धान उपार्जन के लिए नाथ सरकार को लेना होगा 6 हजार करोड़ का कर्ज

भोपाल (मंगल भारत)। प्रदेश में धान उपार्जन को लेकर

मार्कफेड के सामने गंभीर वित्तीय संकट पैदा हो गया है। नागरिक आपूर्ति निगम ने पिछले तीन सीजन के करीब 6 हजार करोड़ रुपए अटका रखे हैं इससे संभावना बढ़़ गई है कि महंगी दरों पर खुले बाजार से ऋण लेना पड़ेगा। मार्कफेड बैंकों को रोजाना ढाई करोड़ रुपए ब्याज के अलग से चुका रहा है। प्रदेशभर में 5 दिसंबर से समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी शुरू हो जाएगी। इस बार 1815 रुपए प्रति क्विंटल की दर निर्धारित की गई है। धान उपार्जन के लिए मार्कफेड एजेंसी है। उपार्जन नीति के अनुसार खरीफ सीजन 2019-20 में खरीदी करने के लिए खाद्य विभाग की ओर से आदेश जारी भी कर दिया है। खरीद के लिए मार्कफेड के सामने एक हजार करोड़ की व्यवस्था करने का संकट बन गया है। इतनी बड़ी राशि जुटाने के पीछे नागरिक आपूर्ति निगम की वादा खिलाफी है। जानकारी सामने आई है कि बीते तीन सीजन से गेहूं और दो सीजन से धान का करीब छह हजार करोड़ का भुगतान मप्र राज्य नागरिक आपूर्ति निगम (नान) की ओर से अभी तक नहीं किया गया है।
एनपीए होने का मंडराया खतरा
बढ़ते कर्ज की अदायगी नहीं होने से मार्कफेड के ऊपर नान पेमेंट अकाउंट एनपीए होने का खतरा मंडराने लगा है। सूत्रों की मानें तो मार्कफेड को राज्य सरकार की गारंटी के बाद आरबीआई के निर्देशों के तहत स्टेट बैंक आफ इंडिया से कर्ज मिलता है। जिससे मार्कफेड किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं और धान की खरीदी करके ऑनलाइन भुगतान करता है। इसके बदले बैंक 10 से 12.50 प्रतिशत तक ब्याज वसूलता है। इस राशि की प्रतिपूर्ति बाद में नान करता है लेकिन नान ने तीन सीजन से भुगतान नहीं किया है। इससे मार्कफेड एनपीए होने की ओर बढऩे लगा है। ऐसे में मार्क फेड का एक भी खाता एनपीए हो गया तो बैंकिंग लॉ के अनुसार मार्कफेड के सारे खाते सीज हो जाएंगे।
मंत्री से गुहार
मार्कफेड के वित्तीय दिवालियापन की ओर बढऩे की खतरे से आगाह कराने के लिए विपणन संघ कर्मचारी यूनियन का प्रतिनिधि मंडल मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और फिर मंत्री डा गोविंद सिंह से मिला था। उसका कहना था कि राज्य सरकार को गारंटी के बावजूद बैंक आगे कर्ज नहीं देगा ऐसे में नान से पिछला बकाया दिलवाया जाए।
नागरिक आपूर्ति निगम नहीं नहीं किया पेमेंट
> गेहूं 4200 करोड़ रुपए
> धान 1700 करोड़ रुपए
> कुल 5800 करोड़ रुपए
खरीदी के लिए वांछित राशि वर्ष 2019-20: 1 क्विंटल धान का लेखा जोखा
> एमएस किसान को पेमेंट 1815 रुपए प्रति क्विंटल
> समिति में मंडी लेबर 12 रुपए
> समिति का कमीशन 31.25 रुपए
> मंडी टैक्स 1.5 प्रतिशत 27.23 रुपए
> निराश्रित टैक्स 0.2 प्रति. 3.63 रुपए
> परिवहन भुगतान 50 रुपए
> कुल खर्च 1939.11 रुपए
धान खरीदी का संभावित लेखा जोखा 2019-20
संभावित खरीदी
10 लाख एमटी
संभावित भुगतान
1950 करोड़
भंडारण का किराया
28 करोड़
प्रतिमाह ब्याज
16.25 करोड

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