पदोन्नति में आरक्षण मिला नहीं, खर्च हो गए 6 करोड़

भोपाल (मंगल भारत)। मध्यप्रदेश के कर्मचारियों को

पदोन्नति में आरक्षण देने की योजना सरकार पर भारी पड़ती नजर आ रही है। हालत यह है कि हजारों कर्मचारी बिना पदोन्नति पाए रिटायर हो गए और सरकार को चार साल में 6 करोड़ रुपए से ज्यादा की चपत लग गई। इस सप्ताह फिर सुप्रीम कोर्ट में मामले को लेकर सुनवाई के आसार है। इस पेशी में प्रदेश सरकार द्वारा कर्मचारियों को सशर्त पदोन्नति देने की अर्जी दाखिल करने की तैयारी की है। दरअसल अप्रैल 2016 में मप्र हाईकोर्ट ने प्रदेश में पदोन्नति में आरक्षण पर रोक लगाने आदेश दिया था। इसके विरोध में राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट चली गई। सुप्रीम कोर्ट में मामले की डबल बेंच सुनवाई कर रही थी। इसमें एम. नागराज बनाम भारत संघ प्रकरण को आधार बनाकर सुनवाई की जा रही थी। इसी बीच एम. नागराज प्रकरण को चुनौती दी गई।
सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच में केस
पीठ के इस फैसले के बाद एक बार फिर से मामला सुप्रीम कोर्ट की डबल बेंच में चला गया। जिसमें मप्र हाईकोर्ट के दिए निर्णय को लेकर सुनवाई की जा रही है। इसी के बाद स्पष्ट हो सकेगा कि मप्र में पदोन्नति में आरक्षण दिया जाएगा या नहीं। इस मामले को लेकर बीते गत 28 जनवरी को पेशी होने वाली थी, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी। सुप्रीम कोर्ट में पेशी की अगली तिथि इस हफ्ते मिलने के आसार है। जिसमें सरकार 2003 के नियम अनुसार सशर्त पदोन्नति देने का आवेदन देने की तैयारी कर ली है। विगत तीन वर्षों से अधिक समय से प्रदेश के सभी विभागों में पदोन्नतियां बाधित हैं। हजारों शासकीय सेवक बिना पदोन्नति का लाभ प्राप्त किए सेवानिवृत्त हो चुके हैं और वरिष्ठ खाली पदों पर शासन प्रभार से कार्य करा रहा है।
इस साल रिटायर होंगे 12 हजार कर्मचारी
डेढ़ साल की राहत के बाद प्रदेश के अधिकारियों-कर्मचारियों का अप्रैल 2020 से सेवानिवृत्ति का सिलसिला एक फिर शुरू हो जाएगा। वर्ष 2020 में खत्म होते-होते 12 हजार से ज्यादा कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे। जिससे मंत्रालय सहित विभाग प्रमुख कार्यालयों में कामकाज प्रभावित होने की आशंका जताई जाने लगी है। सेवानिवृत्त होने वालों में शीर्षस्थ कर्मचारियों की संख्या ज्यादा बताई जा रही है। जिनकी जिम्मेदारी अधीनस्थ कर्मचारियों को नहीं सौंपी जा सकती है। 12 हजार से अधिक कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति पर 3600 करोड़ से ज्यादा का भार आएगा। राज्य सरकार ने इस साल बनने वाली स्थिति से निपटने की तैयारी अब तक शुरू नहीं की है। न तो प्रदेश में पदोन्नति शुरू हो पाई है और न ही नई भर्तियां हो सकी हैं। ऐसे में कामकाज प्रभावित होना स्वभाविक है। प्रदेश में 4.62 लाख कर्मचारी और पिछले साल नियमित किए गए 1.78 लाख अध्यापक शामिल हैं।

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