भाजपा में पनप रही विद्रोह की ज्वाला

भोपाल (मंगलभारत)। मंत्री पद के कई दावेदार विस्तार में जगह न मिल पाने से सरकार व संगठन दोनों से ही नाराज हैं। यह नाराजगी उनके समर्थकों के माध्यम से खुलकर सामने आ चुकी है। यही वजह है कि पार्टी के रणनीतिकारों व संगठन को उपचुनाव की तैयारियों को छोडक़र डैमेज कंट्रोल में पूरी ताकत लगानी पड़ रही है। खास बात यह है कि जो विधायक नाराज चल रहे हैं उनमें से कई का उपचुनाव वाले इलाकों में जातिगत व्यापक प्रभाव भी है। पार्टी सूत्रों की माने तो अब संगठन नाराज विधायकों को मनाने के लिए उन्हें राजधानी बुलाकर न केवल समझाइश देने जा रहा है, बल्कि कुछ वरिष्ठ विधायकों को प्रदेश पदाधिकारी और तथा निगम मंडलों का दायित्व देकर उन्हें शांत कराने की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा उन्हें मनाने के लिए कुछ विधायकों को जिला सहकारी बैंकों में प्रशासक बनाकर उपकृत करने के कदम भी उठा सकता है। नाराजगी की हालत यह है कि प्रदेश में कई जगहों पर लगतार धरना प्रदर्शन तक हो रहे हैं। दरअसल कई विधायक तो ऐसे हैं, जिनकी न केवल दावेदारी बेहद मजबूत थी, बल्कि यह तय माना जा रहा था कि उन्हें तो हर हाल में शपथ दिलाई जाएगी। शपथ के दौरान जब उनके नाम गायब मिले तो उनके समर्थक भडक़ गए। ऐसे विधायकों में रमेश मंदोला, यशपाल सिसौदिया , रामपाल सिंह, शैलेन्द्र जैन, गिरीश गौतम, प्रदीप लारिया, गोपीलाल जाटव के अलावा गायत्रीराजे पवार के नाम भी शामिल हैं। इनमें से कई विधायकों की पकड़ तो अपने क्षेत्र के अलावा अंचल में भी मजबूत पकड़ मानी जाती है। यही नहीं मंत्रिमंडल में प्रदेश में सबसे बड़ी 71 हजार मतों से जीत दर्ज करने विधायक रमेश मेंंदोला की भी अनदेखी की गई है। उनकी जगह ऊषा ठाकुर को शपथ दिलाई गई है। ऊषा को ताई सुमित्रा महाजन का समर्थक माना जाता है। इसके चलते मेंदोला समर्थकों में नाराजगी है। मेंदोला के समर्थन में बीते रोज एक युवक आत्मदाह का प्रयास भी कर चुका है। यही नहीं जावरा विधायक राजेन्द्र पांडेय के समर्थकों ने तो नाराजगी के चलते सोशल मीडिया पर इस्तीफा देना शुरु कर दिया है। वहीं मंदसौर विधायक यशपाल सिसौदिया के समर्थक भी सडक़ पर उतर चुके हैं। इसी तरह से देवास में गायत्रीराजे के समर्थक भी लगतार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस तरह से हो रहा विरोध
मंत्रिमंडल में उपेक्षित हुए सागर विधायक शैलेन्द्र जैन के समर्थकों ने तो जल सत्याग्रह का सहारा लिया है। उन्होंने सागर क चकराघाट तालाब पर अर्धनग्न होकर प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया है। यही नहीं उनके द्वारा जैन के समर्थन में इस तरह का लगतार प्रर्दशन जारी रखने की भी घोषणा की है। वहीं सागर के मीडिया प्रभारी श्रीकांत जैन का कहना है कि शैलेन्द्र जैन को मंत्री न बनाए जाने से जैन समाज में आक्रोश है। इसी तरह से सागर में विधायक प्रदीप लारिया के समर्थकों ने भी प्रदर्शन किया है। उधर राजेन्द्र शुक्ला के समर्थन में व्यापारियों ने काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया। इसी तरह से महाकौशल में उपेक्षा से नाराज सराफा एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री के खिलाफ प्रदर्शन किया।

यह इलाके हो सकते हैं प्रभावित
इंदौर जिले के सांवेर विधानसभा में उपचुनाव के दौरान मेंदोला की नाराजगी का असर दिख सकता है। उन्हें कैलाश विजयवर्गीय समर्थक माना जाता है। इसी तरह से सागर जिले के सुरखी में भी उपचुनाव होना है। सागर जिले से शैलेन्द्र जैन और प्रदीप लारिया दोनों दावेदार थे। इन दोनों विधायकों की समाज के सुरखी में अच्छे खासे मतदाता हैं। वहीं मंदसौर जिले के सुवासरा में होने वाले उपचुनाव में यशपाल सिंह की नाराजगी का भी खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ सकता है। लगभग यही संभावना ग्वालियर चंबल अंचल में भी दिख रही है। इसकी वजह है इस अंचल में जाटव समाज प्रभावी है। कई सीटों पर तो यह समाज हार जीत के फैसले पर पूरी तरह से असरकारक भी है। इस समाज के कई नेताओं की दावेदारी के बाद भी उनकी उपेक्षा की गई है। अगर इस समाज के लोगों ने उपचुनाव में पार्टी का साथ नहीं दिया तो भाजपा प्रत्याशियों को मुश्किल हो जाएगी।

विंध्य व महाकौशल में भी मुसीबत
प्रदेश के यह दोनों अंचल भी इस बार मंत्रिमंडल में उपेक्षित हैं। विंध्य में ठाकुर और ब्राह्मण मजबूत पकड़ रखते हैं। यहां पर ठाकुर कांग्रेस आर ब्राह्मण भाजपा के साथ माने जाते हैं, लेकिन गिरीश गौतम और केदार शुक्ला जैसे कद्दावर विधायकों को एक बार भी मौका नहीं दिया गया है, जबकि इस अंचल से ही सर्वाधिक विधायक भाजपा के हैं। इसका असर नगरीय निकाय चुनाव में दिख सकता है। ऐसा ही कुछ हाल महाकौशल का भी है।

कार्यकर्ताओं की भावनाएं हैं
यह कार्यकर्ताओं की भावनाएं हैं, जो सामने आई है। मेरे समझाने पर कार्यकर्ताओं ने आंदोलन खत्म कर दिया है। मुख्यमंत्री ने जो निर्णय लिया है वह कुछ सोच समझ कर ही लिया होगा। उम्मीद है कि भविष्य में कुछ करेंगे।
गायत्री राजे पवार, विधायक, देवास

मुख्यमंत्री का निर्णय मान्य
कार्यकर्ताओं की भावनाएं हैं, वे भी चाहते हैं कि उनके क्षेत्र के प्रतिनिधि को मंत्रिमंडल में महत्तव मिले। मैंने तो सीएम के निर्णय को मान लिया है और कार्यकर्ताओं ने मेरे कहने पर धरना खत्म कर दिया है, लेकिन सोशल मीडिया पर किस-किस को समझाऊंगा।
यशपाल सिसोदिया, विधायक, मंदसौर

यह स्वाभाविक अभिव्यक्ति है
30 साल से सागर भाजपामय है। ऐसे में मंत्रिमंडल में उनके क्षेत्र को प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। यह कार्यकर्ताओं की स्वाभाविक अभिव्यक्ति थी। नाराजगी पार्टी या संगठन के प्रति नहीं थी। बल्कि अपने विधायक को मंत्री नहीं बनाए जाने को लेकर थी।
शैलेंद्र जैन, विधायक, सागर

x

Check Also

देश में 24 घंटे में कोरोना के रिकॉर्ड 64,399 नए मामले

नई दिल्ली, मंगल भारत। देश में कोरोना संक्रमित मरीजों के मिलने का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले 24 घंटे में कोरोना ...