पर स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री व अधिकारी साउथ कोरिया के स्कूलों की ताबड़-तोड़ सैर कर रहे हंै। बीते जून में स्कूल शिक्षा के तीस अधिकारी दक्षिण कोरिया की सैर करके आ चुके है। इसके बाद सितंबर के पहले सप्ताह में 35 अधिकारी व प्रोग्रामर तक मंत्री के साथ सैर करने के लिए दक्षिण कोरिया के लिए दूसरे दल के रूप में गए थे। 21 अक्टूबर को 35 सदस्यीय तीसरा दल गया था। अब चौथा दल दो नवंबर को रवाना हो रहा है। एक दल का खर्च करीब एक करोड़ के आस-पास है।
शिक्षकों का वेतन सबसे ज्यादा
दक्षिण कोरिया के स्कूलों में थ्री स्टार होटल की तरह सुविधाएं हैं। वहां के शिक्षकों का सबसे ज्यादा वेतन है। जबकि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं ही नहीं है। यहां वर्तमान में शिक्षक को सबसे कमजोर तबका माना जाता है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद सरकारी स्कूलों में तीन साल में पूरी सुविधाएं जुटाना थी। लेकिन दस साल बीतने के बाद भी हालात बदतर ही हुए हैं। विभाग की तरफ से चौथा दल साउथ कोरिया के लिए भेजा जा रहा है। लेकिन वहां की एक भी व्यवस्था को प्रदेश के स्कूलों में लागू नहीं किया जा सका है।
एक लाख शिक्षकों का अभाव
प्रदेश के स्कूलों में एक लाख शिक्षकों की कमी है तो वहीं बिजली की सुविधा वर्षांे से नहीं है। प्रदेश में करीब 1 लाख 14 हजार 241 प्राइमरी व मिडिल स्कूल हैं। राजधानी में इनकी संख्या करीब 1231 है। प्रदेश के इन स्कूलों में बच्चों की संख्या के मान अनुमान एक लाख शिक्षकों की कमी है। विभाग ने इस सत्र में स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती का दावा किया तो लेकिन सत्र शुरू होने के फेल साबित हुआ। ऑनलाइन ट्रांसफर में हुए खेल के बाद तो जमीनी स्तर पर हालात बेहद खराब है। गांव के स्कूल पूरी तरह खाली हो गए हैं। यहां पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं बचे हैं।

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