जम्मू-कश्मीर: ड्रोन घुसपैठ और गोलीबारी के बाद रात से शांति, संघर्षविराम के बीच कोई नई घटना नहीं हुई

जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर बीते कई दिनों से ड्रोन घुसपैठ और आर्टिलरी गोलाबारी को लेकर बढ़े तनाव के बाद रविवार (11 मई) की सुबह शांत रही. संघर्षविराम की घोषणा के कुछ घंटों बाद हुई गोलीबारी के बाद रविवार सुबह तक किसी भी नई गोलीबारी या ड्रोन घुसपैठ की कोई खबर नहीं आई.

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) और अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) पर बीते कई दिनों से ड्रोन घुसपैठ और आर्टिलरी गोलीबारी को लेकर बढ़े तनाव के बाद रविवार (11 मई) की सुबह शांत रही.

मालूम हो कि भारत-पाकिस्तान सैन्य तनाव के बीच यहां गोलीबारी में एक दर्जन से अधिक नागरिक मारे गए हैं.

खबरों और अधिकारियों के अनुसार, 10 और 11 मई की मध्यरात्रि के दौरान केंद्र शासित प्रदेश में स्थिति शांतिपूर्ण रही और नियंत्रण रेखा और अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार से ड्रोन या प्रोजेक्टाइल द्वारा गोलीबारी या घुसपैठ की कोई घटना नहीं हुई.

ज्ञात हो कि शनिवार को भारत द्वारा संघर्षविराम की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद केंद्र शासित प्रदेश के कुछ सैन्य प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण जगहों के पास ड्रोन देखे गए, जिन्हें बिना किसी नुकसान के एंटी-ड्रोन सिस्टम द्वारा मार गिराया गया.

खबरों के मुताबिक, जिन जगहों पर ड्रोन देखे गए, उनमें राजधानी श्रीनगर में सेना की 15वीं कोर मुख्यालय के पास का इलाका, अनंतनाग के ऊंचे मैदान, जहां एक सैन्य अड्डा भी है, बारामूला और उधमपुर के छावनी इलाके, जम्मू, उत्तरी कश्मीर में बांदीपोरा और रियासी, जहां दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे पुल है, शामिल हैं.

ड्रोन की घुसपैठ के बाद केंद्र शासित प्रदेश के कुछ हिस्सों में हवाई हमले के सायरन भी बजने लगे, जिससे प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों में चिंता और बढ़ गई.

अधिकारियों ने बताया कि घुसपैठ के बाद हवाई सुरक्षा सक्रिय कर दी गई और ड्रोन को एंटी-ड्रोन सिस्टम द्वारा रोककर नीचे गिरा दिया गया, जिसके चलते बड़े पैमाने पर विस्फोट हुए, जिससे इन इलाकों में रहने वाले लोगों में दहशत फैल गई.

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी इसे लेकर एक्स पर एक पोस्ट में सवाल उठाया था कि आखिर संघर्ष विराम का क्या हुआ?
रात से ही शांति, कोई नई गोलीबारी या ड्रोन घुसपैठ नहीं

हालांकि, शनिवार रात 10:30 बजे के बाद केंद्र शासित प्रदेश में फिर से शांति देखी गई और रविवार सुबह तक किसी भी नई गोलीबारी या ड्रोन घुसपैठ की कोई खबर नहीं आई.

पुंछ के निवासी मुर्तजा अली ने रविवार सुबह फोन पर बताया, ‘पूरी तरह से शांति थी और पिछले कुछ दिनों से तोपों और गोलीबारी की आवाजों से आतंकित रहने के बाद हम रात भर शांति से सोए. मुझे उम्मीद है कि यह इसी तरह जारी रहेगा ताकि लोग अपनी सामान्य जिंदगी में लौट सकें.’

पुंछ जिला, जो नियंत्रण रेखा पर पड़ता है, भारत द्वारा ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किए जाने के बाद आर्टीलरी गोलीबारी में सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ है.

यहां मंगलवार और बुधवार (6-7 मई) की दरमियानी रात कम से कम 12 नागरिकों की मौत हो गई. मृतकों में चार बच्चे शामिल हैं.

उरी के कमलकोट के निवासी मुनीर हुसैन ने द वायर को फ़ोन पर बताया कि सीमावर्ती शहर और उसके आस-पास के इलाकों में शनिवार और रविवार की दरमियानी रात को शांति रही.

सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी हुसैन ने कहा, ‘पिछले कुछ दिन प्रलय के दिन जैसे थे. 1999 (भारत-पाक) युद्ध के दौरान भी हमने इतनी गोलीबारी नहीं देखी थी. मुझे उम्मीद है कि शांति बनी रहेगी.’

हालांकि, भले ही संघर्ष विराम लागू हो गया हो, लेकिन जम्मू में तनाव अभी भी बना हुआ है, क्योंकि संदिग्ध आतंकवादियों ने नगरोटा इलाके में सेना की 16वीं कोर के मुख्यालय पर गोलीबारी की, जिसमें एक सैनिक घायल हो गया.

शुरुआती रिपोर्टों में कहा गया कि नगरोटा बेस को आत्मघाती हमलावरों ने निशाना बनाया था. हालांकि, सेना ने इन रिपोर्ट्स का खंडन किया है.

व्हाइट नाइट कोर ने एक्स पर कहा, ‘परिधि के पास संदिग्ध गतिविधि को देखते हुए, नगरोटा मिलिट्री स्टेशन पर सतर्क संतरी ने एक चुनौती जारी की, जिसके कारण संदिग्ध के साथ कुछ देर तक गोलीबारी हुई. संतरी को मामूली चोटें आईं. घुसपैठियों का पता लगाने के लिए तलाशी अभियान जारी है.

पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने में जनता की मदद मांगी

सुरक्षा बलों द्वारा बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू किए जाने के बावजूद हमले की खबर ने शीतकालीन राजधानी में और हमलों की आशंका के बारे में अफवाहों को हवा दी है, जिसके कारण जम्मू-कश्मीर पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने में जनता की मदद मांगने के लिए एक एडवाइजरी जारी की है.

ऐसी भी अपुष्ट खबरें हैं कि कई संदिग्ध आतंकवादी अमेरिका द्वारा किए गए संघर्षविराम का लाभ उठाकर जम्मू के आरएस पुरा में अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करने में सफल रहे हैं.

पुलिस एडवाइजरी में कहा गया है, ‘आर एस पुरा क्षेत्र में आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में कुछ वाट्सऐप समूहों द्वारा प्रसारित की जा रही कुछ खबरें/ऑडियो अपुष्ट हैं और ज़मीनी स्थिति/रिपोर्टों/जांच से सत्यापित नहीं होती हैं. लोगों को सलाह दी जाती है कि वे उचित सत्यापन/कार्रवाई के लिए सभी संदिग्ध व्यक्तियों/संदिग्ध गतिविधियों के बारे में पुलिस को रिपोर्ट करें.’

इसमें कहा गया है: ‘सोशल मीडिया पर ऐसे असत्यापित संदेशों को अपलोड और फॉरवर्ड करने से आम जनता में दहशत फैलती है. इस तरह की नियमित, असत्यापित रिपोर्टों के माध्यम से आम जनता में दहशत पैदा करने का कोई भी जानबूझकर किया गया प्रयास कानूनी कार्रवाई हो सकती है. क्षेत्र में शांति और सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए पुलिस का सहयोग करें.’