पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू न हो पाने का दर्द डीजीपी की बधाई में छलका

भोपाल (मंगल भारत)। अन्य राज्यों के महानगरों की

तरह मध्यप्रदेश में भी पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने का मामला बीते करीब तीन दशक से अटका हुआ है। इसकी घोषणा 1981 में की गई थी, तभी से यह मामला मंत्रालय-पीएचक्यू की फाइलों में अटका हुआ है। यह प्रणाली लागू न हो पाने का आईपीएस अधिकारियों का यह दर्द सोमवार को उत्तरप्रदेश के लखनऊ व नोएडा में जब यह सिस्टम लागू होने के बाद डीजीपी विजय कुमार सिंह के बधाई ट्वीट के जरिए छलका। दरअसल प्रदेश में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों की अहम की लड़ाई में पुलिस आयुक्त प्रणाली पर पांच बार फैसला होने के बाद भी अमल नहीं हो पाया है। अब यूपी में इस व्यवस्था के लागू होने से एक बार फिर मध्यप्रदेश पुलिस को उम्मीद जागी है कि सरकार कोई न कोई फैसला जरूर लेगी। दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को लखनऊ और नोएडा (गौतम बुद्घ नगर) में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू करने का फैसला किया तो रात को मध्यप्रदेश के पुलिस महानिदेशक विजय कुमार सिंह ने ट्वीट कर बधाई दी। इसमें मप्र में यह सिस्टम लागू नहीं हो पाने का दर्द दिखाई दिया। सिंह ने अप्रत्यक्ष रूप से कहा कि जिन राज्यों में यह सिस्टम लागू है वे प्रगतिवादी हैं। उन्होंने इस व्यवस्था की खूबियां बताईं कि इससे पुलिस की सेवाएं तथा कानून व्यवस्था दोनों सुदृढ़ होंगे। साथ ही राज्य और जनता के बीच संबंध में अच्छे होंगे।
वर्दीधारी होने से नहीं दे पाते सरकारी फैसलों पर बयान
डीजीपी की तरह मध्यप्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारियों और अन्य पुलिस अफसरों में पुलिस आयुक्त प्रणाली को प्रदेश में नहीं अपनाए जाने का दर्द छिपा है। सेवा में रहते हुए वे इसे खुलकर बयान नहीं करते हैं। कुछ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि वर्दीधारी होने के कारण सरकार के फैसलों व नीतियों को लेकर खुलकर कह नहीं सकते। वे कहते हैं कि इसके विपरीत आईएएस, एसएएस व अन्य राजस्व सेवा के अधिकारियों द्वारा खुलकर विरोध किया जाता है।
कब-कब बढाए प्रदेश सरकार ने कदम
– 1981 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्व. अर्जुन सिंह ने पचमढ़ी कैबिनेट की बैठक में पांच लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में इस व्यवस्था को लागू करने का फैसला लिया था।
– 1998-2003 में कांग्रेस सरकार में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने विधानसभा में पुलिस आयुक्त प्रणाली की घोषणा की थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) को प्रारूप बनाकर भेजा गया था, जो वहीं अटके रहने के कई महीनों बाद नामंजूर कर लौटा दिया गया था।
– फरवरी 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू करने का ऐलान किया, मगर मामला आगे नहीं बढ़ सका।
– शिवराज सिंह चौहान ने अपने तीसरे कार्यकाल में भौंरी स्थित पुलिस अकादमी में पुलिस अधिकारियों की बैठक में 15 दिन में पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू करने का ऐलान किया। कुछ दिन बाद आला अधिकारियों के साथ बैठक में इसे लागू करने पर विचार चल रहा था कि तत्कालीन मुख्य सचिव ने बिना चर्चा के इसे लागू किए जाने पर तीखे लहजे में आपत्ति की और मामला आगे ही नहीं बढ़ा।
– 2019 में स्वतंत्रता दिवस के दिन पुलिस आयुक्त प्रणाली को लागू करने की मुख्यमंत्री कमलनाथ के ऐलान की चर्चा में ही आईएएस अधिकारियों ने उसकी ‘भ्रूण हत्या’ कर दी। आईएएस एसोसिएशन ने सीएम से इसको लेकर मुलाकात भी की थी।

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