एक दर्जन नेता दोबारा माननीय बनेंगे या नहीं, कयास जारी

28 विधानसभा सीटों पर खत्म हुआ मतदान, अब नेताओं के भाग्य के फैसले पर सबकी निगाहें…

भोपाल/मनीष द्विवेदी/मंगल भारत। मध्यप्रदेश की 28 विधानसभा सीटों के लिए कल हुए मतदान में वैसे तो मतदाताओं ने 355 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला कर दिया है, लेकिन इनमें भी खास उन एक दर्जन नेताओं के भाग्य के फैसले पर सभी की निगाहें हैं, जो पहली बार विधायक बनने के बाद 15 माह में ही इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने के बाद दोबारा विधायक बनने के लिए मैदान में उतरे हैं। यह वे प्रत्याशी हैं जिनकी वजह से ही कमलनाथ की कांग्रेस सरकार को सत्ता से बाहर होना पड़ा है। अब वे एक बार फिर जनता दरबार में परीक्षा दे रहे हैं।
कल हो चुके मतदान में ही इनके आगे का सियासी सफर टिका हुआ है। इनमें शिव सरकार के दो मंत्री भी शामिल हैं। इन सभी का जनादेश बीती शाम को ईवीएम में कैद हो गया है। अब जनता का फैसला दस नवंबर को सुनाया जाएगा। इसके साथ ही चुनाव मैदान में उतरने वाले इन पूर्व विधायकों के दावे की असलियत भी जनता के मत के साथ सामने आ जाएगी। इसकी वजह है कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाने वाले पूर्व विधायकों का दावा, जिनमें उनके द्वारा कहा गया था कि कांग्रेस सरकार में विकास के काम बंद हो गए थे। इसलिए मजबूरी में भाजपा में जाना पड़ा है। उधर कांग्रेस का दावा है कि पार्टी छोड़कर गए विधायक बिकने वाले हैं। उनका विकास से कोई लेना-देना नहीं है।
भाजपा का कहना है कि कांग्रेस में रहकर वे अपमानित महसूस कर रहे थे। इसलिए भाजपा में आए हैं। उन्हें भाजपा में सम्मान मिल रहा है। जनता का आशीर्वाद भी उन्हें मिलेगा और वे फिर जीतकर विकास को गति देने का काम करेंगे। इस चुनाव में प्रदेश सरकार और भाजपा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक एक दर्जन मंत्रियों का भविष्य दांव पर है। उसके साथ शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई वाली प्रदेश सरकार का भविष्य भी इसी चुनाव के जरिए तय होना है। ऐसे में देखना होगा कि राज्य सरकार के मौजूदा मंत्री अपना पद बचा पाते हैं या नहीं। ऐसा इसलिए कि अधिकांश सीटों पर मंत्रियों को कांग्रेस प्रत्याशियों से कड़ा मुकाबला करना पड़ रहा है। इसकी वजह से यह देखने वाली बात है कि कितने मंत्री अपना पद बचा पाते हैं। तीसरे दल के तौर पर बसपा भी सभी 28 सीटों पर चुनाव लड़ी है। ऐसे में कई सीटों पर मुकाबला त्रिकोणीय भी बना हुआ है।

दो चुनावों में 23 मंत्री बैठ चुके हैं घर
प्रदेश में मतदाताओं द्वारा मंत्रियों को चुनाव में नापसंद किया जाना कोई नई बात नहीं हैं। अगर बीते दो चुनावों पर नजर डालें तो शिवराज सरकार के 23 मंत्रियों को जनता घर बिठा चुकी है। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव में 10 और 2018 के चुनाव में 13 मंत्री विधानसभा चुनाव में हार गए थे। सिंधिया समर्थक जिन 14 नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह मिली है, उनमें गिर्राज दंडोतिया और ओपीएस भदौरिया पहली बार विधायक बने थे और इस्तीफे के बाद भाजपा सरकार में मंत्री बने हैं। उपचुनाव में सरकार के एक दर्जन मंत्री मैदान में हैं। तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत को तकनीकी कारणों से मंत्रिमंडल से बाहर हो चुके हैं। वे भी मैदान में रहे। कांग्रेस के कुल 25 पूर्व विधायक चुनाव मैदान में थे। तीन सीटें विधायकों के निधन के कारण रिक्त हुई थीं, इनमें से एक भाजपा और दो कांग्रेस के विधायक थे।

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