थानों में टूआईसी की जवाबदारी बढ़ाने की तैयारी

भोपाल (मंगल भारत)। अब तक थाना क्षेत्र में होने वाली

किसी भी गंभीर घटना और दुर्घटना के लिए थाना प्रभारी को ही जिम्मेदार माना जाता था, लेकिन अब इसके लिए टूआईसी भी जिम्मेदार होगा। टूआईसी थाने के वरिष्ठ सब इंस्पेक्टर को पुलिसिया भाषा कहा जाता है। टीआई की अनुपस्थिति में सेकंड इन कमांड (टू आईसी) यानि की ब्रेवो ही थाना प्रभारी का दायित्व निभाता है। फिलहाल यही कॉल साइन थाने के अन्य सब इंस्पेक्टर्स का भी होता है। अब इसमेें बदलाव कर प्रयोग के तौर पर पहली बार राजधानी में टूआईसी की जवाबदारी बढ़ाने की तैयारी कर ली है। इसे लागे करने के बाद टूआईसी को तो ब्रेवो के नाम से ही जाना जाएगा, लेकिन अन्य थाने में पदस्थ सब इंस्पेक्टर्स का कॉल साइन बदल दिया जाएगा। इससे टीआई की अनुपस्थिति में टू आईसी ही थाने की हर अच्छी और बुरी घटना के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार होंगे। इस दौरान थाने पहुंचने वाले आम लोगों की समस्या के निराकरण की जिम्मेदारी भी टूआईसी की रहेगी। एएसपी अखिल पटेल के मुताबिक आर्म्ड फोर्स में टूआईसी का बेहद महत्व रहता है। पुलिस में अमूमन ऐसा नहीं हो पाता है। थाने का टूआईसी पूरी तरह से थाना क्षेत्र की जवाबदारी नहीं ले पाता है। नई व्यवस्था के तहत टूआईसी उन्हीं सब इंस्पेक्टर्स को बनाया जाएगा, जो थाने का प्रभार संभाल सकें। इसके लिए सभी थानों के सब इंस्पेक्टर्स में से टूआईसी चिन्हित किए जा रहे हैं।
थाना प्रभारी को होगा फायदा
19 जून 2019 की रात बैरागढ़ पुलिस की कस्टडी में प्रॉपर्टी डीलर शिवम् मिश्रा की मौत हो गई। पुलिस पर थाने में शिवम् से मारपीट का आरोप लगा था। उस वक्त टीआई अजय मिश्रा ड्यूटी ऑफ कर रूम पर जा चुके थे। थाना प्रभारी होने के नाते उनकी जवाबदारी मानी और सस्पेंड कर दिया गया।
30 अक्टूबर 2017 को पीएससी छात्रा से हबीबगंज स्टेशन के पास हुई सामूहिक ज्यादती की एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी के लिए थाना प्रभारी एमपी नगर संजय सिंह बैस को भी जिम्मेदार माना। उस वक्त वह ड्यूटी ऑफ कर घर पहुंच चुके थे। इसके लिए न केवल उन्हें लाइन अटैच किया, बल्कि विभागीय जांच भी की गई। अब इस तरह की घटनाओं के लिए थाना प्रभारी को जिम्मेदार मानने से मुक्ति मिल जाएगी।
महाराष्ट्र माडल में है यह व्यवस्था
महाराष्ट्र में थाना प्रभारी को पुलिस इंस्पेक्टर (पीआई) कहा जाता है। इनके अंडर में चार एपीआई यानी असिस्टेंट पीआई रहते हैं। चारों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी जाती है। यानी कानून व्यवस्था ड्यूटी, क्राइम, इन्वेस्टिगेशन और थाना पीआरओ। भोपाल में नई व्यवस्था लागू होने से ऐसी ही जिम्मेदारी टू आईसी की हो जाएगी। उसे क्राइम और इन्वेस्टिगेशन का काम सौंपा जाएगा।

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