टैलेंट हंट के लिए नियुक्तियों पर विवाद

एमपी कांग्रेस में घमासान: मुकेश नायक का इस्तीफा, जीतू ने अस्वीकारा
भोपाल/मंगल भारत

मध्य प्रदेश कांग्रेस में पॉवर दिखाने की प्रथा ने उसकी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में जब भी एकता बनाने बड़ी बैठकें होती है, तभी कोई न कोई ऐसा घटनाक्रम सामने आ जाता है, जो पार्टी के संगठनात्मक ढांचे पर ही सवाल खड़ा कर देता है। जानकार प्रदेश कांग्रेस के मीडिया प्रभारी मुकेश नायक के इस्तीफे की पेशकश को इसी रूप में देख रहा है। दरअसल कांग्रेस के प्रदेश मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने शनिवार को यह कहते हुए अपने पद से इस्तीफा पीसीसी चीफ जीतू पटवारी को भेज दिया कि युवाओं को मौका दिया जाए। इसके उपरांत पटवारी ने उनका इस्तीफा अस्वीकार कर दिया। लेकिन इस घटनाक्रम ने कई तरह की बातों को हवा दे दी।
कांग्रेस की राजनीति पर नब्ज रखने वालों का कहना है कि पूर्व मंत्री मुकेश नायक का इस इस्तीफे के पीछे टैलेंट हंट के लिए की गई नियुक्तियां है। बताया गया है कि प्रदेश में प्रवक्ताओं की नियुक्तियां टैलेंट हंट के जरिए करने के लिए 9 दिसंबर को कांग्रेस के संगठन प्रभारी संजय कामले ने 11 सदस्यीय कमेटी गठित की थी। इस सूची में मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक का नाम ही नहीं था और कम्युनिकेशन और मीडिया विभाग के प्रभारी अभय तिवारी इस लिस्ट में अध्यक्ष बनाया दिया गया। इसके बाद 23 दिसंबर मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने भी दूसरी सूची जारी की। इसमें अभय तिवारी को संयोजक और विधायक आरिफ मसूद को सह संयोजक बनाया था। नायक ने टैलेंट हंट के लिए नेताओं को कलस्टर वार जिम्मेदारियां दी थीं। बताया गया है कि मुकेश नायक की इस लिस्ट पर 26 दिसंबर को अभय तिवारी ने पत्र जारी कर आपत्ति जताई। इसके एक दिन बाद ही 27 दिसंबर को मुकेश नायक ने इस्तीफा दे दिया।
नायक ने इस्तीफे में लिखा नए लोगों के लिए जगह खाली करना चाहिए, वर्ष एक बेहद मेहनती ईमानदार, सक्षम अध्यक्ष के साथ काम करने का अनुभव दो अच्छा रहा। मेरी अनन्य शुभकामनाएं। हालांकि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने नायक के इस्तीफे को सिरे से खारिज कर दिया। बताया गया है कि दोनों नेताओं के बीच चर्चा भी हुई है, जिसमें नायक ने अपने मन की बात से पटवारी को अवगत कराते हुए साफ कहा है कि उनकी वरिष्ठता का ध्यान नहीं दिया जाएगा, तो उनके पद पर रहने का कोई औचित्य नहीं है। इस पर पटवारी नायक को संतुष्ट करते हुए उनसे अपना दायित्व निभाते रहने को कहा है। जानकारों का कहना है कि कम्युनिकेशन प्रभारी अभय तिवारी ने मुकेश नायक के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके पीछे उनका तर्क था कि टैलेंट हंट कार्यक्रम किसी विभाग के अंतर्गत नहीं है। ऐसे में मुकेश नायक को नियुक्ति करने का हक नहीं है। अगर दोनों नेताओं पर नजर डाले तो राजनीति में अभय तिवारी मुकेश नायक से बहुत जूनियर हैं। नायक मंत्री रहे हैं, जबकि तिवारी आईटी जानकार है, उन्होंने अब तक कोई चुनाव भी नहीं लड़ा है। लेकिन तिवारी ने नायक द्वारा की गई नियुक्तियों पर एतराज जता दिया। सूत्रों की मानें तो यही बात नायक को खटक गई और उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
यह पहला मामला नहीं
दरअसल प्रदेश कांग्रेस में इस तरह का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने संगठन मंत्रियों की नियुक्ति की थी, जिस पर प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने एतराज जताया था और उन सभी नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। हालांकि बाद में पटवारी ने अपनी साख बचाने के लिए संगठन मंत्री बनाए गए कार्यकर्ताओं को जिलों का कार्यालय प्रभारी बना दिया गया । इस घटनाक्रम पर भी जमकर चर्चा हुई थी और इसे नेताओं में पॉवर दिखाने के तरीके से जोड़ा गया था। जानकारों का कहना है कि मुकेश नायक और अभय तिवारी के मामला भी कुछ ऐसा ही है। दरअसल अभय तिवारी पीसीसी चीफ पटवारी के करीबी माने जाते है, ऐसे में उन्होंने एक संदेश देकर यह जता दिया कि उनके बिना मर्जी के किसी भी तरह की नियुक्तियां नहीं की जाएगी, तो प्रदेश मीडिया प्रभारी मुकेश नायक ने अपना इस्तीफा देकर यह संदेश दे दिया कि पार्टी में किसी भी जूनियर की मनमानी नहीं चलने दी जाएगी।