बरेली में 26 सितंबर को जुमे की नमाज़ के बाद मौलाना तौक़ीर रज़ा के आह्वान के बाद ‘आई लव मुहम्मद’ अभियान के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए थे. अनुमति न मिलने के कारण मौलाना ने प्रदर्शन को अंतिम समय में रद्द करने का ऐलान किया, हालांकि लोग एकत्र हुए और प्रदर्शन पुलिस और भीड़ के बीच टकराव में बदल गया.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के बरेली में शुक्रवार (26 सितंबर) को जुमे की नमाज़ के बाद इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख, मौलाना तौकीर रज़ा के आह्वान के बाद ‘आई लव मुहम्मद’ अभियान के समर्थन में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए. लेकिन यह प्रदर्शन पुलिस और भीड़ के बीच टकराव में बदल गया.
पुलिस के मुताबिक, स्थिति अब काबू में है और हिंसा में शामिल कई लोगों को हिरासत में ले लिया गया है. बताया गया है कि बरेली पुलिस ने शनिवार को तौकीर रज़ा को गिरफ्तार कर लिया है.
ख़बरों के अनुसार, अब तक 40 लोगों को हिरासत में लिया गया है और 1,700 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है. प्रशासन के अनुसार, इस झड़प में कम से कम 10 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. सभी का इलाज चल रहा है.
इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल ने 21 सितंबर को शुक्रवार की नमाज़ के बाद इस्लामिया ग्राउंड पर इकट्ठा होकर प्रदर्शन करने की प्रशासन से अनुमति मांगी थी. लेकिन प्रशासन ने इसकी अनुमति नहीं दी.
बताया गया है कि मौलाना तौकीर रज़ा ने प्रशासन की अनुमति न मिलने के कारण इस्लामिया कॉलेज ग्राउंड में होने वाले इस प्रदर्शन को अंतिम समय में रद्द करने का ऐलान किया था. उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे सिर्फ मस्जिदों में नमाज़ पढ़ें और घर लौट जाएं.
पुलिस ने एक बयान जारी कर कहा, ‘इसके बावजूद शुक्रवार को नमाज़ के बाद बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए. पुलिस ने मौके पर लोगों को समझाया, तो अधिकतर लोग चले गए. लेकिन कुछ लोगों ने बीएनएनएस की धारा 163 (अत्यंत आवश्यक हालात में आदेश जारी करने की शक्ति) का उल्लंघन किया और इस्लामिया ग्राउंड की ओर बढ़े. पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन कुछ उपद्रवियों ने पथराव शुरू कर दिया.’
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, पुलिस का कहना है कि ‘भीड़ को काबू में करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा. वीडियो और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर उपद्रवियों की पहचान कर कड़ी कार्रवाई होगी. लोगों से अपील है कि किसी भी अफवाह या भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें.’
तौकीर रज़ा ने जारी किया था बयान
इससे पहले मौलाना रज़ा द्वारा इस प्रदर्शन के रद्द करने की घोषणा करते हुए एक पत्र जारी किया गया, जिसमें लिखा था, ‘इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख हज़रत मौलाना तौकीर रज़ा खान साहिब ने वादा किया था कि ‘आई लव मुहम्मद’ मुद्दे पर वे 26 सितंबर को शुक्रवार की नमाज़ के बाद तय समय पर उचित माध्यमों से भारत के राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेंगे. लेकिन सरकार से अनुमति न मिलने के कारण मौलाना अब यह ज्ञापन स्वयं सौंपेंगे.’
पत्र में कहा गया कि ‘हम भी शहर में शांति और सौहार्द चाहते हैं, इसलिए आपसे सहयोग की अपील है.’
आख़िरी समय में प्रदर्शन के लिए इजाज़त न मिलने की अचानक घोषणा से नाराज़ लोग मौलाना रज़ा के आवास और पास की मस्जिद के बाहर जमा हो गए. पुलिस के मुताबिक, उनके हाथों में ‘आई लव मुहम्मद’ लिखे बैनर थे.
प्रदर्शन से पहले ही प्रशासन ने मौलाना तौकीर रज़ा को नजरबंद कर दिया था. उल्लेखनीय है कि रज़ा बरेलवी संप्रदाय के संस्थापक अहमद रज़ा खान के वंशज हैं और इलाके में उनका काफी प्रभाव है.
सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो में पुलिस को भीड़ को दौड़ाते हुए और ज़मीन पर बिखरे जूते-चप्पल व पोस्टर दिखाई दे रहे हैं.
अधिकारियों ने क्या कहा
बरेली के ज़िलाधिकारी अविनाश सिंह ने कहा, ‘कुछ दिन पहले संगठन ने शुक्रवार को जुलूस निकालकर ज्ञापन देने की अनुमति मांगी थी. हमने साफ कर दिया था कि ऐसी किसी भी गतिविधि के लिए लिखित अनुमति ज़रूरी है क्योंकि पूरे ज़िले में बीएनएसएस की धारा 163 लागू है.’
उन्होंने कहा, ‘अनुमति न मिलने के बावजूद लोग जमा हो गए, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई की. स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है. लोगों से अपील है कि किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें.’
बरेली के डीआईजी एके साहनी ने कहा कि शुरुआती जांच में ‘पूर्व नियोजित साजिश’ के संकेत मिले हैं. उन्होंने बताया, ‘पुलिस लगातार लोगों से शांति की अपील कर रही थी. कई जगह नमाज़ शांति से हुई. लेकिन अचानक कुछ लोग सामने आए और हिंसक गतिविधियां शुरू कर दीं. पथराव और यहां तक कि फायरिंग भी हुई. पूरी घटना की वीडियो और फोटोग्राफिक रिकॉर्डिंग हमारे पास है.’
साहनी ने कहा, ‘शुरुआती जांच से पता चलता है कि यह सोची-समझी योजना थी क्योंकि अचानक बड़ी संख्या में लोग टकराव के लिए तैयार होकर पहुंच गए.’
उन्होंने कहा, ‘शहर में तीन से चार जगहों पर उपद्रव हुआ, जिसमें 10 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए. शुरुआती जांच से यह संकेत मिलता है कि यह पूर्व-नियोजित साजिश थी, क्योंकि अचानक बड़ी संख्या में लोग एक साथ इक्कठा हो गए और टकराव के लिए तैयार नज़र आ रहे थे.’
एक मौलाना भूल गया था कि प्रदेश में किसकी सरकार है: सीएम आदित्यनाथ
बरेली में हुए इस उपद्रव पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी प्रतिक्रिया आई है. बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा कि ‘कल बरेली में एक मौलाना भूल गया था कि उत्तर प्रदेश में किसकी सरकार है. ऐसा सबक सिखाएंगे कि आने वाली पीढ़ी दंगा करना भूल जाएगी.’
मुसलमानों द्वारा बरेली में प्रदर्शन करने को लेकर उन्होंने कहा, ‘कभी-कभी बुरी आदतें जाती नहीं है लोगों की, तो उसके लिए उनकी डेंटिंग पेंटिंग करवानी पड़ती है क़ायदे से, जिससे की हम उनकी बुरी आदतें ठीक कर सके.’
‘आई लव मुहम्मद’ के पोस्टर पर कानपुर से शुरू हुआ विवाद
ज्ञात हो कि कानपुर में 4 सितंबर को बरावफात जुलूस के दौरान सड़क पर ‘आई लव मुहम्मद’ बोर्ड लगाने के आरोप में नौ लोगों और 15 अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ 9 सितंबर को कानपुर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. उसके बाद से देश के विभिन्न हिस्सों में लोग अपने सोशल मीडिया पर ‘आई लव मुहम्मद’ का पोस्ट डालने लगे. और पुलिस ने इन पोस्टरों/पोस्ट के लिए कार्रवाई करना शुरू कर दिया.
इसी कड़ी में 24 सितंबर की देर रात गुजरात के गांधीनगर ज़िले में दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो गई. जिसके बाद 70 लोगों को हिरासत में ले लिया गया.
आई लव मुहम्मद’ स्टेटस लगाने के जवाब में दूसरे पक्ष ने ‘आई लव महादेव’ का स्टेटस डालना शुरू कर दिया. इस दौरान आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया, जिससे विवाद भड़क गया और पहले दो-चार लोगों के बीच शुरू हुई बहस हिंसा में बदल गई.’