एसआईटी हनीट्रैप के ऑडियो-वीडियो आईटी को देने के लिए तैयार नहीं

भोपाल (मंगल भारत)। प्रदेश के हाई प्रोफाइल हनीट्रैप

मामले की जांच करने वाली पुलिस की एसआईटी की भूमिका लगातार संदिग्ध होती जा रही है। इसकी वजह है उसके द्वारा लगातार इस मामले में आयकर विभाग को सहयोग नहीं करना। उधर आयकर विभाग भी लगातार अपनी जांच का दायरा बढ़ाता जा रहा है। इस मामले में अब तक तीन आरोपी युवतियों से पूछताछ करने के बाद अब नौकरशाह, रसूखदारों को हुस्न के जाल में फांस कर ब्लैकमेल करने वाली महिलाओं के ऑडियो और वीडियो आयकर विभाग ने पुलिस की एसआईटी से मांगे हैं। आईटी ने इन्हें दस दिनों के अंदर देने को कहा है। बताया जा रहा है एसआईटी यह ऑडियो व वीडियो साझा करने में आनाकानी कर रही है। हनीट्रैप में करोड़ों के लेन-देन का खुलासा होने के बाद आयकर विभाग ने इस मामले में दिलचस्पी दिखाना शुरू किया था। मामले की पड़ताल कर रही एसआईटी को पत्र लिख कर जानकारी शेयर करने के लिए कहा था। एसआईटी ने काफी समय तक ऐसा नहीं किया। इस पर आईटी ने रिमांइडर भेजा। यह भी बेअसर रहा। ऐसे में आईटी को कोर्ट की शरण लेनी पड़ी। कोर्ट ने आयकर विभाग के पक्ष में आदेश दिया, तब कहीं जाकर एसआईटी अलग-अलग दिन श्वेता विजय जैन, आरती दयाल और श्वेता स्वप्निल जैन को इंदौर जेल से आयकर मुख्यालय लेकर आई। यहां इंवेस्टिगेशन विंग के अधिकारियों ने कई घंटों तक उनसे करोड़ों के ट्रांजेक्शन के बारे में पूछताछ की।
बयानों की पड़ताल के बाद जारी होंगे नोटिस
बताया जा रहा है आयकर विभाग के अफसर तीनों महिलाओं के बयानों की पड़ताल कर रहा है। इस दौरान उन्होंने जो जानकारी बताई, उसे वेरिफाई किया जा रहा है। जिन लोगों ने महिलाओं को पैसा दिया, उन तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। पैसों के लेन-देन को लेकर महिलाओं के चार्टर्ड अकाउंटेंट को तलब किया जा सकता है। इसके साथ ही उन लोगों को बुलाने की संभावना जताई जा रही है जिन्होंने ब्लैकमेल होकर पैसा दिया। महिलाओं के अलावा कुछ और लोगों में यह पैसा बंटा था। इनको भी आयकर विभाग पूछताछ के लिए बुला सकता है।
ऑडियो और वीडियो से मिल सकता है सुराग
एसआईटी ने हनीट्रैप की आरोपित महिलाओं से बड़ी संख्या में हार्ड डिस्क, मेमोरी कार्ड, कंप्यूटर व मोबाइल से ऑडियो व वीडियो क्लिपिंग जब्त की हैं। इनमें अंतरंग के साथ ही लेन-देन की बातचीत होने की बात कही जा रही है। यही वजह है कि आयकर विभाग ऑडियो-वीडियो एसआईटी से मांग रहा है।
यह है संदिग्ध भूमिका की वजह
सरकार द्वारा गठित की गई एसआईटी के कुछ दिनों के अंदर ही एक के बाद एक प्रभारी को बदले जाने से उस पर संदेह जाहिर किया जाने लगा है। यही नहीं इस मामले में पेश किए गए चालान में भी रसूखदारों के नामों का उल्लेख भी नहीं किया गया है। खास बता यह है कि चालान में उन लोगों के भी नाम शामिल नहीं हैं, जिनके अश£ील ऑडियो व वीडियो वायरल हो चुके हैं। खस बात यह है कि जिनके नामों का उल्लेख उसमें किया गया है उनसे भी पूछताछ नहीं की गई है।

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