यूपी: बहराइच पुलिस द्वारा कथावाचक को ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिए जाने पर विवाद, विपक्ष का सरकार पर हमला

बहराइच में कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को यूपी पुलिस के नए रंगरूटों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिए जाने का वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है. डीजीपी राजीव कृष्णा ने परेड ग्राउंड के अनधिकृत उपयोग पर एसपी से स्पष्टीकरण मांगा है, जबकि विपक्ष ने इसे संविधान पर हमला बताया है.

नई दिल्ली: बहराइच में एक कथावाचक (धार्मिक उपदेशक) को गार्ड ऑफ ऑनर देते हुए यूपी पुलिस के नए रंगरूटों का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्णा ने पुलिस परेड ग्राउंड के अनाधिकृत उपयोग के लिए जिला पुलिस अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा.

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, यूपी पुलिस ने गुरुवार (18 दिसंबर) शाम सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, यह स्पष्ट किया जाता है कि पुलिस परेड ग्राउंड का उपयोग निर्धारित नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए. और यह केवल पुलिस प्रशिक्षण, अनुशासन और आधिकारिक समारोहों के लिए ही होना चाहिए. इन निर्धारित नियमों के उल्लंघन के मद्देनजर, संबंधित पुलिस अधीक्षक से स्पष्टीकरण मांगा गया है.
इससे पहले दिन में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और आज़ाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने भी पुलिसकर्मियों द्वारा एक कथावाचक का लाल कालीन पर स्वागत, परेड और सलामी दिए जाने को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी.

इस मामले के तूल पकड़ने के तुरंत बाद बहराइच पुलिस ने इस आयोजन का बचाव करते हुए एक बयान जारी किया. इसमें बहराइच पुलिस की ओर से कहा गया कि आचार्य पुण्डरीक गोस्वामी को भर्ती होने वाले जवानों के लिए परामर्श, ध्यान और योग कार्यशालाओं के आयोजन के लिए आमंत्रित किया गया था, क्योंकि 28 जवानों ने पुलिस प्रशिक्षण के दौरान कठोर मानसिक और शारीरिक तनाव के कारण अवसाद का हवाला देते हुए इस्तीफा दे दिया था.

कथित वीडियो में उपदेशक का बहराइच के पुलिस अधीक्षक आर.एन. सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा लाल कालीन बिछाकर स्वागत करते हुए दिखाया गया है. वीडियो में गोस्वामी को एसपी के बगल में खड़े होकर नए रंगरूटों से सलामी लेते हुए भी देखा जा सकता है.

बताया जाता है कि यह बुधवार का मामला है. इसे लेकर भारतीय जनका पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार बेलगाम अपराध और फलते-फूलते माफिया शासन के बीच सलामी के खेल में व्यस्त है.
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई इस मामले का संज्ञान लेगा.

लोकसभा सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने इस घटना को संविधान पर हमला बताते हुए कहा, ‘एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा परेड और सलामी दी जाती है-यह सिर्फ़ एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि संविधान पर खुला हमला है.’
चंद्रशेखर आज़ाद ने आग कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तथाकथित रामराज्य में अब हालात ये हैं कि आस्था को संविधान से ऊपर, धर्म को कानून से ऊपर और कथावाचकों को संवैधानिक पदों से ऊपर बैठाया जा रहा है. यह घटना बताती है कि उत्तर प्रदेश का प्रशासन अब संविधान के प्रति जवाबदेह नहीं, बल्कि धार्मिक सत्ता के आगे नतमस्तक है. यह एक ख़तरनाक परंपरा की ओर इशारा करता है, जहां राज्य धीरे-धीरे अपने संवैधानिक चरित्र को त्याग रहा है.