सौ फीसदी परिणाम लाने के लिए एक हजार सरकारी स्कूल बनेंगे विश्वस्तरीय

भोपाल (मंगल भारत)। सूबे के सरकारी स्कूलों में

बदहाल शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए अब सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। इसकी शुरुआत एक हजार स्कूलों का चयन कर की जा रही है। गिरते शिक्षा के स्तर से मुख्यमंत्री कमलनाथ बेहद नाराज हैं। यही वजह है कि विभागीय समीक्षा केे दौरान मुख्यमंत्री गहरी नाराजगी तक जता चुके हैं। परिणाम स्वरुप अब विभाग ने इसमेें सुधार के लिए मिशन मोड पर काम करना शुरू कर दिया है। इसके तहत अब विभाग एक कार्ययोजना तैयार कर रहा है। जिसे मिशन-1000 नाम दिया गया है। जिसके तहत प्रदेश के सभी जिलों से एक हजार स्कूल चिन्हित कर उन्हें इस मिशन में शामिल किया जाएगा। इन स्कूलों को वल्र्ड क्लास बनाया जाएगा, यानी कि इनका इंफास्ट्रक्चर देश के सबसे बेहतरीन स्कूलों जैसा होगा। कक्षा एक से 12वीं तक के इन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या भी पर्याप्त होगी। सरकार ने लक्ष्य तय किया है कि इन स्कूलों में छात्रों का रिजल्ट 100 फीसदी हो और अगले पांच साल में सारे बच्चे फस्र्ट डिवीजन पास हों। प्रयोग सफल रहा तो पांच साल में प्रदेश में स्कूल शिक्षा की तस्वीर बदल जाएगी।
क्या है मिशन-1000
प्रथम वर्ष- इन स्कूलों के लिए सरकार ने कुछ लक्ष्य भी तय किए हैं। स्कूल शुरू होने के पहल साल सौ फीसदी छात्र बोर्ड की परीक्षाओं में पास हों। कम से कम 50 फीसदी छात्रों का रिजल्ट फस्र्ट डिवीजन यानी कि 60 फीसदी से ऊपर आना चाहिए। द्वितीय वर्ष- शत प्रतिशत विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं में पास होने के साथ साथ न्यूनतम 60 फीसदी छात्र प्रथम श्रेणी में पास होना चाहिए। तृतीय वर्ष- तीसरे साल में सौ फीसदी रिजल्ट के साथ 70 प्रतिशत छात्र फस्र्ट डिवीजन में पास होना चाहिए। चतुर्थ वर्ष- सरकार की कार्ययोजना के अनुसार चौथे साल में 80 फीसदी छात्र फस्र्ट डिवीजन में पास होंगे। पंचम वर्ष- इन स्कूलों के पांचवें साल में बोर्ड परीक्षाओं के शत प्रतिशत छात्रों का परीक्षा परिणाम फस्र्ट डिवीजन में आएगा।
यह हैं मौजूदा हालात
वर्तमान में प्रदेश की स्कूल शिक्षा की हालत बहुत खराब है। एक रिपोर्ट के अनुसार प्राथमिक स्कूल के 46 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जिन्हें पढऩा भी नहीं आता। प्रदेश में साठ फीसदी स्कूलों में खेल सामग्री की भारी कमी है। कई स्कूल तो एक एक शिक्षक के सहारे हैं। प्रदेश का स्कूल शिक्षा का स्तर देश में निचले पायदान पर आता है।
इन मापदंडों से होगा स्कूलों का चयन
प्रदेश में एक हजार स्कूलों के चयन के लिए सरकार ने कुछ मापदंड तय किए हैं। इनमें हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों का चयन ही किया जाएगा। चयन के लिए एक परिसर-एक शाला के तहत संचालित कक्षा 1 से 10, कक्षा 1 से 12, कक्षा 6 से 12 और कक्षा 9 से 12 तक संचालित हों। एक स्कूल में 400 से ज्यादा बच्चे होने चाहिए। स्कूल में पर्याप्त शिक्षक होने की अनिवार्यता भी है। इन स्कूलों का इंफास्ट्रक्चर अच्छा हो और पर्याप्त संख्या में क्लासरूम हों। मिशन 1000 में चयन के लिए पिछले तीन सालों का रिजल्ट भी देखा जाएगा। बेहतर रिजल्ट के आधार पर ही स्कूल का चयन इस मिशन के लिए किया जाएगा। प्रदेश में सरकार बनने के बाद सीएम कमलनाथ ने स्कूल शिक्षा बेहतर करने पर जोर दिया था।
शिक्षक और प्राचार्यों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
एक हजार स्कूलों में तैनात होने वाले शिक्षकों को शिक्षा जगत की नामचीन हस्तियां प्रशिक्षण देंगी। प्रशिक्षण का खाका तैयार किया जा रहा है। शिक्षकों का चयन भी उनके तीन साल के रिजल्ट के आधार पर किया जाएगा। इन स्कूलोंं के प्राचार्यों को भी प्रशिक्षित किया जाएगा। स्कूलों में एडवांस पढ़ाई के साथ-साथ व्यापमं, योग, तैराकी और खेल की सुविधाएं भी मुहैया कराई जाएंगी। इनके लिए ट्रेंड ट्रेनर नियुक्त किए जाएंगे।

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