बकस्वाहा खदान नीलामी से भरेगा सरकार का खजाना, टेक्निकल बिड खुली

भोपाल (मंगल भारत)। आर्थिक तंगी से जूझ रही

कमलनाथ सरकार को जल्द ही राहत मिलने के आसार बन रहे हैं। इसकी वजह है प्रदेश के सबसे पिछड़े इलाके बुदेंलखंड अंचल के तहत आने वाले छतरपुर जिले के बकस्वाहा की प्रसिद्ध हीरा खदान की नीलामी। खदान की नीलामी से सरकार को एक मुश्त बड़ी रकम मिलने जा रही है। इसके अलावा खनन का काम शुरु होने के बाद लगातार कर के रुप में भी हर साल बड़ी रकम सरकारी खजाने में आना तय है। खनिज विभाग ने हीरा खदान की नीलामी के लिए टेंडर बुलाए थे। बीते रोज इसके लिए टेक्निकल बिड खोली गई। अडानी ग्रुप, बिड़ला समूह, वेदांता ग्रुप, शिव रूंगटा माइंस और एनएमडीसी ने टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लिया है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब देश के जाने-माने उद्योग समूहों ने बकस्वाहा खदान की नीलामी में रुचि दिखाई है। तकनीकी कारणों से सरकारी कंपनी एनएमडीसी नीलामी प्रक्रिया से बाहर हो गई है। अब इसके लिए फाइनेंशियल बिड खोली जानी है। चारों कंपनियों में से सबसे ऊंची बोली लगाने वाली कंपनी को हीरा खदान ठेके पर दे दी जाएगी। हीरा खदान की नीलामी की अपसेट प्राइस 60 हजार करोड़ रुपए रखी गई है। गौरतलब है कि खनिज विभाग ने हीरा खदान की नीलामी के लिए सितंबर में टेंडर जारी किए थे। इसमें शर्त रखी गई थी की 11 हजार करोड़ सालाना टर्न ओवर से कम वाली कंपनियां टेंडर नहीं भर पाएंगी। पांच कंपनियों ने ऑनलाइन टेंडर भरे हैं। ये कंपनियां 56-56 करोड़ धरोहर राशि जमा कर चुकी हैं। इन कंपनियों के प्रतिनिधि सितंबर के आखिर में बकस्वाहा खदान का निरीक्षण करने आए थे। भोपाल से पहुंची खनिज विभाग के अधिकारियों की टीम ने कंपनी प्रतिनिधियों को खदान के बारे में विस्तार से जानकारी दी थी। साथ ही पन्ना पहुंचकर उन्हें बकस्वाहा की खदान से निकाले गए हीरों में से जेम क्वालिटी के कुछ हीरे उन्हें दिखाए थे। इन प्रतिनिधियों को हीरे की क्वालिटी पसंद आई थी। ये हीरे खदान के सर्वेक्षण के दौरान रियो टिंटो कंपनी ने निकाले थे। इन हीरों को 97 पैकेटों में भरकर पन्ना जिला प्रशासन की निगरानी में रखा गया है। इनमें छोटे-बड़े सभी साइज के हीरे शामिल हैं।
364 हेक्टेयर में होगा खनन
जिस भी कंपनी को हीरा खनन का ठेका मिलेगा, वह 364 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन कर पाएगी। हीरा खदान का ठेका लेने वाली कंपनी को हीरे की पहली नीलामी प्रदेश में करना होगी। इससे सरकार को हीरे की नीलामी पर 12 प्रतिशत रॉयल्टी के साथ अन्य टैक्स भी मिल सकेंगे। इसके बाद कंपनी कहीं भी हीरे की बिक्री के लिए स्वतंत्र रहेगी। इस क्षेत्र में 34.20 मिलियन कैरेट हीरा खनिज के भंडारों का आंकलन किया गया है।
सात साल पहले लीज पर दी गई थी खदान
गौरतलब है कि राज्य सरकार ने वर्ष 2012 में बकस्वाहा में 958 हेक्टेयर भूखंड रियो टिंटो को लीज पर दिया था। यह वन विभाग की भूमि है। रियो टिंटो ने तमाम परीक्षण कर प्रॉस्पेटिव प्लान तैयार किया था। इसके बाद कंपनी ने पर्यावरण की स्वीकृति के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे पर्यावरण की अनुमति नहीं मिल पाई थी। इस पर वर्ष 2016 में रियो टिंटो ने बकस्वाहा खदान छोड़ दी थी।

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