भाजपा काबिल और युवा को देगी जिलोंं की जिम्मेदारी, जोड़-तोड़ शुरू

भोपाल (मंगल भारत)। सूबे से सत्ता गंवान के बाद अब

पार्टी का पूरा ध्यान संगठन को सक्रिय करने पर है। यही वजह है कि पार्टी संगठन के चुनाव में अब उन नेताओं को वरीयता देने का फैसला किया गया है, जो कुशल संगठन से लेकर काबिल होगा उसे ही यह जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके लिए अब पार्टी में स्थानीय स्तर पर जोड़-तोड़ शुरु हो गई है। इस बार संगठन चुनाव में पार्टी ने सख्त रवैया शुरू कर दिया है , जिससे पार्टी नेताओं के लिए चुनौती खड़ी कर दी है। जिलाध्यक्ष के चुनाव में पार्टी ने तय किया है कि न तो कोई गुटबाजी चलेगी और न ही किसी बुजुर्ग को पार्टी की कमान सौंपी जाएगी। प्रदेश में संगठनात्मक चुनाव की प्रक्रिया तेज हो गई है। इसके तहत ही भोपाल-होशंगाबाद के बाद गुरुवार को इंदौर में संभागीय बैठक होने जा रही है। गौरतलब है कि पार्टी के बीते माह 60 हजार बूथ कमेटी के चुनाव हो चुके है। अब अगले माह की 8 और 9 नवंबर में मंडल स्तर के चुनाव कराए जाने हैं। इसके बाद बाद 30 नवंबर से 15 दिसंबर के बीच जिला अध्यक्ष के चुनाव होंगे। अब जिलाध्यक्ष के लिए 45 से 50 के बीच और 35 साल से अधिक आयु के कार्यकर्ता मंडल अध्यक्ष नहीं बन पाएंगे। इसमें भी उन्हीं लोगों को मौका मिलेगा जो पार्टी की रीति-नीति से वाकिफ हों। ऐसे व्यक्ति नहीं चलेंगे, जो न पार्टी का काम करते हैं और न ही बैठकों में आते हैं। कॉकस बनाकर चलने वाले भी बाहर होंगे। अब ऐसा नहीं चलेगा कि खुद दो बार मंडल अध्यक्ष रह लिए, फिर जिले में मंत्री व महामंत्री बन गए और अपने ही लोगों को दोबारा मंडल के पदों पर बैठा दिया।
महिलाओं को मिलेगी तवज्जो
संगठन चुनाव में इस बार महिलाओं को ज्यादा से ज्यादा तादाद में जिलाध्यक्ष और मंडल में तैनात किया जाएगा। अब तक मंडल में तो महिला अध्यक्ष हैं ही नहीं और जिलाध्यक्ष पद पर भी बहुत कम संख्या में महिलाएं हैं। पार्टी महिलाओं के साथ अनुसूचित जाति-जनजाति और ओबीसी के साथ भी संतुलन बनाना चाहती है, इसलिए जनसंख्या आधार पर जहां जो वर्ग ज्यादा होगा, उस वर्ग का अध्यक्ष बनाया जाएगा। माना जा रहा है कि अभी जो महिला नेत्रियां प्रदेश पदाधिकारी हैं, उनमें से भी कुछ को जिला संगठन में शामिल किया जा सकता है।
यह बनाई गई है गाइडलाइन
पार्टी ने जिलाध्यक्ष पद को लेकर गाइडलाइन बनाई है। पार्टी ने कहा कि अब दो बार के बाद कहीं भी किसी को तीसरी बार संगठन की कमान न सौंपी जाए। फिलहाल विधायकों को भी संगठन की कमान सौंपने के बारे में कहा गया है कि यदि कहीं योग्य व्यक्ति न मिले तो ही विधायक को जिलाध्यक्ष बनाया जाए। संगठन मंत्रियों के कामकाज में जो बदलाव किया गया है, वह भी इसलिए किया गया कि इन गाइडलाइन का वे कड़ाई से पालन करवा सकें।

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