मप्र में शाही खर्च से लगातार बिगड़ रही सरकारी खजाने की सेहत

भोपाल मंगल भारत)। कमलनाथ सरकार के ताजा कर्ज

पर सवाल उठने लगे हैं। सरकार के फैसलों के चलते राजस्व को लगातार घाटा हो रहा है। हालांकि, सरकार के राजस्व खजाने में लगातार इजाफा हो रहा है। आर्थिक मंदी और केंद्रीय करों में कमी के चलते ज्यादातर विभाग इसकी आशंका जाहिर कर चुके हैं। सिंचाई, बिजली, वेट, राजस्व स्टाम्प एवं पंजीयन, खनिज साधन, वन जैसे महकमे से राजस्व (आय) की जो उम्मीद सरकार पाले थी, वो फिलहाल तो पूरी होती नजर आ रही है। चिंता की बड़ी वजह यह है कि केंद्र सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में टैक्स में जो छूट दी है, उससे राज्य को केंद्रीय करों से मिलने वाली राशि में कटौती हो सकती है। चार से पांच हजार करोड़ रुपए की और कटौती प्रदेश के हिस्से में हो सकती है। इधर, राज्य के खजाने पर लगातार खर्च का बोझ बढ़ता जा रहा है। इसके चलते फंड मैनेजमेंट गड़बड़ाने लगा है।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2019-20 में विभिन्न करों से 79 हजार 742 करोड़ रुपए की आय होने का अनुमान लगाया था। सितंबर 2019 तक 31 हजार 282 करोड़ रुपए खजाने में आ गए, जो बीते साल के 28 हजार 866 करोड़ रुपए से अधिक रहे। हालांकि, सरकार को इससे अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद थी। सूत्रों के मुताबिक, पिछले दिनों मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रदेश के वित्तीय स्थिति की समीक्षा की। इसमें परिवहन विभाग ने सेल कम होने तो अन्य विभागों ने राजस्व कम आने की अलग-अलग वजह बताई। करीब 10 हजार 921 करोड़ रुपए राजस्व कम मिलने की आशंका जताई गई है। ऊर्जा के क्षेत्र में वसूली कम होने और विभिन्न प्रकार की रियायतें उपभोक्ताओं को देने की वजह से राजस्व प्राप्ति का गणित गड़बड़ा गया है। वहीं, आबकारी विभाग से नीति में कई बदलाव किए जाने की वजह से 13 करोड़ रुपए का राजस्व मिलने की जो उम्मीद थी, वो पूरी तरह नजर नहीं आ रही है। सितंबर तक विभाग को पांच हजार 390 करोड़ रुपए का राजस्व मिला है। यह सितंबर 2018 के चार हजार 625 करोड़ रुपए की तुलना में अधिक तो है पर लक्ष्य से बहुत दूर है। परिवहन विभाग 740 करोड़, खनिज साधन 350 करोड़, स्टाम्प एवं पंजीयन से 771 करोड़, वेट से दो हजार 250 करोड़, सिंचाई से 112 करोड़ रुपए कम मिलने की आशंका जताई गई है।
क्यों बढ़ता जा रहा है खर्च
राज्य सरकार का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। गुजरात में सरदार सरोवर बांध के चलते किए गए पुनर्वास व राहत कार्य के लिए राज्य सरकार को खजाने से 500 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने पड़े। इसके पहले भी प्रदेश को करीब दस हजार करोड़ रुपए नहीं दिए गए। इसी तरह वर्ष 2018-19 में करीब दस हजार करोड़ रुपए केंद्र से कम मिले। अतिवर्षा और बाढ़ की वजह से 16 हजार करोड़ रुपए मूल्य की खरीफ फसलें चौपट हो गई। तीन हजार करोड़ रुपए की अधोसंरचना को नुकसान पहुंचा। इसकी भरपाई के लिए केंद्र सरकार से छह हजार 671 करोड़ का पैकेज मांगा गया है, जिस पर आश्वासन के सिवाय अभी तक कुछ नहीं मिला है। इधर, केंद्रीय कर्मचारियेां का महंगाई भत्ता 12 से बढक़र 17 यानी एकमुश्त पांच प्रतिशत बढ़ा दिया है। राज्य के ऊपर भी बढ़ोत्तरी का दवाब है। यदि पांच प्रतिशत वृद्धि डीए में की जाती है तो सरकार को 12 सौ करोड़ रुपए सालाना चाहिए। उधर, आबकारी विभाग ने राजस्व लक्ष्य हासिल करने कदम उठाया शुरू कर दिया है। इसके तहत विदेशी शराब दुकानों में अहाता खोलने का फैसला हुआ है। इसके लिए दुकान संचालक को लाइसेंस की वार्षिक राशि का पांच प्रतिशत (10 से 15 लाख ) शुल्क देना होगा। प्रदेश में 1061 विदेशी शराब दुकानें हैं।
आय का गणित (अनुमानित)
कहां से कितनी
एसजीएसटी, आईजीएसटी, क्षतिपूर्ति 25, 882
वेट 14,500
स्टाम्प एवं पंजीयन 6500
आबकारी 13,000
परिवहन 4000
ऊर्जा 3135
भू-राजस्व 1000
खनिज साधन 5850
वन 1500
सिंचाई 1499
अन्य 2376
कुल 79,242
4000 करोड़ की कटौती
उधर, केंद्रीय करों में राज्य के हिस्से से वर्ष 2019-20 से 63 हजार 751 करोड़ रुपए देने का प्रावधान रखा गया था, लेकिन जुलाई में इसे घटाकर 61 हजार करोड़ रुपए कर दिया। इस प्रकार सीधे-सीधे दो हजार करोड़ रुपए का गणित यहीं गड़बड़ा गया। वास्वित रूप से इस राशि में भी प्रदेश को 23 हजार 941 करोड़ रुपए अक्टूबर तक मिले। जबकि इस अवधि में वर्ष 2018-19 में 28 हजार 463 करोड़ रुपए प्राप्त हुए।

x

Check Also

स्कूली के बच्चों का सामान्य ज्ञान बढ़ाने की कवायद, केबीसी की तरह होगी स्पर्धा

भोपाल (मंगल भारत)। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों में सामान्य ज्ञान वृद्धि के लिए अब सरकार नया प्रयोग करने ...