करोड़ों खर्च फिर भी नहीं सुधरे सरकारी स्कूलों के हालात

भोपाल (मंगल भारत)। प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था

दुरावस्था की शिकार हो रही है। हालात यह हैं कि हजारों सरकारी स्कूल भवन विहीन हैं, तो 22 हजार स्कूल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। प्रदेश के करीब 6 हजार स्कूलों में एक कमरे में कई कक्षाएं लगाई जा रही है। इससे प्राथमिक स्कूलों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं भी नहीं लग पा रही है। यह हालात तब हैं जब स्कूल शिक्षा विभाग के मंत्री सहित छह माह में करीब 200 अधिकारी और प्राचार्य दक्षिण कोरिया के टूर पर जा चुके हैं। पिछले दिनों भोपाल में स्कूली शिक्षा को सुधारने के लिए हुई स्टीम कांफ्रेंस भी इस मामले में बेनतीजा रही है।
दक्षिण कोरिया यात्रा पर चार करोड़ फूंके
जानकारी के अनुसार विभाग सिर्फ दक्षिण कोरिया की यात्रा पर करीब चार करोड़ रुपए खर्च कर चुका है, लेकिन दक्षिण कोरिया के स्कूलों का मॉडल लागू नहीं कर पा रहा है। हम बता दें कि प्रदेश में प्राथमिक, माध्यमिक, हाईस्कूल और हायर सेकंडरी स्कूलों की संख्या करीब 1 लाख 23 हजार हैं। वहीं साढ़े 3 लाख शिक्षक हैं।
स्कूलों में 80 हजार पद खाली
प्रदेश के स्कूलों में 80 हजार शिक्षकों के पद खाली है। हालांकि 2013 के बाद 40 हजार पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया अगले साल के जनवरी तक पूरा करने का दावा विभाग कर रहा है। वहीं, 35 हजार शिक्षकों का स्थानांतरण होने से ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल खाली हो गए हैं।
फैक्ट फाइल
प्राइमरी स्कूल – 83890
मिडिल स्कूल – 30341
हाईस्कूल – 4740
हायर सेकेंडरी स्कूल – 3815
शिक्षकों की संख्या – साढ़े 3 लाख
शिक्षकों के पद खाली – 80 हजार

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