जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने ऐलान किया है कि वे बिहार विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे. उन्होंने कहा कि पार्टी ने तय किया है कि उन्हें संगठन को मज़बूत करने और अन्य उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने पर ध्यान देना चाहिए। किशोर ने कहा, ‘मैं पार्टी के फैसले के साथ हूं।’

नई दिल्ली: जन सुराज पार्टी के प्रमुख प्रशांत किशोर ने बिहार विधानसभा चुनाव से कुछ हफ्ते पहले एक बड़ा ऐलान किया है. चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने इस बार चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है. उन्होंने बताया कि यह फैसला उनकी पार्टी के सदस्यों ने लिया है.
एक इंटरव्यू में इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि अगर वे खुद चुनाव लड़ते, तो इससे उनका ध्यान पार्टी को मज़बूत करने से भटक जाता.
प्रशांत किशोर ने कहा कि उनके ऊपर पार्टी के भीतर कई ज़िम्मेदारियां हैं. जब उनसे पूछा गया कि क्या वे चुनाव लड़ना चाहते थे, तो उन्होंने कहा, ‘मैंने चुनाव लड़ने पर विचार किया था, लेकिन पार्टी का फैसला सबसे अहम है और मैं उसके साथ हूं.’
उन्होंने आगे कहा, ‘पार्टी के सदस्यों ने तय किया है कि मुझे पार्टी के अन्य उम्मीदवारों की जीत के लिए काम पर ध्यान देना चाहिए, इसलिए मैं चुनाव नहीं लड़ रहा हूं…’
पिछले साल अक्टूबर 2024 में जन सुराज पार्टी लॉन्च करने वाले प्रशांत किशोर को लेकर अटकलें थीं कि वे वैशाली जिले की राघोपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं, जो राष्ट्रीय जनता दल का गढ़ माना जाता है.
लेकिन मंगलवार (14 अक्टूबर) शाम, जन सुराज पार्टी के नेता चंचल सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर राघोपुर सीट से टिकट मिलने की जानकारी दी. इस घोषणा के साथ ही यह अटकलें लगभग खत्म हो गईं कि प्रशांत किशोर लालू प्रसाद के गढ़ राघोपुर से चुनाव लड़ सकते हैं.
चंचल सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, ‘पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और जन सुराज परिवार का आभारी हूं कि उन्होंने मुझे 128 राघोपुर विधानसभा सीट से उम्मीदवार चुना. मैं क्षेत्र की जनता से स्नेह और आशीर्वाद की अपील करता हूं.’
प्रशांत किशोर ने पहले कहा था कि अगर वे चुनाव लड़ते, तो या तो राघोपुर से या अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र काराकट से लड़ते. जन सुराज की 9 अक्टूबर को जारी सूची में काराकट सीट से किसी अन्य नेता को टिकट दिया गया है.
इंडियन एक्सप्रेस को जन सुराज पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि किशोर के चुनाव नहीं लड़ने के फैसले से पहले पार्टी ने सभी विकल्पों पर विचार किया था. उन्होंने कहा, ‘अगर किशोर चुनाव लड़ते, तो पूरी संगठनात्मक मशीनरी को उस सीट पर अपनी ऊर्जा केंद्रित करनी पड़ती. इसके अलावा, वे जातीय बहस में फंसना नहीं चाहते थे, जो विपक्ष खड़ा कर सकता था.’
जन सुराज पार्टी के नेता ने यह भी बताया कि चुनाव में हार ‘ब्रांड प्रशांत किशोर’ के लिए बड़ा झटका होती, क्योंकि उन्होंने अपनी विशेष पहचान सफल राजनीतिक अभियानों में हिस्सेदारी के जरिए बनाई है.