क्रिसमस को लेकर दक्षिणपंथी संगठनों का बवाल, कहीं हाथापाई तो कहीं कार्यक्रम रद्द किए गए

बीते कुछ दिनों से क्रिसमस को लेकर दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों द्वारा विरोध देखने को मिल रहा है. जहां हरिद्वार के एक होटल में क्रिसमस से जुड़ा आयोजन रद्द किया गया, वहीं जबलपुर की एक चर्च में जबरन घुसपैठ कर धर्मांतरण का आरोप लगाया गया. सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक व्यक्ति ओडिशा में सैंटा क्लॉज़ कैप बेच रहे विक्रेता को प्रताड़ित करते दिख रहा है.

नई दिल्ली: आगामी 25 दिसंबर को देश-विदेश में ईसाई समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला सबसे बड़ा त्यौहार क्रिसमस दस्तक देने को है. ऐसे में इस बार इस आयोजन को लेकर बीते कुछ दिनों से दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों द्वारा कई जगह पर बवाल देखने को मिल रहा है.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा तट पर उत्तर प्रदेश पयर्टन विभाग के एक होटल में क्रिसमस के पर्व पर आयोजित किया जाने वाला कार्यक्रम हिंदू संगठनों के कड़े विरोध के बाद रद्द कर दिया गया.

होटल भागीरथी के प्रबंधन ने सोमवार (22 दिसंबर) को बताया कि क्रिसमस के पर्व पर 24 दिसंबर को होटल में बच्चों के लिए आयोजित होने वाला कार्यक्रम हिंदू संगठनों के विरोध पर रद्द कर दिया गया.

मालूम हो कि होटल में क्रिसमस के मौके पर कार्यक्रम की बात सोशल मीडिया पर प्रचारित होते ही हिंदू संगठनों ने उसका विरोध करना शुरू कर दिया था.

हरिद्वार में हर की पौड़ी तथा आसपास के गंगा घाटों का प्रबंधन करने वाली श्री गंगा सभा के पदाधिकारी उज्जवल पंडित ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर गंगा किनारे क्रिसमस के आयोजन को बर्दाश्त नहीं किए जाने की चेतावनी देते हुए आयोजकों से कार्यक्रम को तत्काल रद्द करने को कहा था.

इस संबंध में गंगा सभा के सेवक दल सचिव पंडित ने कहा था, ‘गंगा के तट पर विदेशी संस्कृति के आयोजनों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यह आयोजन हरिद्वार की धार्मिकता और गंगा की गरिमा के साथ खिलवाड़ है. क्रिसमस का हमारे हिंदू धर्म से कोई लेना देना नहीं है.’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने भी गंगा तट पर क्रिसमस के आयोजन का विरोध किया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई से संघ के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख पदमजी ने कहा कि चाहे वह उत्तर प्रदेश पयर्टन विभाग हो अथवा कोई और संस्था, सभी को हरिद्वार की धार्मिक मान्यताओं , परंपराओं और गरिमा का पालन करना चाहिए.

उन्होंने कहा, ‘हरिद्वार गंगा की नगरी है, देव भूमि है और यहां हिंदू संस्कृति के अनुरूप मान्यताएं और परंपराएं चली आ रही है, जिन्हें बिगाड़ने का किसी को भी अधिकार नहीं है.’

हालांकि, इस बारे में होटल भागीरथी के प्रबंधन ने विदेशी संस्कृति के अनुरूप किसी भी कार्यक्रम के आयोजन से इनकार किया और कहा कि क्रिसमस के मौके पर ऐसा कोई आयोजन नहीं किया जाने वाला, जो हरिद्वार, हिंदू संस्कृति और उसकी मर्यादाओं के विरूद्ध हो.
होटल के संचालक नीरज गुप्ता ने बताया, ‘हम होटल में क्रिसमस से संबंधित किसी कार्यक्रम का आयोजन नहीं कर रहे थे. होटल के रिसेप्शन पर ‘क्रिसमस ट्री’ जरूर सजाया गया था लेकिन इस मौके पर बच्चों के लिए खेल कार्यक्रम किए जाने थे.’

गुप्ता ने कहा कि वैसे भी हरिद्वार की परंपरा को देखते हुए होटल में मांसाहारी भोजन या कॉकटेल आदि प्रतिबंधित किया हुआ है.

उन्होंने कहा कि हिंदू संगठनों के विरोध पर अब होटल में बच्चों के लिए आयोजित कार्यक्रमों को रद्द कर दिया गया है और इस अवसर पर गंगा तट पर केवल भव्य आरती का ही आयोजन किया जाएगा.

मध्य प्रदेश में बवाल

इसी कड़ी में क्रिसमस से ठीक पहले मध्य प्रदेश के जबलपुर में चर्चों को लेकर जो घटनाएं सामने आई हैं, उससे पूरे राज्य में तनाव का माहौल बन गया है. धर्मांतरण के आरोप, चर्च परिसरों में जबरन घुसपैठ, वायरल वीडियो और पुलिस कार्रवाई- इन सबने इस मामले को बेहद संवेदनशील बना दिया है

इस पूरे मामले ने सोमवार को उस समय तूल पकड़ा, जब जबलपुर के हवाबाग महिला कॉलेज के पीछे स्थित एक चर्च में दक्षिणपंथी संगठनों के कुछ सदस्य अचानक पहुंच गए. उनके साथ भारतीय जनता पार्टी की जिला उपाध्यक्ष अंजू भार्गव भी मौजूद थीं. आरोप लगाया गया कि वहां दृष्टिबाधित छात्रों को जबरन ईसाई धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.

चर्च के अंदर बहस शुरू हुई और देखते ही देखते हालात तनावपूर्ण हो गए. इसी दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसमें अंजू भार्गव एक दृष्टिबाधित महिला से बहस और हाथापाई करती नजर आईं. यही वीडियो पूरे विवाद का केंद्र बन गया.

इस मामले को लेकर पुलिस की शुरुआती जांच में बताया गया कि चर्च में आए दृष्टिबाधित छात्र क्रिसमस से जुड़े एक चैरिटी कार्यक्रम के तहत लंच और प्रार्थना के लिए बुलाए गए थे. छात्रों ने साफ कहा कि उन्हें किसी भी तरह से धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर नहीं किया गया.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि फिलहाल जबरन धर्मांतरण का कोई सबूत नहीं मिला है और सभी छात्रों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं.

ओडिशा में सेंटा क्लॉज की टोपी बेच रहे लोगों को प्रताड़ित किया गया

एक अन्य मामले में ओडिशा से एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति सड़क किनारे सैंटा क्लॉज की कैप (टोपी) बेच रहे लोगों को प्रताड़ित करते दिखाई दे रहे हैं.

वीडियो में पीले कपड़े पहने एक व्यक्ति कार से उतरते हैं और सड़क के किनारे लाल-सफेद टोपी बेच रहे लोगों से अपना सामान उठाने को कहते हैं.

वीडियो में कार में सवार व्यक्ति टोपी विक्रेता से पूछते हैं कि तुम कहां से आए हो और आधार कार्ड दिखाने को कहते हैं. विक्रेता खुद को राजस्थान का बताते हैं. इसके बाद गाड़ी में सवाल व्यक्ति कहते हैं कि ये हिंदू राष्ट्र है, यहां ये सब क्रिश्चियन नहीं चलेगा.

वह आगे कहते हैं कि अगर गरीब हो तो जगन्नाथ का सामान बेचो, ये सब नहीं चलेगा. इसके बाद उन विक्रेता से बचने की अनुमति के कागज भी दिखाने को कहा जाता है.

गौरतलब है कि इससे पहले विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने हिंदू समाज से ‘सांस्कृतिक सजगता’ के नाम पर क्रिसमस जैसे धार्मिक उत्सव न मनाने की अपील की है. संगठन ने इसे धर्म और परंपरा के संरक्षण से जोड़ते हुए न सिर्फ आम लोगों, बल्कि दुकानदारों, शॉपिंग मॉल्स और स्कूलों को भी निशाने पर लिया है.
विहिप के इंद्रप्रस्थ प्रांत मंत्री सुरेंद्र गुप्ता द्वारा 13 दिसंबर को जारी एक आह्वान पत्र में कहा गया है कि वर्तमान समय में हिंदू समाज को आत्मसंयम और आत्मसम्मान के साथ धार्मिक आचरण करना चाहिए. पत्र में यह दावा किया गया है कि देश के विभिन्न हिस्सों में ‘संगठित रूप से धर्म परिवर्तन के प्रयास’ लंबे समय से सक्रिय हैं और ऐसे में अन्य धर्मों के उत्सवों में भागीदारी से उन्हें सामाजिक स्वीकार्यता मिल सकती है.