सवालों के घेरे में एमपी पीएससी, भाजपा के बाद कांग्रेस की भी जांच में रुचि नहीं

भोपाल (मंगल भारत)। साल 2013 में मध्यप्रदेश का

बहुचर्चित व्यापमं घोटला उजागर होने के बाद एमपी पीएससी का फर्जीवड़ा सामने आया था। इस फर्जीवाड़े में पेपर लीक किए जाने तक की बात सामने आई थी और कुछ आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया था। इसके बाद कई परीक्षाओं में फर्जीवाड़े के आरोप लगे हैं, लेकिन इन फर्जीवाड़ों को लेकर पूर्व की भाजपा सरकर जांच तक नहीं करा पाई थी। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो चुका है, लेकिन वर्तमान कांग्रेस सरकार भी इन फर्जीवाड़ों की जांच नहीं करा पा रही है। इसमें व्यापमं के बाद एमपी पीएससी की विश्वसनीयता भी अब सवालों के घेरे में है। मप्र लोक सेवा आयोग की भर्ती परीक्षा मेंं गड़बड़ी के कई बार आरोप लगे, जिसे कुछ खास लोगों को लाभ पहुंचने के मामले भी थे। एक भर्ती परीक्षा से ज्यादा से ज्यादा जैन अभ्यर्थियों के चयन होने पर भी एमपी पीएससी पर घोटाले के आरोप लगे। उस समय मप्र में भाजपा की सरकार थी। तब कांग्रेस ने एमी पीएससी में फर्जीवाड़े के आरोप लगाए और इन मामलों की जांच कराए जाने की मांग की है। इसको लेकर प्रदर्शन भी हुए। अब जब कांग्रेस सत्ता में है। इसी का नतीजा है कि एमपी पीएससी में अब भी गड़बडिय़ां चल रही हैं, लेकिन सरकार इन मामलों की जांच तक नहीं करा रह पा रही है।
मिलीभगत से लीक हो जाता था पेपर
एमपी पीएससी की वर्ष 2012 क आयुर्वेद परीक्षा में एमपी पीएससी का सबसे बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ था। वर्ष 2014 में एसटीएस ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था। एमटीएफ की जांच में सामने आया था कि अधिकारी दलालों से मिलकर पेपर लीक करा देते थे। बड़ी रकम लेकर चुनिंदा लोगों तक पेपर पहुंचाया जाता था।
फीस बढ़ाए जाने के विवादों में एमपी पीएससी
हाल ही एमपी पीएससी सरकार की मंजूरी के बगैर फीस बढ़ाए जाने के मामले में विवादों में घिर गई थी। एमपी पीएससी ने फीस मेंकई गुना बढ़ोत्तरी कर दी थी। सरकार के हस्तक्षेप के बाद बढ़ी हुई फीस को वापस लिया गया था। इस मामले में सरकार की भी किरकिरी हुई थी।
सहायक कृषि संचालक की परीक्षा में भी लगे थे गड़बड़ी के आरोप
एमपी पीएससी द्वारा 2015 में आयोजित सहायक संचालक कृषि परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लगे थे। पीएससी ने आपत्तियों का निराकरण किए बगैर 130 पदों के लिए साक्षात्कार को तारीख घोषित कर दी है। इस परीक्षा को लेकर उम्मीदवारों ने फर्जीवाड़े को दबाने के लिए आपत्तियों के निराकरण के बिना साक्षात्कार कराए जाने के आराप लगाए थे।
एक समुदाय के अभ्यर्थियों के चयन पर भी उठे थे सवाल
एमपी पीएससी की वर्ष 2017 में 507 पदों के लिए राज्य सेवा मुख्य परीक्षा हुई थी। परीक्षा मेे 1528 परीक्षार्थी पास हुए थे। परीक्षा में आगर-मालवा केंद्र के 7 परीक्षा केंद्रों से सेन समाज के 80 फीसदी उम्मीदवारों का चयन हो गया था। आगर केंद्र से प्री में 43 सिलेक्शन हुए थे मेन्स में 21 का चयन हुआ था। इन 21 में से 19 उम्मीदवार जैन समुदाय के थे। पास होने वाले कई छात्र सागर और दमोह जिले से थे।

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