दो विधायकों के निधन के बाद फिर चर्चा में आया विधानसभा का वास्तुदोष

भोपाल (मंगल भारत)। चालीस दिन के अंतराल में मप्र

के दो विधायकों का असमय निधन हो गया है। गत 21 दिसंबर को मुरैना जिले के जौरा से कांग्रेस विधायक बनवारी लाल शर्मा का निधन हुआ था और गुरुवार को आगर से भाजपा विधायक मनोहर ऊंटवाल का निधन हो गया। बीते 21 साल में 33 विधायकों का निधन हो चुका है। विधानसभा के पिछले चार कार्यकालों में एक साल भी ऐसा नहीं रहा, जब विधायकों की संख्या पूरी रही हो। दो विधायकों के निधन के बाद विधानसभा में सदस्यों की संया 228 बची है। चालीस दिन में दो विधायकों की मौत के बाद एक बार फिर विधानसभा में वास्तुदोष का मुद्दा गर्मा गया है। वर्ष 1956 से 1996 तक विधानसभा का संचालन मिंटो हॉल में होता रहा। 1996 में विधानसभा नए भवन में शिफ्ट हुई थी। इसके बाद से ही कुछ न कुछ अनहोनी हो रही है। इस भवन में विधानसभा आने के तत्काल बाद तत्कालीन वन एवं परिवहन मंत्री लिखीराम कांवरे की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी। विधानसभा अध्यक्ष पद पर रहते भाजपा नेता ईश्वरदास रोहाणी की मृत्यु हुई। नेता प्रतिपक्ष रहते हुए कांग्रेस नेता जमुना देवी और सत्यदेव कटारे की मौत हुई। दिग्विजय और शिवराज सरकार के कार्यकाल में जब विधायकों की असमय मौत हुई थी, तब भी विधानसभा में वास्तुदोष का मुद्दा सदन और सदन के बाहर काफी गर्माया था। तत्कालीन विस अध्यक्ष श्रीनिवास तिवारी ने वास्तु विशेषज्ञों की सलाह पर विधानसभा में अनुष्ठान भी कराया था और विधानसभा की बैठक व्यवस्था में कुछ परिवर्तन भी कराए थे। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष सीताशरण शर्मा ने भी पूजन आदि कराया था।
इन विधायकों का हो चुका है निधन
30 जनवरी 2020- आगर से भाजपा विधायक मनोहर ऊंटवाल का निधन।
21 दिसंबर 2019- जौरा से कांग्रेस विधायक बनवारी लाल शर्मा का निधन।
विशेष सत्र में हुई थी चर्चा
जनवरी में हुए विधानसभा के दो दिनी विशेष सत्र में विधायक बनवारी लाल शर्मा को श्रद्धांजलि के दौरान नेता प्रतिपक्ष ने वास्तुदोष की बात कही थी। स्व. शर्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नेता भार्गव ने इतनी अधिक संख्या में सदस्यों के निधन पर चिंता जताते हुए कहा था कि इस बारे में हम सभी को सोचना होगा कि यह क्यों हो रहा है।
इनका कहना है
विधायक मनोहर ऊंटवाल पूरी तरह से स्वस्थ थे, अचानक ब्रेन हेमरेज हो गया। उनका निधन चिंता का विषय तो है। वास्तुदोष सुपरस्टीशन बिलीव (अंधविश्वास) है। मेरा मानना है कभी यह सही होते हैं और कभी गलत। विधानसभा अध्यक्ष को लगता है तो वास्तुशास्त्री को दिखा लेना चाहिए।
– सीतासरन शर्मा, विधायक एवं पूर्व विधानसभा अध्यक्ष
मैं पहले भी विधानसभा में अनुष्ठान आदि की बात कह चुका हूं। मनोहर ऊंटवाल की ज्यादा उम्र नहीं थी। वे सादा जीवन जीते थे। उनके असमय निधन से सवाल उठना लाजिमी है।
– गोपाल भार्गव, नेता प्रतिपक्ष मप्र विधानसभा

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