महाघोटाला: MP में मुर्दे भी हो रहे हैं ‘पुनर्जीवित’, फिर कागजों पर कत्ल कर डकारे जा रहे लाखों रुपये! सीधी.

महाघोटाला: MP में मुर्दे भी हो रहे हैं ‘पुनर्जीवित’, फिर कागजों पर कत्ल कर डकारे जा रहे लाखों रुपये!
​रामपुर नैकिन में संबल योजना का खौफनाक सच; नागपुर में मरा युवक, 14 दिन बाद कार्ड बना और फिर से मारकर निकाल लिए 2 लाख.

​मंगल भारत सीधी। मनोज द्विवेदी:मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के ‘जिन्नातों’ ने अब यमराज को भी चुनौती दे दी है। मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी ‘संबल योजना’ में एक ऐसा कंकाल निकला है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता की धज्जियां उड़ा दी हैं। सीधी जिले के रामपुर नैकिन जनपद में एक युवक की लाश को कागजों पर दो बार “पैदा” और दो बार “दफन” किया गया, ताकि सरकारी खजाने से ₹2 लाख की डकैती डाली जा सके।
​शतरंज की बिसात जैसा ‘डेथ गेम’
​इस पूरे फर्जीवाड़े की क्रोनोलॉजी समझिए, जो किसी बॉलीवुड थ्रिलर फिल्म से कम नहीं है:
​पहली मौत (सच्चाई): कुंदन कुमार द्विवेदी की मौत 09 अगस्त 2024 को नागपुर इतवारी ट्रेन में होती है। पूरा परिवार और गांव इस बात का गवाह है।
​मुर्दे का आवेदन: जब कुंदन की राख ठंडी भी नहीं हुई थी, तब 23 अगस्त 2024 को भ्रष्ट तंत्र ने मृत कुंदन के नाम पर संबल कार्ड का आवेदन पोर्टल पर दर्ज कर दिया।
​सिस्टम का चमत्कार: सरकारी फाइलें बिजली की गति से दौड़ीं और मृत व्यक्ति का संबल कार्ड बन गया।
​दूसरी मौत (साजिश): योजना का पैसा हड़पने के लिए कुंदन को कागजों पर फिर से जिंदा किया गया और 12 सितंबर 2024 को ग्राम पंचायत बुढगौना में उसकी “दोबारा मौत” दिखाई गई।
​सीईओ, सरपंच और सचिव की ‘त्रिमूर्ति’ का कारनामा
​यह महज एक मानवीय चूक नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध (Organized Crime) है। बिना जनपद पंचायत रामपुर नैकिन के सीईओ (CEO) की लॉगिन आईडी और ग्राम पंचायत के सरपंच, सचिव व सहायक सचिव की मिलीभगत के, एक मृत व्यक्ति का कार्ड बनना और फिर फर्जी मृत्यु दिनांक पर भुगतान होना नामुमकिन है। यह सीधे तौर पर सरकारी धन की चोरी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मामला है।
​”क्या मध्य प्रदेश का प्रशासन इतना अंधा हो चुका है कि उसे नागपुर में हुई मौत और ग्राम पंचायत के फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के बीच का अंतर समझ नहीं आया? या फिर कमीशन के खेल में ऊपर से नीचे तक सबकी जेबें गर्म की गई हैं?”
​प्रदेश स्तर पर उठ रहे गंभीर सवाल:
​जांच का विषय: क्या संबल पोर्टल की सुरक्षा में सेंध लगी है या जानबूझकर बैक-डेट में एंट्री की गई?
​अधिकारियों की भूमिका: जनपद सीईओ ने सत्यापन (Verification) की प्रक्रिया को दरकिनार क्यों किया?
​वसूली और जेल: क्या सरकार इन दोषियों के घर पर बुलडोजर चलाएगी या सिर्फ कारण बताओ नोटिस देकर फाइल दबा दी जाएगी?
​बड़ी मांग: FIR और तत्काल बर्खास्तगी
​इस घोटाले के उजागर होने के बाद अब गेंद भोपाल के आला अधिकारियों और पंचायत मंत्री के पाले में है। मांग की जा रही है कि कुंदन कुमार द्विवेदी के नाम पर किए गए इस गबन की SIT जांच हो और जनपद सीईओ समेत पूरी पंचायत टीम पर IPC (अब BNS) की धाराओं के तहत धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए.