राज्यसभा चुनाव: प्रदेश में भाजपा को लग सकता है एक सीट का झटका

भोपाल (मंगल भारत)। मध्यप्रदेश विधानसभा में

विधायकों की संख्या कम हो जाने से राज्यसभा चुनाव में भाजपा को बड़ा झटका लग सकता है। आने वाले राज्यसभा चुनावों में भी एक सीट का नुकसान होना तय माना जा रहा है। हालांकि अपनी सीट बरकरार रखने के लिए पार्टी ने अभी से रणनीति बनाना शुरू कर दी है। प्रदेश में पंद्रह सालों तक भाजपा की सरकार रही। लिहाजा राज्यसभा चुनावों में उसका पलड़ा भारी रहा। राज्यसभा की प्रदेश में 11 सीटें हैं, इनमें फिलहाल आठ भाजपा और तीन कांग्रेस के पास हैं। प्रदेश के तीन राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल अगले साल 9 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। इनमें कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा और सत्य नारायण जटिया शामिल हैं। इन सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया मार्च के दूसरे हफ्ते से शुरू हो जाने के आसार हैं। इस बार विधायकों की संख्या के मान से कांग्रेस भाजपा पर भारी है। कांग्रेस के सदन में115 विधायक हैं। उधर झाबुआ उपचुनाव में मिली हार के बाद भाजपा के विधायकों की संख्या 109 से घटकर 108 रह गई है। इसके अलावा उसके एक अन्य विधायक प्रहलाद लोधी को न्यायालय से सजा होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने उनकी सदस्यता समाप्त कर दी है। लोधी को हालांकि सजा पर हाइकोर्ट से स्टे मिल चुका है पर उनकी सदस्यता बहाल नहीं हुई है। लोधी की सदस्यता बहाल न होने पर उसका एक विधायक और कम हो जाएगा और यह महज 107 पर सिमट कर रह जाएगी।
एक सीट को लेकर उलझ सकता है गणित
राज्यसभा की एक सीट के लिए 58 विधायकों के मत की जरूरत होती है। लिहाजा भाजपा और कांग्रेस को एक-एक सीट मिलना तय है। तीसरी सीट पर गणित उलझा हुआ है। कांग्रेस के पास एक सीट के बाद 57 विधायक बचते हैं। इसके अलावा उसे बहुजन समाज पार्टी केदो, समाजवादी पार्टी केएक और चार निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन हासिल है। भाजपा के पास एक सीट हासिल करने के बाद मात्र 49 विधायकों का ही आंकड़ा रह जाता है। यह आंकड़ा कांग्रेस की तुलना में काफी कम है। इस लिहाज से कांगे्रस इस बार अपने दो सदस्य राज्यसभा में भेजने में सफल हो सकती है।
कांग्रेस-भाजपा जुटे रणनीति बनाने में
उधर राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस-भाजपा रणनीति बनाने में जुट गए हैं। संभावित दावेदारों पर मंथन शुरू हो गया है। कांग्रेस से इस बार फिर दिग्विजय सिंह का राज्यसभा जाना तय माना जा रहा है। इसके अलावा अरूण यादव, सुरेश पचौरी, ज्योतिरादित्य सिंधिया, प्रतिपक्ष अजय सिंह, पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह और सीएम कमलनाथ के लिए विधायक पद से इस्तीफा देने वाले दीपक ससेना का नाम भी राज्यसभा में जाने के लिए संभावित उम्मीदवार माने जा रहे हैं। भाजपा अपनी एक सीट से किसे मौका देती है, यह फिलहाल तय नहीं है। हालांकि भाजपा में पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का नाम राज्यसभा के लिए सबसे ऊपर बताया जा रहा है। प्रभात झा अपना लगातार दूसरा कार्यकाल पूरा कर रहे हैं। सत्यनारायण जटिया भी दूसरीबार राज्यसभा में हैं। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, पूर्व प्रदेश संगठन महामंत्रीमाान सिंह विनोद गोटिया, विजेश लूनावत के नाम भी चर्चाओं में हैं। शिवराज खुद प्रदेश कीराजनीति में सक्रिय रहना चाहते हैं लिहाजा उनके मामले में केन्द्रीय नेतृत्व उनकी राय जानने के बाद ही फैसला करेगा। चर्चा यह भी है कि पार्टी प्रदेश के किसी नेता की जगह केन्द्र से किसी अन्य नेता को चुनाव मैदान में उतार सकती है। फिलहाल धर्मेन्द्र प्रधान और एम जेअकबर प्रदेश से सांसद हैं।

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