मप्र में तेजी से कम हो रही किसानों की संख्या, बढ़ रहे खेतीहर मजदूर

भोपाल (मंगल भारत)। मप्र में तेजी से किसानों की

संख्या में कमी आ रही है। बीते एक दशक में प्रदेश के किसानों की संख्या में करीब बाहर लाख की कमी दर्ज की गई है। आंकड़ों के हिसाब से साल औसतन करीब एक लाख बीस हजार किसान कम हो रहे हैं, जबकि लगभग इतनी ही संख्या में खेतीहर मजदूरों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इसकी बड़ी वजह अलग परिवार की सोच को माना जा रहा है। दरअसल किसान की जमीन का परिवार के सदस्यों में बंटने से उसकी जोत छोटी होती जा रही है। जिसके चलते परिवार पालने के लिए उन्हें खेतिहर मजदूर बनना पड़ रहा है। सांख्यकीय विभाग के आकड़ों के मुताबिक 2001 में प्रदेश में एक करोड़ दस लाख किसान थे, जो 2011 में घटकर 98 लाख हो गए हैं। आज की स्थिति में किसान 70 लाख और खेतिहर मजदूर 74 लाख से बढक़र 1 करोड़ 20 लाख हो गए हैं। पहले प्रदेश में प्रति किसान भूमि का औसत 2 हेक्टेयर था, जो अब घटकर 1.29 हेक्टेयर रह गया है।
प्रदेश में इतनी कृषि योग्य भूमि
मध्यप्रदेश कृषि प्रधान देश है। और यहां की सारी अर्थव्यवस्था कृषि से ही चलती है। प्रदेश की 70 फीसदी से ज्यादा आवादी खेती पर निर्भर है। प्रदेश का कुल भैगोलिक क्षेत्र 3 करोड़ आठ लाख 25000 हेक्टेयर है। इसमें से 17252 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। यानि प्रदेश कुल भौगोलिक क्षेत्र में 56 फीसदी जमीन पर खेती होती है। खेती का रकबा प्राकृतिक परिस्थितियों के हिसाब से थोड़ा बहुत कम ज्यादा होता रहता है। साल 2012-13 में प्रदेश में खेती की जमीन 1.7264 करोड़ हेक्टेयर थी। जो 2013-14 में 1.7267 करोड़ हेक्टेयर रह गई। वहीं 2015 में ये जमीन घटकर 17252 हक्टेयर हो गई। वर्तमान में प्रदेश ४० लाख हेक्टेयर भूमि पर सिचाई होती है। सरकार ने ४ साल में ६५ लाख हेक्टेयर में सिंचाई का लक्ष्य तय किया है।

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