हनीट्रैप: संदेहियों के खिलाफ सबूत जुटा रही एसआईटी, कई और चेहरे होंगे बेनकाब

भोपाल (मंगल भारत)। बहुचर्चित हनीट्रैप मामले में

जांच कर रही एजेंसी एसआईटी की जांच पर भले ही सवाल उठ रहे हों लेकिन उसके द्वारा जो चार्ज शीट कोर्ट में पेश की गई है उससे इतना तो तय हो गया है कि अभी इन मामले में कई नेताओं, बड़े अफसरों और पत्रकारों के चेहरे बेनकाब होंगे। जांच से जुड़े अफसर अब दावा कर रहे हैं कि अभी जांच जारी है और फाइल बंद नहीं हुई है। जांच के घेरे में नेता, पत्रकार और अफसर भी आएंगे। सबूत जुटाने के लिए उनके खिलाफ सीआरपीसी की धारा 173(8) के तहत पूरक चालान पेश किया जाएगा। प्रदेश का अब तक का सबसे बहुचर्चित हनीट्रैप मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। दो दिन पहले मामले की जांच करने वाली एसआईटी ने चार आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया है। जिनके खिलाफ चालान पेश किया गया है, उनमें आरती दयाल, श्वेता विजय जैन, श्वेता स्वप्निल जैन और अभिषेक सिंह शामिल हैं। यह प्रकरण सीआईडी ने दर्ज किया था और मामले के फरियादी मोनिका यादव के पिता हीरालाल यादव हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि उनकी बेटी पढऩे के लिए भोपाल गई थी और गिरोह से जुड़ी महिलाओं ने फंसाकर उसे देह व्यापार में धकेल दिया। एसआईटी पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं कि गिरोह की महिलाओं पर करोड़ों रुपए लुटाने वाले आईएएस अफसरों का नाम चालान में छिपाया गया है। बयान देने वाली महिलाओं के हवाले से यह कहलवाया गया है कि वे रकम देने वाले आईएएस अफसर को नहीं पहचानती हैं। जो अफसर सालों तक महिलाओं के साथ रंगीन मिजाजी करते रहे। आए दिन उनकी आपस में मुलाकातें होती थीं। जो ब्लैक मेल हुए, तमाम तरह के सौदे किए और करोड़ों रुपए लिए, आखिर उनके नाम महिलाएं क्यों नहीं जानतीं? जांच एजेंसी के लिए ये ऐसे सवाल हैं, जिनके जवाब देर से सही, लेकिन खोजने होंगे। महिलाएं पहले नेताओं और अफसरों को अपने हुस्न के जाल में फंसाती थीं। जब नेता-अफसर महिलाओं के चंगुल में फंस जाते थे, तब महिलाएं उनके आपत्तिजनक वीडियो बना लेती थीं। इसके बाद वे पत्रकारों के जरिए नेताओं और अफसरों को ब्लैकमेल करती थीं। ब्लैकमेल होने वाले अफसरों की लंबी सूची है। जो अधिकारी जिस विभाग में रहे हैं, वहां से करोड़ों रुपए महिलाओं के एनजीओ को मिले हैं। गिरोह से जुड़ी महिलाएं और पत्रकार मिलने वाली राशि का आपस में बंटवारा कर लेते थे। एसआईटी से जुड़े अफसरों का कहना है कि जो चालान पेश किया गया है, वह अंतिम नहीं है। सीआरपीसी की धारा-173(8) में यह प्रावधान है कि आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान पेश किया जा सकता है। चूंकि अभी विवेचना जारी है, इसलिए जाहिर है कि और भी नेताओं-अफसरों और पत्रकारों के नाम सामने आएंगे। उन्हें बयान के लिए भी बुलाया जाएगा। बयान और पड़ताल में जो तथ्य सामने आएंगे, उनके साक्ष्य के आधार पर आगे पूरक चालान पेश किया जाएगा।
इन दो अफसरों को महिलाओं ने किया था ब्लैकमेल
प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युन सिंह तोमर के ओएसडी हरीश खरे और खनिज मंत्री प्रदीप जायसवाल के ओएसडी अरुण निगम के वीडियो आरती के घर में बनाए गए थे। दोनों अफसर रात में गए थे। पहले दोनों अफसरों ने महिलाओं के साथ शराब पी और फिर उनके साथ हम बिस्तर हुए। महिलाओं ने अपने बयान में कहा कि हरीश और अरुण से वे सरकारी काम कराना चाहती थीं, इसलिए दोनों को वीडियो के जरिए ब्लैकमेल किया था।
गंगेले ने एक रात के महिलाओं को दिए थे डेढ़ लाख रुपए
कारोबारी राजेश गंगेले ने डेढ़ लाख रुपए एक रात के दिए थे। गंगेले का वीडियो एक होटल में बनाया गया था। होटल में दो महिलाएं थीं। राजेश ने पहले मोनिका को अपने कमरे में बुलाया था। उसके मना करने पर राजेश ने आरती को बुला लिया था। बाद में राजेश ने आरती दयाल को 50 हजार रुपए और मोनिका यादव को एक लाख रुपए दिए थे। मोनिका को मोबाइल फोन और बैग खरीदने के लिए राजेश ने अलग से पैसे दिए थे।

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