सिंधिया समर्थक 14 मंत्रियों का जीतना बड़ी चुनौती

भोपाल/मनीष द्विवेदी/मंगल भारत। मध्यप्रदेश में

पिछले दो चुनावों से लगातार मंत्रियों के हारने का सिलसिला जारी है। ऐसे में शिवराज सरकार में सिंधिया समर्थक उन 14 मंत्रियों की साख दांव पर लगी है जो मंत्री पद त्याग कर भाजपा में शामिल हुए थे। भाजपा ने उन्हें ही उपचुनावों में प्रत्याशी बनाया। हालांकि मतदान के बाद अब फैसला फिलहाल ईवीएम में बंद हो गया है और परिणाम आने से पहले कयास लगाए जा रहे हैं। इनमें दो मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन अभी वे मंत्री की हैसियत से ही चुनाव लड़े।
चुनावों में मंत्रियों के हारने के सिलसिले को देखते हुए इस बार इनकी किस्मत के साथ भविष्य दांव पर लगा है। बहरहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि इनमें से कितने मंत्री अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब हो पाते हैं, क्योंकि अधिकांश स्थानों पर इन्हें कड़ी टक्कर मिली है। खासतौर पर ग्वालियर चंबल अंचल की सीटों पर संघर्ष तगड़ा रहा। इसमें विशेष बात ये थी कि विपक्षी उम्मीदवार ही नहीं बल्कि दल बदलने के कारण पार्टी के स्तर पर भी इन्हें संघर्ष करना पड़ा है।
संघर्ष के बाद भी राह आसान नहीं
दरअसल कांग्रेस से भाजपा के 25 पूर्व विधायकों के सामने फिर से विधायक बनने के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती खुद को मिले वोटों के अंतर को पाटना है जो उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में भाजपा उम्मीदवारों से अधिक मिले थे। हालांकि इस मामले में सबसे कम चुनौती उन पूर्व विधायकों के सामने जो दो हजार से कम मतों से जीते थे। इनमें मंत्री हरदीप सिंह डंग की जीत सबसे छोटी थी और वह 350 मतों से जीते थे। उसके बाद मांधाता के नारायण पटेल जो कि 1236 वोट जीते उसके बाद नेपानगर की सुमित्रा देवी जो 1256 वोट से जीती थी। वहीं सबसे बड़ी जीत दर्ज कराने वालों में डबरा से उम्मीदवार रहीं इमरती देवी थी वे 57 हजार से ज्यादा वोटों से जीती थी तथा बदनावर से राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव 41506 वोटों से जीते थे। इसी प्रकार अन्य पूर्व विधायक भी जो भारी मतों से जीते थे उनके सामने मतों के अंतर को पाटना और उसके बाद उस पर बढ़त लेना होगा तभी उनके विधायक बनने के अरमान पूरे हो सकेंगे। बता दें, कि प्रदेश में पिछले दो विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो शिवराज सरकार के 23 मंत्रियों को जनता ने घर बैठा दिया था। वर्ष 2013 में 10 मंत्री चुनाव हार गए थे तो वहीं 2018 में 13 मंत्री विधानसभा चुनाव नहीं जीत पाए थे। इस बार तीन नवंबर को हुए उपचुनावों में सिंधिया समर्थक 14 मंत्रियों की साख दांव पर लगी है इनमें 11 पर तो स्वयं सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रतिष्ठा दांव पर है, क्योंकि यह विधायक उनके कहने पर ही पार्टी बदल कर भाजपा में आए हैं।
इन मंत्रियों के चुनाव परिणाम पर सबकी नजर
ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबी माने जाने वाले तुलसी सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, डॉक्टर प्रभुराम चौधरी, इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, महेंद्र सिंह सिसोदिया, गिर्राज दंडोतिया, ओपीएस भदौरिया, सुरेश धाकड़, बृजेंद्र सिंह यादव, राज्यवर्धन सिंह दत्तीगांव, एंदल सिंह कंसाना, बिसाहूलाल सिंह और हरदीप सिंह डंग के 10 नवम्बर को आने वाले चुनाव नतीजों पर सबकी निगाहें रहेंगी। उल्लेखनीय यह भी है कि इनमें से कई मंत्री तो उपचुनावों में प्रचार के दौरान अपने बयानों को लेकर भी विवादों में रह चुके हैं।

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