कब होगी 12 हजार आरक्षकों के पदों पर भर्ती, बना हुआ है सवाल

भोपाल/मंगल भारत। बढ़ती आबादी और अपराधों के

बाद भी मप्र की शिव सरकार रिक्त पड़े 16 हजार में से 12 हजार पदों को भरने के लिए तैयार नही है। इसकी वजह से मैदानी स्तर पर पुलिस विभाग को अमले की कमी से जूझना पड़ रहा है। हालात यह है कि प्रदेश में बीते तीन सालों से आरक्षकों की भर्ती ही नहीं की गई है। अब जाकर सरकार द्वारा चार हजार पदों की भर्ती की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसकी वजह से माना जा रहा है कि सरकार नहीं चाहती है कि पुलिस आरक्षक के रिक्त पदों को शत प्रतिशत भरा जाए।
खास बात यह है कि जिन चार हजार पदों को भरने की मंजूरी दी है, उसकी भर्ती प्रक्रिया भी पुलिस विभाग और प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड के बीच उलझ कर नहीं हो पा रही है। प्रदेश में यह स्थिति तब है जबकि बेरोजगार सड़कों पर परेशान घूम रहे हैं। प्रदेश में सरकारी भर्ती नहीं होने से बेरोजगारी की दर तेजी से बढ़ती ही जा रही है। इसके लिए अब सरकार कोरोना संक्रमण का बड़ा बहाना बना रही है। दरअसल पुलिस में आरक्षक ही वह महत्वपूर्ण कर्मचारी होता है, जिसकी बड़ी भूमिका कानून व्यवस्था बनाने और अपराध रोकने में होती है। विभाग में यह पद सबसे जिम्मेदारी वाला, संवेदनशील और जमीनी स्तर का होता है। आला अफसरों के पद रिक्त रहने से विभाग के कामकाज पर कोई खास अंतर नही पड़ता है। इसके बाद भी सरकार आला अफसरों के पदों को भरने में पूरी ताकत से लगी रहती है। खास बात यह है कि आरक्षकों के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए पुलिस मुख्यालय ने आठ हजार पदों को एक साथ भरने की अनुमति राज्य सरकार से मांगी थी, लेकिन सरकार ने महज चार हजार पदों को भरने की ही स्वीकृति दी है।

खास बात यह है कि जिन चार हजार पदों की भर्ती की मंजूरी दी गई है, उन पर भी भर्ती नहीं हो पा रही है। इसकी वजह है तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने  प्रोफेशलन, एग्जामिनेशन बोर्ड को भ्रष्टाचार और गड़बड़ी का अड्डा बताते हुए उसके माध्यम से भर्ती करने से साफ इनकार कर दिया था। इसके लिए पुलिस विभाग को ही भर्ती के अधिकार देने की तैयारी शुरू कर दी थी। भर्ती की प्रक्रिया शुरू होती इससे पहले ही कांग्रेस सरकार गिर गई, जिसके बाद से ही यह मामला ऐसा उलझा की सुलझ ही नहीं पा रहा है। भाजपा की शिव सरकार ने अब तक पुलिस मुख्यालय को भर्ती करने की अनुमति नहीं दी है। इसको लेकर लगातार पत्राचार किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो मध्यप्रदेश में पुलिस आरक्षकों को तकरीबन 16 हजार पद रिक्त हैं, लेकिन सरकारी आंकड़ों के मुताबिक आरक्षकों के मात्र 4955 पद ही रिक्त बताए जा रहे हैं। सरकारी आंकड़ों की पोल स्वयं पुलिस मुख्यालय के उस प्रस्ताव से चल जाती है, जिसमें उसके द्वारा सरकार से आठ हजार पदों को भरने की अनुमति मांगी थी। यही नहीं अब सरकार द्वारा उच्च पद का प्रभार दिए जाने की वजह से भी आठ हजार आरक्षकों की कमी और विभाग में हो गई है। यह बात अलग है कि सरकार आरक्षकों के रिक्त पदों की जानकारी को भी छुपा रही है। आरक्षक के पदों के अलावा विभाग में हवलदार से लेकर एसआई तक के पद रिक्त हैं, जिन्हें पदोन्नति के जरिए भरा जाना है। जैसे-जैसे ऊपर के पद भरते जाएंगे, आरक्षकों और थानेदारों के रिक्त पदों की संख्या और बढ़ना तय है। पुलिस विभाग में निचले स्तर के पदों पर भर्ती दो तरह से की जाती है। आरक्षक के अलावा एसआई (सूबेदार, थानेदार, प्लाटून कमांडर) के पद पर भर्ती की जाती है। थानेदारों के आधे पद सीधी भर्ती से और आधे पद पदोन्नति से भरे जाते हैं। विभाग के रिक्त पदों का आंकड़ा जोड़ दिया जाए, तो यह बीस हजार के करीब पहुंच जाएगा.