महाविद्यालयों में प्राचार्य कर रहे मनमाने तरीके से खरीदी

भोपाल (मंगल भारत)। सरकारी कॉलेजों में नियमों को

दरकिनार कर प्राचार्यों द्वारा मनमाने तरीके से खरीद फरोख्त सहित अन्य कामों को टेंडर के माध्यम से कराया जा रहा है। इसके लिए प्राचार्य क्रय समिति बनाकर अपनी मनपसंद फर्म को काम दे देते हैं। बीते पांच सालों में करीब 118 सरकारी कॉलेजों के खिलाफ इस तरह की शिकायतें शासन को मिली हैं। यही वजह है कि सरकार द्वारा जैम पोर्टल से ऑनलाइन खरीदी की व्यवस्था की गई है। इसमें प्राचार्य को आदेश देने के साथ ही राशि भुगतान का अधिकार भी दिया गया है।
इसलिए जारी होती है राशि
रूसा द्वारा विवि और कॉलेजों में विकास के लिए राशि दी जाती है। इसका उपयोग रिसर्च, सर्वे, आंकड़े जुटाने, संस्थाओं के पुनर्गठन, उसमें सुधार करने, व्यवस्थाओं की मॉनीटरिंग, उसका मूल्यांकन करने में होता है। यह रकम शैक्षणिक संस्थाओं को किस्तों में मिलती हैं। साथ ही रूसा वर्तमान में संचालित विवि और कॉलजों में संसाधन जुटाने में मदद करने के अलावा नए विवि स्थापित करने में भी सहायता करता है। इस राशि से विश्वविद्यालय और कॉलेजों को डिपार्टमेंटल, मैनेजमेंट, मॉनिटरिंग लेबल के अधिकारियों की भर्ती की जा सकती है

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