भुखमरी में देश के शीर्ष पांच प्रदेशों में मप्र भी शामिल

भोपाल (मंगल भारत)। प्रदेश की कमलनाथ सरकार

भुखमरी के मामले में फिसड्डी साबित हुई है। यह कहना है नीति आयोग की रिपोर्ट का। आयोग द्वारा हाल ही में जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि मप्र में बीते सालों की तुलना में गत वर्ष यानि 2019 में भुखमरी तेजी से बढ़ी है वहीं, रोजगार के मामले में भी प्रदेश पिछड़ा है। नीति आयोग द्वारा जारी किए गए एसडीजी इंडिया इंडेक्स-2019 में भूख के मानको में मध्यप्रदेश नीचे से दूसरा स्थान दिया गया है। आयोगे सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरण के क्षेत्र में राज्यों की प्रगति के आधार पर उनके प्रदर्शन का आंकलन कर यह रैंकिंग देता है। इसमें कहा गया है कि आदिवासी बाहुल्य इलाकों के विकास में भी मध्यप्रदेश पिछड़ गया है। इस रिपोर्ट में मध्यप्रदेश में सबसे बुरे हालात इस रिपोर्ट में बताए गए हैं।
बीते साल में बिगड़े हालत
एसडीजी की रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश में 2019 में भूख संबंधी हालात बिगड़ गए हैं। मध्यप्रदेश में भूख का मानक गिरकर 41 से 24 पर आ गया है। वहीं, कांग्रेस शासित राज्यों में छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी भूख संबंधी हालत बिगड़ गए हैं।
यह दिए तथ्य
एसडीजी लक्ष्य के तहत भूख के लिए 7 इंडिकेटर बना रखे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एमपी की 54.6 फीसदी महिलाओं और 5 साल तक के 53.5 फीसदी बच्चों को एनिमिया है। खाद्यान्न उत्पादन 2350.33 किलो प्रति हेक्टेयर हो गया है।
मध्यप्रदेश इन क्षेत्रों की रैंकिंग में भी पिछड़ा
गिरावट के क्षेत्र साल 2018 साल 2019
बेटियां घटी ( प्रति हजार ) 922 ( प्रति हजार ) 916 प्रति हजार
रोजगार के क्षेत्र में भी गिरावट 44 वीं रैंक 40 वीं रैक
इन क्षेत्रों में सुधरी एमपी की रैंकिंग
रैंकिग सुधरने के क्षेत्र साल 2018 साल 2019
एमपी में शांति बढ़ी 59वीं रैंक 63वीं रैंक
स्वास्थ्य सेवाओं में भी सुधार 38वीं रैंक 50वीं रैंक

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