अब किशोर बच्चों से काम करवाया तो खैर नहीं

भोपाल/मनीष द्विवेदी।मंगल भारत। अब तक नाबालिग

बच्चों को भी परिवार के व्यवसाय में सामान्य तौर पर हाथ बंटाते हुए देखा जा सकता है। यदि किसी किराने की दुकान है या फिर किसी अन्य तरह की दुकानों में पिता एवं परिजन के साथ नाबालिग बच्चे भी दुकान पर मदद करते दिख जाते हैं, लेकिन अब ऐसा संभव नहीं हो सकेगा। इसके लिए अब राज्य सरकार द्वारा नए नियम तय किए जा रहे हैं। इनमें किए गए प्रावधानों की वजह से अब नाबालिग को विनिर्माण उत्पादन आपूर्ति या खुदरा श्रेणी के कार्य या व्यवसाय या प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सकेगा। राज्य सरकार द्वारा इसके लिए श्रम प्रतिषेध और विनियमन अधिनियम 1986 में संशोधन का प्रारूप तैयार करा लिया गया है। प्रस्तावित संशोधन के हिसाब से अब बालक और किशोरों को किसी उत्पादन वाले उपक्रमों या कारखानों में काम के लिए नहीं रखा जा सकेगा। यदि उपक्रम निजी है तो परिजन की सहायता के लिए कई बार नाबालिगों और किशोरों को भी काम में हाथ बटाने के लिए शामिल कर लिया जाता था। इसी तरह बालकों को फुटकर श्रेणी के दुकानों में भी बैठा लिया जाता है। इस तरह के मामले प्राय: घरों में ही संचालित होने वाली दुकानों पर आमतौर पर सामने आते हैं। यही वजह है कि अब सरकार इन नियमों को और सख्त करने जा रही है।
 स्कूल समय में सभी काम प्रतिबंधित
राज्य सरकार द्वारा श्रम नियमों में जो नए संशोधन करने जा रही है, उसके मुताबिक स्कूलों के समय में परिजन बालक या फिर किशोरों से किसी भी तरह का काम नहीं करा सकेंगे। इसी तरह से किए जा रहे प्रावधानों के तहत शाम 7 बजे से लेकर 8 बजे के बीच भी कोई काम नहीं करा सकेंगे। जो संशोधन प्रस्तावित किया गया है उसके मुताबिक बच्चों को कभी भी ऐसे कार्य में नियोजित नहीं किया जा सकेगा जो कि उनके शिक्षा के अधिकार का अतिक्रमण करता हो या फिर किसी तरह से बाधा उत्पन्न करता हो।
तीन घंटे का भी प्रतिबंध
प्रस्तावित विधेयक में यह भी प्रावधान किया जा रहा है कि बालक या किशोरों को बगैर विश्राम के लगातार किसी काम में नियोजित नहीं किया जा सकेगा। ऐसा काम जो उन्हें थका दे या फिर उनके स्वास्थ्य के लिए सही नहीं हो, ऐसे किसी काम में नियोजित नहीं किया जा सकेगा। यह भी प्रावधान किया जा रहा है कि उन्हें लगातार तीन घंटे से अधिक समय तक कोई काम नहीं कराया जा सकेगा। तीस दिन स्कूल न जाने पर नोडल अफसर को देनी होगी सूचना अधिनियम के लिए बनाए गए नए प्रारूप में किए गए प्रावधान के तहत यदि स्कूल में पढ़ने वाला बालक या किशोर लगातार तीस दिन तक स्कूल से अनुपस्थित रहता है और इसकी विधिवत सूचना प्रधानाध्यापक को नहीं देता है तो यह प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी होगी कि इसकी सूचना संबंधित नोडल अधिकारी को देगा।
बाल कलाकार के लिए भी बनेंगे नियम
टीवी से लेकर वेबसीरीज तक में बाल कलाकारों तक की भूमिका होती है। इसी को ध्यान में रखकर अब नए संशोधित कानून में कलाकारों के रूप में काम करने के लिए भी नियम तय किए जा रहे हैं। नए नियमों के हिसाब से अब सूटिंग के मामलों में एक दिन में पांच घंटे से अधिक बाल कलाकार से सूटिंग नहीं कराई जा सकेगी। इतना ही नहीं एक बार में अधिकतम तीन घंटे तक ही लगातार काम कराया जा सकेगा। यदि बालक या किशोर को किसी सूटिंग में हिस्सा लेना है तो इसके लिए माता – पिता या पालकों से विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

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