नाथ सरकार ‘पानी का अधिकार’ देने की तैयारी में, मसौदा तैयार

भोपाल (मंगल भारत)। राज्य की कमलनाथ सरकार

अब प्रदेशवासियों को ‘पानी का अधिकार’ देने जा रही है। इसके लिए कानून का मसौदा पूरी तरह से तैयार है। सरकार इसकी जिम्मेदारी आधा दर्जन विभागों को देने जा रही है। यही वजह है उसके लिए तैयार किए गए मसौदे की प्रतियां संबंधित विभागों को भेज दी गई हैंं, ताकि वे इसका अध्ययन कर इसमें संशोधन कर के लिए जरूरी सुझाव दे सकें। मसौदे में सरकार के साथ ही समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने पर फोकस किया गया है। खास बात यह है कि यह कानून लागे होने के बाद सभी जल स्रोतों की जियोटैगिंग होगी और बोरिंग का रजिस्ट्रेशन भी किया जाएगा। दरअसल मसौदे में हर व्यक्ति को रोजाना 55 लीटर पानी देने का प्रावधान किया गया है। इस मासौदे को जल्द ही इस प्रस्ताव को वरिष्ठ सचिव समिति को भेजा जाएगा। सरकार इस मयौदे को अगले माह प्रस्तावित विधानसभा के शीतकालीन सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मई में प्रदेश में पानी का अधिकार कानून लागू करने की घोषणा की थी। इसके बाद जून में इसका मसौदा तैयार करने के लिए विषय विशेषज्ञों व कानूनविदों की एक कमेटी बनाई गई थी। जिसमें योजना आयोग के पूर्व अध्यक्ष मिहिर शाह, जलपुरुष राजेंद्र सिंह आदि को शामिल किया गया है। सरकार जुलाई में विधानसाा में पेश किए गए बजट में पानी का अधिकार कानून के लिए एक हजार करोड़ रुपए का प्रावधान कर चुकी है। पानी का अधिकार कानून के क्रियान्वयन के लिए पीएचई के अलावा नगरीय विकास एवं आवास, जलसंसाधन, वन, कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास व पर्यावरण विभाग मिलकर काम करेंगे।
मसौदे में यह हैं खास प्रावधान 
अब तक पानी के सभी प्राइवेट और सरकारी जल स्रोतों की जानकारी सरकार के पास नहीं थी, लेकिन इस कानून के बाद सभी स्रोतों की जियो टैगिंग होगी और बोरिंग का रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। पानी को लेकर पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से लेकर नगर निगमों के अपने नियम बने हैं। इस कानून के जरिए सभी नियमों का पालन करवाना सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार सख्ती से रूफ टॉप वाटर हार्वेस्टिंग के नियम लागू करेगी। लोगों को जल संरक्षण को लेकर साक्षर और जागरूक किया जाएगा। पानी के अधिकार को अभियान का रूप देने जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। कानून में बारिश के पैटर्न के साथ फसल का पैटर्न लिंक किया जाएगा। पानी बचाने के काम में युवा शक्ति समितियां गठित की जाएंगी। युवाओं को पानी बचाने का दायित्व सौपकर बड़ा आंदोलन चलाया जाएगा। पंचायतें जल समेलन आयोजित कर जल संरक्षण की रणनीति और पानी का बजट बनाएंगी।
हर ग्राम पंचायत में एक तालाब का होगा निर्माण
सभी शहरों गांवों में पाइप लाइन से की जाएगी पानी की सप्लाई। वन विभाग जंगलों में बारिश के पानी का बहाव धीमा करने के लिए काम करेगा, क्योंकि नदियों का मुख्य स्रोत जंगल हैं। कानून में जल संरक्षण के साथ इसका दुरुपयोग रोकने पर भी फोकस किया गया है।

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