दूसरे वर्ग में नहीं मिल पाएगी कर्मचारियों को पदोन्नति

भोपाल (मंगल भारत)। प्रमोशन में आरक्षण पर लगी

रोक के चलते सरकार ने कर्मचारियों की पदोन्नति के लिए नया फार्मूला तैयार किया है। सुप्रीम कोर्ट में मप्र सरकार द्वारा सशर्त पदोन्नति के दाखिल किए जाने वाले इस प्रस्ताव में चारों वर्ग के कर्मचारियों की सीधी लाइन रखी गई है। सशर्त पदोन्नति के फार्मूले की अनुमति मिलती है, तो किसी वर्ग का कर्मचारी दूसरे वर्ग में पदोन्नति नहीं ले पाएगा। कर्मचारी -अधिकारी को उसी वर्ग में वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नत किया जाएगा। प्रदेश में पदोन्नतियों पर पिछले तीन सालों से अधिक समय रोक लगी हुई है। अप्रैल 2016 में मप्र हाईकोर्ट ने प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण पर रोक लगाने आदेश दिया था। इसके विरोध में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट में मामले की डबल बेंच सुनवाई कर रही थी। इसमें एम नागराज बनाम भारत संघ प्रकरण को आधार बनाकर सुनवाई की जा रही थी। इसी बीच एम नागराज प्रकरण को चुनौती दी गई। जिससे डबल बेंच ने इस मामले को पांच सदस्यीय खंडपीठ में भेज दिया। जिस पर सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच ने पिछले साल 26 सितंबर के निर्णय में कहा कि पदोन्नति में आरक्षण दिया जाना संवैधानिक बाध्यता नहीं है। राज्य चाहे तो आरक्षण दे सकता है। पीठ के इस फैसले के बाद एक बार फिर से मामला सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच में चला गया। जिसमें मप्र हाईकोर्ट के दिए निर्णय को लेकर सुनवाई की जा रही है। इसी के बाद स्पष्ट हो सकेगा कि मप्र में पदोन्नति में आरक्षण दिया जाएगा या नहीं। इस मामले को लेकर बीते पंद्रह अक्टूबर को पेशी थी। लेकिन यह तिथि आगे बढ़ गई। सीजेआई 17 नवंबर को सेवानिवृत्ति हो गए हैं। इसके बाद जस्टिस अरविंद बोबड़े नए सीजेआई है। उनके पदभार ग्रहण करने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट में पेशी की अगली तिथि मिलने के इंतजार किया जा रहा है। जिसमें सरकार सशर्त पदोन्नति देने का आवेदन देगी। इसमें चारों वर्ग के कर्मचारियों की सीधी लाइन रखी गई है। सशर्त पदोन्नति के फार्मूले की अनुमति मिलती है, तो किसी वर्ग का कर्मचारी दूसरे वर्ग में पदोन्नति नहीं ले पाएगा। उसी वर्ग में वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नत किया जाएगा।
हजारों कर्मचारी सेवानिवृत्त
विगत तीन वर्षों से अधिक समय से प्रदेश के सभी विभागों में पदोन्नतियां बाधित हैं। हजारों शासकीय सेवक बिना पदोन्नति का लाभ प्राप्त किए सेवानिवृत्त हो चुके हैं और वरिष्ठ खाली पदों पर शासन प्रभार से काम चला रहे हैं। यही नहीं इसकी आड़ में सरकार अपने करीबी कर्मचारियों को भी संविदा पर रखकर जमकर उपकृत कर रही है।
छग का फार्मूला अमान्य
आगामी वर्ष अप्रैल से एक बार फिर कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति का सिलसिला शुरू हो जाएगा। सरकार का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में सशर्त पदोन्नति की अर्जी दाखिल करने के बाद राहत मिलती है, तो इसी पर काम किया जाएगा, क्योंकि छग की तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार पदोन्नति नहीं दे सकती, क्योंकि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पदोन्नति पर रोक लगाई थी। सुप्रीम कोर्ट का इससे कोई लेना देना नहीं है।

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