हनीट्रैप मामले की जांच शुरु कर सकता है ईडी, मांगी जानकारी

भोपाल, मंगल भारत )। मध्यप्रदेश के राजनीतिक और

प्रशासनिक हल्कों में भूचाल लाने वाले हनीट्रैप कांड की जांच अब केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय ईडी तक पहुंच गई है। गिरोह से जुड़ी महिलाओं की विदेश यात्राओं और केंद्र सरकार की योजनाओं के लिए मुहैया कराई गई राशि का एनजीओ के माध्यम से दुरुपयोग करने से जुड़ी जानकारी ईडी ने तलब है। मध्यप्रदेश के इंदौर नगर निगम के इंजीनियर हरभजन सिंह पर तीन करोड़ रुपए की अड़ी डालने के आरोप में पुलिस ने पांच महिलाओं को गिरफ्तार किया है। पकड़ी गई महिलाओं में श्वेता स्वप्निल जैन, श्वेता विजय जैन, बरखा सोनी, आरती दयाल और मोनिका यादव शामिल हैं। शुरुआती जांच इंदौर ने की थी और अब मामले की जांच एसआईटी के पास है। एसआईटी प्रकरण की जांच कर रही है और इसी दौरान प्रकरण से जुड़ी जानकारी ईडी ने तलब की है। भारतीय मुद्रा का विदेश यात्राओं के दौरान दुरुपयोग करना और विदेशी मुद्रा को रखने जैसे मामलों की जांच ईडी करती है।
अब तक 150 लोगों के काले कारनामे आए सामने
सूत्र बताते हैं कि अब तक की जांच में जितने आडियो और वीडियो पुलिस को मिले हैं, उनमें 150 प्रमुख चेहरे हैं। सबसे ज्यादा 54 आईएएस और आईपीएस अफसर हैं। उसके बाद भाजपा और आरएसएस से जुड़े नेताओं के नाम हैं। कांग्रेस के भी दो दर्जन नेता इसमें शामिल बताए जा रहे हैं। कुछ उद्योगपति और बड़े कारोबारी भी शामिल हैं। हाईकोर्ट इंदौर ने हनीट्रैप मामले के सभी याचिकाओं को एक साथ क्लिप कर दिया है। अब सभी याचिकाओं की एक साथ सुनवाई होगी। उधर हनीट्रैप की जांच कर रही एसआईटी आगामी दो दिसंबर को न्यायालय में अपनी स्टेटस रिपोर्ट पेश करेगी। एसआईटी न्यायालय में यह बताएगी कि आी तक की जांच की स्थिति क्या है।
ईडी की सक्रियता की यह है वजह
सूत्र बताते हैं कि ईडी इस जांच में घुसने की वजह तलाश रही है। ऐसा इसलिए कि महिलाओं के जो आडियो और वीडियो पुलिस ने जप्त किए हैं, उनमें आरएसएस से जुड़े कई नेता भी हैं। भाजपा पार्टी नेताओं को किनारे कर सकती है, लेकिन आरएसएस के नेताओं की बदनामी झेलना दोनों के लिए कठिन है। हनी ट्रैप मामले में लगातार आडियो और वीडियो बाहर आने के कारण मुख्यमंत्री कमल नाथ खासे नाराज हैं। बताते हैं कि मुख्यमंत्री नहीं चाहते हैं कि यह प्रकरण ज्यादा उछाला जाए। ऐसा इसलिए कि इससे नेताओं की कम और राज्य की बदनामी ज्यादा हो रही है।

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