मध्य प्रदेश में अब पीड़ित महिला के पास खुद जाएगी पुलिस

भोपाल/मध्यप्रदेश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने के लिए अब सरकार नई पहल शुरू करने की तैयारी कर रही है।
इसके तहत अब प्रदेश के सभी महिला थानों को महिला अपराध विशेषज्ञ थानों के तौर पर बनाने की तैयारी है। इसको लेकर हाल ही में पुलिस मुख्यालय से संबंधित डीआईजी और एसपी को निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। इसके लिए महिला थानों में पदस्थ पुलिसकर्मियों को विशेष रुप से प्रशिक्षित किया जाएगा। गौरतलब है कि फिलहाल प्रदेश के दस जिलों में महिला थाने कार्यरत हैं। इन थानों में यह काम शुरू किया जाना है। यही नहीं अब नई यह व्यवस्था भी बनाई जा रही है कि पीड़िता को शिकायत करने के लिए थाने तक न जाना पड़े, बल्कि पुलिस खुद उसके पास पहुंचकर उसकी न केवल मदद करे, बल्कि उसकी रिपोर्ट भी दर्ज करेगी।
नई व्यवस्था में खास बात यह होगी कि पीड़ित महिला शिकायत लेकर जिस थाने में भी पहुंचेगी ,वहीं प्रकरण दर्ज कर लिया जाएगा। इसके बाद केस महिला थाने को भेज दिया जाएगा। इसके अलावा पीड़िता को अन्य सुविधाएं और संसाधन भी थाने से ही उपलब्ध करा दिए जाएं। एसिड अटैक महिला के इलाज और पुनर्वास की व्यवस्था कराई जाए। थाने वन स्टॉप सेंटर से संपर्क कर सहायता उपलब्ध कराएं।
नई व्यवस्था की वजह
सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था होने से महिला पुलिसकर्मी महिलाओं के साथ अधिक संवेदनशीलता से पेश आएगी। पीड़िता भी नई व्यवस्था बनने के बाद बगैर किसी संकोच के अपनी परेशानी और उससे संबंधित सभी बातें आसानी से बता सकेंगी। जांच में तथ्यों के साथ संवेदनशीलता होने की वजह से और अधिक गहराई से जांच की जा सकेगी। इससे पीड़िताओं को तत्परता से मदद मिल सकेगी।
क्या कहते हैं गृहमंत्री
इस मामले में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि सरकार प्रदेश में महिला अपराध घटाने के लिए पूरी तरह से संकल्पित है। हम हर वो कदम उठा रहे हैं जो इन अपराधों की रोकथाम के लिए जरुरी हो। नई व्यवस्था से हमारी महिला पुलिस पूरी दक्षता और संवेदनशीलता से महिला अपराध पर रोक लगा पाएगी।

यह दिए जाएंगे मामले
12 साल तक की लड़कियों के विरुद्ध बलात्कार।
एसिड अटैक धारा 326 ए।
अनैतिक देह व्यापार और धारा 370, 370 ऐ धारा 354 के तहत महिला शीलभंगद्ध।
बच्चों के विरुद्ध पॉक्सो प्रकरण ।
महिला अपराध की रोकथाम के लिए प्रचार प्रसार और जनजागरूकता।
इन बिंदुओं पर दिया जाएगा प्रशिक्षण
महिला संबंधी अपराधों में विशेष ज्ञान।
पीड़िता से सहानुभूतिपूर्वक व्यवहार और
सुनवाई की दक्षता।
वन स्टॉप सेंटर से समन्वय।
संसाधन जो पीड़िता को दिए जाने हैं।

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