नए साल में एक लाख से ज्यादा युवाओं को मिलेगा रोजगार

भोपाल (मंगल भारत)। मप्र के इंजीनियरिंग और

मैनेजमेंट के छात्रों की लॉटरी खुलने वाली है। प्रदेश में देश-विदेश की कई मल्टीनेशनल कंपनियों को बुलाया गया है, कई कंपनियों ने रजामंदी भी दे दी है। माना जा रहा है कि अगले साल जनवरी, फरवरी और मार्च में एक दर्जन बड़ी कंपनियों के ओपन कैंपस प्रदेश में लगेंगे। इससे प्रदेश के एक लाख से ज्यादा इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट के छात्रों को रोजगार मिल सकता है। अभी इंफोसिस और आईबीएम अपना ओपन कैंपस लगाने जा रही हैं। आईबीएम और इंफोसिस का ओपन कैंपस दिसंबर के पहले और दूसरे सप्ताह में लगेगा।
छात्रों का डाटा हो रहा तैयार
विश्वविद्यालय से पिछले पांच साल में पास होकर जाने वाले छात्रों का डाटा भी विवि तैयार कर रहा है। इनमें ऐसे छात्रों की जानकारी जुटाई जा रही है, जो अभी कहीं नौकरी नहीं कर रहे हैं और इंजीनियरिंग के क्षेत्र में जाना चाहते हैं। ऐसे छात्रों को आरजीपीवी प्रशिक्षण देगा।
हर साल निकलते हैं 45 हजार छात्र
हर साल इंजीनियरिंग और फॉर्मेसी के करीब 45 हजार छात्र पास होकर निकल रहे हैं। इनमें से बड़ी कंपनियों में 10 से 15 फीसदी छात्रों को ही रोजगार मिल पा रहा है। इससे प्रदेश की तकनीकी शिक्षा पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। मध्य प्रदेश में पिछले करीब 10 माह में बेरोजगारी दर में 2.8 प्रतिशत की कमी आई है। प्रदेश में बेरोजगारी दर घटकर 4.2 प्रतिशत रह गई है। ये दर साल 2018 में 7 प्रतिशत थी। मध्य प्रदेश में बेरोजगारी दर में 40 फीसदी की कमी आई है। नाथ सरकार ने वचन पत्र में रोजगार देने का वादा किया है, मगर अब तक यह पूरा नहीं हुआ।
इसलिए नहीं मिल रहे रोजगार
प्रदेश की तकनीकी शिक्षा का स्तर अच्छा नहीं है। इस वजह से बड़ी कंपनियों ने कैंपस सिलेशन तक बंद कर दिए हैं। यहां कंपनियों को उनकी जरूरत के मुताबिक होनहार युवा नहीं मिल पा रहे हैं। इस कमी को दूर करने के लिए आरजीपीवी प्रयास कर रहा है। आरजीपीवी ने पिछले सालों में कंपनियों की जरूरत के मुताबिक सिलेबस में बदलाव किया है। अब असर दिखाई देगा।
हर साल कम हो रहे एडमिशन
इंजीनियरिंग में कम हो रहे रोजगार की वजह से एडमिशन की संख्या हर साल कम होती जा रही है। इससे प्रदेश में इंजीनियरिंग के कॉलेज भी बंद हो रहे हैं और कॉलेजों ने अपनी सीटों की संख्या भी कम कर दी है। पांच साल में कॉलेजों ने 30 हजार से ज्यादा इंजीनियंिरग की सीटें कम कर दी हैं। कॉलेज एडमिशन से पहले हर साल अपनी सीटें सरेंडर कर देते हैं।

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