मेरठ पुलिस ने सड़क पर नमाज़ पढ़ने वालों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है. यूपी के सभी ज़िलों में सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ पर रोक लगाई गई है. इसके विपरीत, कांवड़ यात्रा समेत अन्य हिंदू धार्मिक आयोजनों के दौरान यूपी सरकार विशेष सुविधाएं प्रदान करती रही है, जो उसके दोहरे रवैया को दिखाता है.

नई दिल्ली: एक माह के रमजान के बाद मनाया जाने वाला त्योहार ईद उल-फितर अब नज़दीक है. इस बीच देश के सबसे बड़े राज्य (उत्तर प्रदेश) की पुलिस सुरक्षा इंतज़ाम के नाम पर दोहरा रवैया अपनाती नज़र आ रही. कांवड़ यात्रा के लिए सड़क खाली करवाने वाली उत्तर प्रदेश की पुलिस अब सड़क पर नमाज़ पढ़ने पर रोक लगा रही है.
मेरठ में पुलिस ने सड़क पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाई है. पुलिस ने चेतावनी दी है कि अगर कोई इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी, आपराधिक मामले भी दर्ज किए जा सकते हैं. साथ ही पासपोर्ट और लाइसेंस रद्द करने की भी चेतावनी दी गई है.
भाजपा के सहयोगी दल के प्रमुख ने किया विरोध
विपक्ष से पहले इस फैसले का विरोध सत्तापक्ष के सहयोगी दल के नेता ने किया है. केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) प्रमुख जयंत सिंह चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है, ‘ऑरवेल के 1984 जैसा पुलिसिया रवैया!’
जयंत का इशारा जॉर्ज ऑरवेल के उपन्यास ‘1984’ की थॉट पुलिस की ओर था, जो न केवल लोगों की गतिविधियों पर नज़र रखती है बल्कि उनके विचारों तक को नियंत्रित करने की कोशिश करती है.
1984 के संदर्भ का इस्तेमाल करके वह यह संकेत देना चाहते हैं कि सरकार और पुलिस अत्यधिक नियंत्रण की ओर बढ़ रही है, जहां नागरिकों के व्यक्तिगत अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता पर पाबंदियां लगाई जा रही हैं.
दूसरे शब्दों में कहें, तो जयंत चौधरी का यह ट्वीट एक सांकेतिक विरोध है, जिसमें वह यूपी पुलिस की इस नीति की तुलना ऑरवेलियन राज्य से कर रहे हैं, जहां सरकार लोगों की निजी स्वतंत्रता पर अनुचित रूप से नियंत्रण रखती है और कठोर दंड का सहारा लेती है.
क्या है मेरठ पुलिस का फरमान?
बुधवार (26 मार्च) को मेरठ पुलिस ने आठ लोगों की एक सूची ज़िला मजिस्ट्रेट डॉ. विजय कुमार सिंह को सौंपी, जिन पर पिछले साल ईद के दौरान सड़क पर नमाज पढ़ने के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप है. पुलिस ने इनके लाइसेंस और पासपोर्ट रद्द करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.
मेरठ शहर के एसपी आयुष विक्रम सिंह ने कहा, ‘हमने लोगों से अपील की है कि वे नजदीकी मस्जिदों में नमाज अदा करें या समय पर ईदगाह पहुंचें. हमने सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी हाल में सड़कों पर नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं होगी.’
उन्होंने बताया कि पिछले साल कुछ लोगों ने सड़क पर नमाज पढ़ी थी, जिसके चलते उनके खिलाफ एआईआर दर्ज की गई थी. ‘अगर इस बार भी कोई खुले में नमाज पढ़ने बैठता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. हम लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं.’
उल्लेखनीय है कि गत साल कांवड़ यात्रा के दौरान ही पूरे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस को 28 जुलाई से 4 अगस्त तक बंद कर दिया गया था.
नमाज़ को लेकर सिर्फ मेरठ में फरमान नहीं
नमाज़ पर इस तरह की पाबंदी सिर्फ मेरठ में नहीं लगाई जा रही है, बल्कि यूपी के कई जिलों से ऐसी ही खबरें आ रही हैं. केवल सार्वजनिक जगहों पर नहीं बल्कि अपनी छत पर नमाज़ न पढ़ने की भी हिदायत दी जा रही है.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, संभल में पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया है कि पुलिस ने सड़क पर नमाज अदा करने के खिलाफ एक एडवाइजरी जारी की है, ‘कोई भी व्यक्ति सड़क पर नमाज नहीं पढ़ेगा. घर में सामूहिक रूप से नमाज पढ़ने की अनुमति नहीं होगी. लोग अपने घरों में नमाज पढ़ सकते हैं, लेकिन यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कोई अप्रिय घटना न हो.’
अलीगढ़ के एसपी मृगांक शेखर पाठक ने कहा है कि ईद की नमाज को लेकर कोई विशेष आदेश जारी नहीं किया गया है. ‘हम उत्तर प्रदेश सरकार की उस एडवाइजरी का पालन कर रहे हैं, जिसमें कहा गया है कि सार्वजनिक स्थानों पर नमाज़ नहीं होगी. शांति समिति की बैठक बुलाई गई थी और यह निर्देश लोगों को दे दिए गए हैं.’
हाथरस के एसपी चिरंजीव नाथ सिन्हा ने कहा है कि उन्होंने भी कोई विशेष आदेश जारी नहीं किया है. ‘हम किसी भी समुदाय के व्यक्ति को सड़क या सार्वजनिक स्थानों पर प्रार्थना करने की अनुमति नहीं देंगे. यह एक उत्सव का दिन है और लोग इसे अपने घरों में मना सकते हैं.’
गाजियाबाद पुलिस ने कहा है कि अगर भीड़ बढ़ती है, तो लोगों को शिफ्ट्स में नमाज अदा करने के लिए कहा जाएगा. ट्रांस-हिंडन डीसीपी कहते हैं, ’हमने सभी संवेदनशील इलाकों, मस्जिदों और ईदगाह के पास सुरक्षाबलों को तैनात किया है… ड्रोन से लगातार निगरानी की जाएगी.’
बता दें कि आमतौर पर नमाज को पूरा करने में 5 से 10 मिनट का वक्त लगता है, जबकि कांवड़ यात्रा पूरे महीने चलती है. रामनवमी जैसी यात्राएं कई घंटे और लंबी दूरी तक चलती हैं. पिछले कुछ वर्षों में यह देखा गया है कि उत्तर प्रदेश की सरकार हिंदुओं के त्योहार में बढ़ चढ़कर भाग लेती है, सुरक्षा के नाम रोक नहीं लगाती बल्कि अधिक से अधिक सुविधा प्रदान करती है.
कुंभ इसका सबसे ताजा उदाहरण है, जिसकी वजह से इलाहाबाद के आस-पास के जिलों तक में जाम की स्थिति पैदा हो गई थी. कुंभ की वजह से आम शहरी का जीवन अस्त व्यस्त हो गया था लेकिन उसकी वजह से सरकार ने कुंभ को बंद नहीं किया. कांवड़ यात्रा के दौरान धार्मिक भावना को ध्यान में रखते हुए न सिर्फ मांसाहारी दुकानों को बंद किया गया बल्कि अन्य सामान बेचने वाले मुस्लिम दुकानदारों को भी अपनी पहचान बताने पर मजबूर किया गया. बाद में अदालत के हस्तक्षेप से इस पर लोग लगी.