कांग्रेस-एनसीपी का शिवसेना पर दबाव, उद्धव ठाकरे ही बनें सीएम

मुंबई। कांग्रेस और एनसीपी उद्धव ठाकरे को ही महाराष्ट्र

में गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती हैं। कई सूत्रों ने बताया कि दोनों दलों ने शिवसेना को भी कह दिया है कि वे उद्धव के अलावा उनकी पार्टी से कोई भी दूसरा चेहरा गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री के तौर पर नहीं चाहते हैं। दोनों दलों की तरफ से इस भावना का इजहार तब हुआ है जब कहा जा रहा है कि मातोश्री में शिवसेना के दिग्गज नेता सुभाष देसाई या फिर अपने विधायक दल के नेता और ठाणे के क्षत्रप एकनाथ शिंदे को सीएम उम्मीदवार के रूप में आगे बढ़ाने पर विचार हो सकता है। शिवसेना सार्वजनिक तौर पर कह चुकी है कि उसके पास मुख्यमंत्री के एक से ज्यादा उम्मीदवार हैं। हालांकि, उसने यह भी कहा कि पार्टी की आम राय है कि ठाकरे ही सरकार की अगुआई करें। एक पार्टी विधायक ने कहा कि पार्टी के अंदर भी (ठाकरे के सिवा) किसी दूसरे नेता को एकमत से स्वीकार नहीं किया जा सकेगा।

आदित्य ठाकरे पर सहमति की कितनी गुंजाइश
वहीं, एक वरिष्ठ कांग्रेसी ने कहा, ‘कांग्रेस और एनसीपी नेताओं ने बातचीत के दौरान शिवसेना को कह दिया कि (सरकार की) स्थिरता के लिए उद्धव को सीएम चुना जाना चाहिए।’ गठबंधन के सहयोगी इस बात पर अड़ सकते हैं, भले फॉर्म्युला ढाई-ढाई साल के मुख्यमंत्री का हो या फिर पूरे पांच साल का। कहा जा रहा है कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे खुद ही सीएम बनना नहीं चाहते हैं। लेकिन, हकीकत यह है कि पार्टी के दूसरे दिग्गज या फिर पहली बार विधायक चुने गए 29 वर्षीय आदित्य ठाकरे पर आम सहमति नहीं बन पाएगी। इनमें कोई भी गठबंधन के दोनों दलों को भी स्वीकार नहीं होंगे।

इसलिए भी सबसे पसंदीदा हैं उद्धव
कांग्रेस के दो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण एवं पृथ्विराज चव्हाण और एनसीपी के दो पूर्व उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार एवं छगन भुजबल इस बार चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। पूरी संभावना है कि गठबंधन सरकार में इन सबको नए मुख्यमंत्री के साथ बेहद करीबी से काम करना होगा। इस कारण भी उद्धव सर्वोच्च पसंदीदा उम्मीदवार के तौर पर उभरे हैं। पार्टी लीडरशिप कांग्रेस-एनसीपी पर दबाव बना रही है कि वे 17 नवंबर तक शिवसेनाके सीएम कैंडिडेट को समर्थन देने का ऐलान कर दें। उस दिन बालासाहेब ठाकरे की पुण्यतिथि है।

शिंदे और देसाई भी
जब एकनाथ शिंदे को शिवसेना की तरफ से महाराष्ट्र विधानसभा और विधान परिषद, दोनों सदनों का नेता चुना गया तो कयास लगाए जाने लगे कि उन्हें ही सीएम कैंडिडेट के तौर पर भी आगे किया जाएगा। वहीं सुभाष देसाई उनसे वरिष्ठ हैं और पार्टी के पुराने नेता हैं। वह कांग्रेस और एनसीपी के साथ नई सरकार के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) तय करने वाली समिति में भी शामिल थे।

शिवसेना के अंदर की आवाज
उधर, शिवसेना नेता और विधान परिषद की उपाध्यक्ष नीलम गोरे ने टीओआई से कहा कि वह उद्धव को ही सीएम के तौर पर देखना चाहती हैं क्योंकि वह (उद्धव) दो दशकों से पार्टी का सफल संचालन कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी प्रेजिडेंट की खासियतों का बखान करते हुए कहा, ‘उनका हर तरह के मुद्दे पर ध्यान रहता है और वह हरेक मुद्दे का तार्किक समाधान निकालते हैं। वह चाहे आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मसला हो या फिर किसानों की दयनीय हालत का। प्लास्टिक बैन से लेकर शिक्षा में सुधार को लेकर भी उनकी अपनी सोच है। वह शिव सैनिकों की पहली पसंद हैं।’

x

Check Also

स्कूली शिक्षा विभाग के लिए परीक्षा नहीं, डांस जरूरी

भोपाल। नवीं से बारहवीं तक के विद्यार्थियों को अद्र्धवार्षिक परीक्षा देना अनिवार्य नहीं है, लेकिन डांस सिखाना विभाग ने सर्वोच्च ...