जम्मू-कश्मीर: कठुआ मुठभेड़ में दो संदिग्ध आतंकवादी मारे गए, तीन सुरक्षाकर्मी शहीद

कठुआ जिले में पिछले पांच दिनों से चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान गुरुवार को सुरक्षा बलों के एक तलाशी दल पर गोलीबारी हुई. मुठभेड़ में दो अज्ञात आतंकवादी मारे गए और तीन पुलिसकर्मी शहीद हो गए हैं.

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में जारी मुठभेड़ में दो अज्ञात आतंकवादी मारे गए हैं और तीन पुलिसकर्मी शहीद हो गए हैं. अधिकारियों ने शुक्रवार (28 मार्च) को यह जानकारी दी.

रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ स्थल के पास जम्मू-कश्मीर पुलिस के उप-विभागीय पुलिस अधिकारी (डीवाईएसपी) धीरज कटोच और सेना की एलीट पैरा यूनिट के एक कमांडो समेत चार सुरक्षाकर्मी भी घायल हो गए. मुठभेड़ स्थल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है.

अधिकारी ने बताया कि मृतक पुलिसकर्मियों की पहचान कांस्टेबल तारिक अहमद, जसवंत सिंह और बलविंदर सिंह के रूप में हुई है. तीनों डीएसपी की सुरक्षा में तैनात थे. पैरा कमांडो की हालत गंभीर है और उन्हें विशेष उपचार के लिए एयरलिफ्ट किया गया है, जबकि डीएसपी की हालत स्थिर बताई जा रही है.

मारे गए आतंकवादियों की पहचान और संबद्धता का अभी तक पता नहीं चल पाया है और साथ ही यह भी नहीं पता है कि उनके शव इलाके से बरामद हुए हैं या नहीं.

हाल ही में घुसपैठ करने वाले एक समूह का हिस्सा बताए जा रहे अन्य तीन आतंकवादियों का क्या हुआ, फिलहाल इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है. हालांकि, अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ जारी है.
कठुआ ऑपरेशन पर सवाल उठे

इससे पहले दिन में अधिकारियों ने बताया था कि कठुआ जिले में पिछले पांच दिनों से चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों के एक तलाशी दल पर गोलीबारी में कम से कम दो पुलिस अधिकारी घायल हो गए.

रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार (27 मार्च) सुबह ये गोलाबारी उस समय शुरू हुई, जब पुलिस और अन्य सुरक्षा बलों की एक टीम, जो रविवार (23 मार्च) से जम्मू संभाग के कठुआ जिले में बड़े पैमाने पर घेराबंदी और तलाशी अभियान (कैसो) में शामिल थी, जोथाना क्षेत्र के जखोले गांव के ऊपरी इलाकों में सुफैन जंगल में आतंकवादियों के हमले की चपेट में आ गई.

अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ स्थल से करीब 30 किलोमीटर दूर हीरा नगर में रविवार को गोलीबारी हुई थी, तब आतंकवादियों के एक समूह ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाया था, जिसके बारे में माना जा रहा है कि वे हाल ही में घुसपैठ करके आए हैं. उनकी सुरक्षा बलों के साथ गोलीबारी हुई और बाद में इलाके से भागने में सफल रहे.

रविवार को सान्याल गांव के निवासियों ने पांच संदिग्ध आतंकवादियों के एक समूह को ढोक के अंदर शरण लेते हुए देखा. ढोक आदिवासी चरवाहों द्वारा बनाया गया एक अस्थायी आश्रय है, जो पीर पंजाल और जम्मू-कश्मीर के आसपास की अन्य पर्वत श्रृंखलाओं की तलहटी में पशुओं को चराने के लिए बनाया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, संदिग्धों को सबसे पहले एक महिला अनीता देवी, उनके पति गणेश कुमार और उनके देवर ने देखा था, जब वे कठुआ में अंतरराष्ट्रीय सीमा से बमुश्किल चार किलोमीटर दूर अपने गांव से सटे एक नर्सरी से लकड़ियां इकट्ठा कर रहे थे.

गणेश कुमार ने स्थानीय पत्रकारों को बताया कि आतंकवादियों ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की और धमकी दी कि अगर उन्होंने सुरक्षा बलों को उनके बारे में बताया तो वे उन्हें जान से मार देंगे. बाद में सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की एक टीम रविवार को इलाके में पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया गया.

झड़प के दौरान नाबालिग बच्ची घायल

रविवार को दोनों पक्षों के बीच करीब 30 मिनट तक गोलीबारी हुई. इस दौरान सात साल की एक बच्ची घायल हो गई, लेकिन पुलिस ने उसकी चोट के कारण की पुष्टि नहीं की है.

इस घटना के बाद रविवार को इलाके में सेना, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड कमांडो, सीमा सुरक्षा बल और केंद्रीय रिजर्व अर्धसैनिक बलों के साथ-साथ पुलिस की ओर से बड़े पैमाने पर घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू किया गया.

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के शीर्ष पुलिस अधिकारी नलिन प्रभात कठुआ में डेरा डाले हुए हैं और जम्मू-कश्मीर पुलिस के आतंकवाद-रोधी विशेष अभियान समूह की टीमों के साथ इस अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं.

अभियान में शामिल सुरक्षा बलों ने जमीनी टीमों का मार्गदर्शन करने के लिए हेलिकॉप्टर, ड्रोन और यूएवी उड़ाए हैं, जबकि शनिवार (22 मार्च) को घुसपैठ करने वाले आतंकवादियों का पता लगाने के लिए गहरी खाइयों वाले खतरनाक इलाके में तकनीकी निगरानी बढ़ा दी गई है.

अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने चार एम4 कार्बाइन मैगजीन, दो ग्रेनेड, स्लीपिंग बैग, एक बुलेटप्रूफ जैकेट, ट्रैकसूट, खाद्य सामग्री और इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) बनाने में प्रयुक्त सामग्री से भरे बैग बरामद करने का दावा किया है, जिन्हें घुसपैठियों ने रविवार को हीरा नगर में मुठभेड़ स्थल के पास फेंक दिया था.

‘घुसपैठ का हॉटस्पॉट’

ज्ञात हो कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित कठुआ जिला बीते कुछ समय से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के हॉटस्पॉट में से एक बन गया है. यहां पिछले साल आतंकवाद विरोधी अभियानों में कम से कम 18 सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जान गंवाई, जबकि 13 संदिग्ध आतंकवादियों को मार गिराया गया.
हालांकि, पीर पंजाल क्षेत्र में आतंकवाद से संबंधित हिंसा में कमी देखी गई, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद चेनाब घाटी के डोडा और किश्तवाड़ जिलों और कठुआ, उधमपुर और जम्मू जिलों में फैल गया है.

मालूम हो कि16 फरवरी को कठुआ के बिलावर तहसील में दो नागरिकों शमशेर और रोशन के शव बरामद किए गए थे, जिन पर गला घोंटने के निशान थे.

पुलिस की मानें तो, उनकी हत्या में अज्ञात आतंकवादी शामिल थे. 8 मार्च को पुलिस ने 15 वर्षीय वरुण सिंह और उसके चाचा योगेश सिंह और दर्शन सिंह के शव नदी से बरामद किए गए. तीनों 5 मार्च को एक शादी समारोह के दौरान लापता हो गए थे और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने हत्याओं के लिए आतंकवादियों को जिम्मेदार ठहराया था.

इस बीच, कठुआ से विधानसभा सदस्य भारत भूषण ने गुरुवार को कठुआ के सरकारी मेडिकल कॉलेज का दौरा किया, जहां उन्होंने मुठभेड़ में घायल हुए पुलिसकर्मी की स्थिति के बारे में जानकारी ली.