अगले माह प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार

पीसीसी चीफ की अटकलें तेज, नाथ पहुंचे दिल्ली
भोपाल (मंगल भारत)। झाबुआ विधानसभा उपचुनाव

में मिली जीत के बाद कांग्रेस में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार और नए पीसीसी चीफ को लेकर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार अगले माह नाथ सरकार का मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। मुख्यमंत्री कमलनाथ दिल्ली पहुंच गए हैं, जहां वे आलाकमान के साथ संभावित चेहरों पर चर्चा कर सकते हैं। इसी के साथ पीसीसी चीफ कौन होगा, इस पर भी मुहर लग सकती है। मुख्यमंत्री के दिल्ली जाने के बाद सियासी पारा चढ़ गया है। कमलनाथ सरकार को दस माह से अधिक का समय हो चुका है। सीएम ने 29 विधायकों को अपने मंत्रिमंडल में जगह दी थी। इसमें कई दूसरे बार के विधायकों को मंत्री बनाया गया था तो कुछ सीनियर नेता छूट गए थे। इनमें से कई नेताओं ने खुद को मंत्री न बनाए जाने का दर्द इशारों ही इशारों में बयां किया था।
इनके नाम चर्चा में
माना जा रहा है कि सीएम अपने मंत्रिमंडल में छोटा सा विस्तार कर सकते हैं। इनमें सीनियर विधायकों को जगह मिल सकती है। उनमें हाल ही में उपचुनाव जीते कांतिलाल भूरिया का नाम प्रमुख है। इसके अलावा के पी सिंह, बिसाहूलाल सिंह, विक्रम सिंह नाती राजा, नीलांशु चतुर्वेदी भी मंत्री बनने वालों की कतार में शामिल हैं।
निर्दलीयों की आस खत्म: कांतिलाल भूरिया के चुनाव जीतने के बाद मंत्रिमंडल में निर्दलीयों के शामिल होने की संभावनाएं कम हो गई है। विधानसभा में अब सरकार बहुमत में है।
पीसीसी चीफ की रेस में भूरिया सबसे आगे
पूर्व केन्द्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया के चुनाव जीतने के बाद उनका नाम अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की दौड़ में शामिल हो गया है। भूरिया पूर्व में भी प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। माना जा रहा है कि उनके हाईकमान किसी आदिवासी वर्ग के नेता को अगर पीसीसी चीफ के लिए प्राथमिकता देता है तो भूरिया सबसे बड़ा आदिवासी चेहरा है। मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने भी भूरिया को पीसीचीफ पद का प्रमुख दावेदार बताया है। इसके पहले उन्होंने गृह मंत्री बाला बच्चन को प्रदेश अध्यक्ष पद का दावेदार बताया था। सज्जन सिंह वर्मा सीएम कमलनाथ के करीबी माने जाते हैं। वर्मा ने बाला बच्चन का नाम उस वक्त आगे बढ़ाया था जब मध्यप्रदेश में प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए कई लोग दावेदारी जता रहे थे। जिसमें सबसे प्रमुख नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया का था।
निगम-मंडलों पर भी फैसला जल्द
झाबुआ उपचुनाव के कारण अटकी निगम-मंडल और आयोगों में नियुक्तियां भी जल्द शुरू होने के आसार हैं। सीएम संगठन के नेताओं को इस बात के संकेत भी दे चुके हैं। प्रदेश में 15 साल बाद सत्ता में लौटी कांगे्रस में अनेक नेता निगम-मंडल में पद पाने के लिए पिछले दस महीनों से दावेदारी कर रहे हैं। इनमें कई ऐसे नेता भी शामिल हैं जो इस बार किन्हीं कारणों से टिकट से वंचित रह गए थे। अराजनीतिक नियुक्तियों में अब तक अपेक्स बैंक में हुई अशोक सिंह की नियुक्ति ही प्रमुख मानी जा रही है। अब डेढ़ दर्जन से अधिक निगमों और आयोगों में नियुक्तियां होनी हैं। जिन नेताओं के नाम निगम मंडलों और अध्यक्षों के लिए चल रहे हैं उनमें दीपक सक्सेना प्रमुख हैंं। दीपक सक्सेना ने सीएम कमलनाथ के लिए विधायकी छोड़ी थी। इसके अलावा प्रदेश कांगे्रस की मीडिया विभाग की अध्यक्ष की अध्यक्ष शोभा ओझा, पूर्व विधायक जेवियर मेढ़ा, राजीव सिंह, भूपेंद्र गुप्ता, जेपी धनोपिया, राजा पटेरिया जैसे नेताओं के नाम भी शामिल हैं। इनमें जेवियर मेढ़ा को झाबुआ से टिकट न मिलने के बाद निगम-मंडल में नियुक्ति का आश्वासन दिया गया था।

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