मप्र में इस साल 47 लाख किसानों ने कराया फसल बीमा का पंजीयन

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा में साल दर साल बढ़ रहा किसानों का विश्वास.
  • भोपाल।मंगल भारत।  प्राकृतिक आपदा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों का सबसे बड़ा संबल बनी हुई है। यही कारण है कि प्रदेश के किसानों का प्रधानमंत्री फसल बीमा की तरफ साल दर साल विश्वास बढ़ता जा रहा है। मप्र में इस साल 47 लाख किसानों ने फसल बीमा का पंजीयन कराया है। हर साल फसल बीमा कराने वाले किसानों की संख्या बढ़ती जा रही है। इसकी वजह यह है कि प्राकृतिक आपदा में फसलों के नुकसान की भरपाई सरकार समय पर कर रही है।
    मप्र सरकार का सबसे अधिक फोकस खेती-किसानी पर है। इसका परिणाम भी दिख रहा है। प्रदेश कई फसलों के उत्पादन में नंबर वन पर है। ऐसे में किसानों को सरकारी योजनाओं का बराबर लाभ मिल रहा है। इस कारण किसानों का रूझान फसल बीमा की ओर बढ़ा है। पिछले वर्षो से फसलों के बीमा के लिए विभाग किसानों को जागरूक करता रहा है। इधर, मौसम की मार के चलते हालात ऐसे बने कि तमाम किसान फसल बीमा की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कारण यही है कि किसानों ने फसलों का बीमा कराया और अब तमाम क्षेत्रों में ज्यादा बारिश होने की स्थिति से फसलों को नुकसान की आशंका से तमाम किसान फसल बीमा करा रहे हैं। इस बार भी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया गया।
    साल दर साल बढ़ रहा  आंकड़ा
    वर्ष 2021 में 47 लाख, वर्ष 2020 में 44 लाख, वर्ष 2019 में 37 लाख, वर्ष 2018 में 35 लाख।
    बीमा करने वाले टाप पांच जिले
    जिला बीमा कराने वाले
    किसानों की संख्या
    उज्जैन 429920
    मंदसौर 400058
    सीहोर 308382
    देवास 231351
    राजगढ़ 222787
    सौ प्रतिशत किसानों के फसल का बीमा लक्ष्य
    मप्र में पिछले तीन-चार सालों के किसान फसल बीमा का पंजीयन रिकार्ड देखा जाए तो प्रति वर्ष तीन लाख नए किसान इस बीमा से जुड़ रहे हैं। इस वर्ष 47 लाख किसानों ने बीमा कराया है। सरकार का लक्ष्य सौ प्रतिशत किसानों के फसल का बीमा कराना है, जिससे कि प्राकृतिक प्रकोप में किसानों को सरकार के आश्रित नहीं रहना पड़े।  फसल बीमा की आखिरी तारीख 31 अगस्त थी। आदिवासी बहुल जिला मंदसौर में चार लाख से अधिक किसानों ने फसल बीमा कराया है। इसकी मुख्य वजह किसानों को पिछले वर्षों में फसल बीमा के क्लेम सबसे ज्यादा मिलना और उनके मामले का सहजता से सेटलमेंट होना बताया जा रहा है।
    उज्जैन में सबसे अधिक बीमा
    प्रदेश के हर जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा के प्रति किसानों का रूझान बढ़ रहा है। वहीं प्रदेश में सबसे ज्यादा बीमा करने वाले किसान उज्जैन जिले में हैं, यहां 4 लाख 29 हजार से अधिक किसानों ने बीमा कराया है। इधर सबसे कम किसानों ने बीमा सिंगरौली जिले में कराया है, जिनकी संख्या 855 है। दूसरे नम्बर सीधी जिला है, जहां सिर्फ 23 सौ लोगों ने अपने फसलों का बीमा कराया है। वहीं कृषि मंत्री कमल पटेल के गृह जिले में सिर्फ 77 हजार किसानों ने बीमा कराया है। बताया जाता है कि किसानों को फसल बीमा कराने के लिए सिर्फ दो फीसदी प्रीमियर देना होता है। 98 फीसदी बीमें की प्रीमियम राशि बीमा कंपनियों में केन्द्र और राज्य सरकार जमा करती हैं। प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा की शुरुआत 2016 में हुई थी, तब प्रदेश में सिर्फ 25 हजार किसानों ने बीमा कराया था। बीमा कराने वालों में 15 हेक्टेयर से ज्यादा खेती करने वाले किसान थे। इसके बाद की स्थिति देती जाए तो बीमा कराने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदेश के 16 जिलों में खरीफ फसल बीमा के लिए बसे ज्यादा किसानों ने पंजीयन कराया है, इसमें सबसे ज्यादा जिले आदिवासी बहुल जिले हैं। इन जिलों में एक लाख से अधिक किसान इस योजना में शामिल हुए हैं। जिसमें बैतूल, देवास, धार, होशंगाबाद, इंदौर, मंदसौर, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन, विदिशा जिला शामिल है।