जेल में खुद को नुकसान न पहुंचा लें निर्भया के दोषी, हर हरकत पर नजर

नई दिल्ली। निर्भया के दोषियों की फांसी का दिन अब

नजदीक है। दोषियों का बर्ताव इन दिनों बिल्कुल बदला हुआ है। ऐसे हालत में वे खुद को नुकसान न पहुंचा लें, जेल प्रशासन के लिए यह काम सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। इसके लिए जेल प्रशासन पूरी सावधानी बरत रहा है। कैदियों को टॉइलट तक में अकेले नहीं छोड़ा जा रहा है। दिन-रात उनपर निगरानी रखी जा रही है। बार-बार उनके सेल्स को बदला जा रहा है।
परिवारवालों को लिखा- आखिरी बार मिल लें
निर्भया के दोषियों को 1 फरवरी 2020 को फांसी होनी है। अबतक कैदियों ने जेल प्रशासन को अपनी अंतिम इच्छा नहीं बताई है। इस बीच जेल प्रशासन ने दोषियों के घरवालों को पत्र भेजा है। लिखा गया है कि अगर में उनसे आखिरी बार मिलना चाहते हैं तो जेल से संपर्क कर लें।
दो दोषियों का बर्ताव बदला
फांसी का दिन तय होने के बाद से दोषियों का बर्ताव बदल गया है। मुकेश सिंह ने खुद को जेल के सेल में बंद कर लिया है। वहीं विनय शर्मा आक्रमक हो गया है। विनय इन दिनों बस एक रट लगाए हुए है कि उसे जेल नंबर 4 में बंद दोस्त से मिलने दिया जाए, जिससे कैद में रहने के दौरान उसकी दोस्ती हो गई है। हालांकि, पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर का बर्ताव लगभग पहले जैसा ही है। सिंह की खाने की आदतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। हालांकि, विनय खाना खाने से मना कर देता है और ज्यादा बोलने पर हिंसा पर उतारू हो जाता है। शुक्रवार को मुकेश और विनय के घरवाले उनसे मिलने आए थे। करीब आधा घंटा उनकी बातचीत हुई।
फांसी की चल रही तैयारियां
जेल अधिकारियों ने बताया है कि चारों को 1 फरवरी को फांसी देने की तैयारियां चल रही हैं। चारों पर एक डॉक्टर नजर बनाए हुए है। उनकी सेहत का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। जेल प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह देखना है कि कहीं चारों में से कोई खुद को ही नुकसान न पहुंचा ले। बता दें कि इस मामले का अन्य एक दोषी राम सिंह पहले ही सूइसाइड कर चुका है। फिर दोबारा ऐसा कुछ न हो इसके लिए चारों के सेल लगातार बदले जा रहे हैं। किसी को एक कमरे में दो दिन से ज्यादा नहीं रखा जा रहा। दरअसल, प्रशासन को डर है कि एक ही जगह रखने पर कैदी आत्यहत्या का कोई प्लान बना सकता है।
चारों दोषियों को टॉइलट में भी अकेले नहीं छोड़ा जा रहा। उनके साथ एक सुरक्षा गार्ड जाता है। नए कमरे में शिफ्ट करने से पहले भी कमरे की छानबीन होती है। इसे एक टीम द्वारा किया जा रहा है जिसमें जेल सुपरिंटेंडेंट भी शामिल होता है। दोषियों के सेल में रात को भी अंधेरा नहीं किया जाता, ताकि गार्ड उनपर निगरानी रख सके।
मिली जानकारी के मुताबिक, जेल नंबर तीन के उस वार्ड के बाहर जहां दोषियों को रखा गया है वहां 40 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं। जिन सेल्स में दोषियों को रखा गया है वहां तमिलनाडु स्पेशल पुलिस के जवान तैनात हैं। टीम को सख्त हिदायत है कि उन्हें कैदियों से किसी भी सूरत में बातचीत नहीं करनी है।

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