सुप्रीम टिप्पणी- पति का पत्नी पर आर्थिक प्रभुत्व नहीं माना जाएगा क्रूरता

सुप्रीम टिप्पणी- पति का पत्नी पर आर्थिक प्रभुत्व नहीं माना जाएगा क्रूरता

वैवाहिक विवादों से जुड़े मामलों में एक अहम टिप्पणी करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पति का पत्नी पर आर्थिक या वित्तीय प्रभुत्व अपने आप में क्रूरता की श्रेणी में नहीं आता। शीर्ष अदालत ने कहा-आपराधिक मुकदमेबाजी को निजी बदले या हिसाब चुकता करने का जरिया नहीं बनने दिया जा सकता। यह टिप्पणी अदालत ने एक ऐसे मामले में की, जहां पति के खिलाफ कू्ररता और दहेज उत्पीडऩ का केस दर्ज कराया गया था। न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने पति की अपील स्वीकार करते हुए उसके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया। इससे पहले तेलंगाना हाईकोर्ट ने एफआईआर रद्द करने से इंकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले को पलटते हुए कहा कि लगाए गए आरोप कानूनी कसौटी पर खरे नहीं उतरते। पीठ ने कहा-पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों में पति का आर्थिक प्रभुत्व जरूर बताया गया है, लेकिन इससे किसी ठोस मानसिक या शारीरिक नुकसान का प्रमाण नहीं मिलता। भारतीय समाज में अक्सर घरों में पुरुष वित्तीय मामलों में नियंत्रण रखते हैं, लेकिन केवल इसी आधार पर आपराधिक क्रूरता का केस नहीं बनता। खर्च का हिसाब मांगना या पैसों के उपयोग की जानकारी लेना अपने आप में क्रूरता नहीं है।

छग शराब घोटाला: पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे को मिली जमानत
छत्तीसगढ़ में हुए करोड़ों रुपए के शराब घोटाले से जुड़े केस में पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को बड़ी राहत मिली है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है। यह जमानत प्रवर्तन निदेशालय और आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज केसों में दी गई है। अदालत के इस फैसले के बाद चैतन्य बघेल को कानूनी स्तर पर राहत मिली है। चैतन्य बघेल का नाम राज्य के शराब घोटाले से जोड़ा गया था। आरोप है कि इस घोटाले में बड़े स्तर पर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाया गया। इसी सिलसिले में ईडी और ईओडब्ल्यू ने अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। इन केस में जांच के दौरान चैतन्य बघेल से पूछताछ भी की गई थी। अब हाईकोर्ट ने दोनों ही एजेंसियों के मामलों में उन्हें जमानत देने का आदेश दिया है।
तेलंगाना में नक्सली संगठन को बड़ा झटका… टॉप लीडर बरसा देवा उर्फ सुक्का सरेंडर!
तेलंगाना में नक्सली संगठन को एक और बड़ा झटका लगा है। नक्सली पार्टी के टॉप लीडर और लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की वांछित सूची में शामिल 50 लाख रुपए के इनामी बरसा देवा उर्फ सुक्का ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। यह सरेंडर ऐसे समय में सामने आया है, जब चार राज्यों में फैले नक्सली नेटवर्क पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अभी तक तेलंगाना पुलिस की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन स्थानीय वरिष्ठ अधिकारियों और खुफिया तंत्र से जुड़े विश्वसनीय सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है। बरसा देवा पहले से ही पुलिस की हिरासत में था और बीते कुछ दिनों से उससे पूछताछ की जा रही थी। उसने चार राज्यों छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में से किस राज्य में सरेंडर किया जाए, इस पर काफी लंबे समय तक मंथन किया। आखिरकार अंतिम निर्णय के बाद उसे कोठागुडेम जिला पुलिस की एस्कॉर्ट में लाया गया, जहां उसने औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण किया। शनिवार को आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने जारी किया ड्राफ्ट, शर्त के साथ गिग वर्कर को मिलेगी खास सुरक्षा
सही सैलरी, बेहतर काम करने की स्थिति और सोशल सिक्योरिटी की मांग को लेकर क्रिसमस और नए साल पर हड़ताल पर रहे गिग वर्करों के लिए एक अच्छी खबर है। केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने सोशल सिक्योरिटी कोड (सेंट्रल) रूल्स, 2025 नाम से ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं, जिसमें गिग वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी और रजिस्ट्रेशन देने की बात कही गई है। स्वास्थ्य, जीवन और व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा जैसे सुरक्षा फायदे के लिए गिग वर्कर्स को कम से कम 90 दिनों तक एक ही एग्रीगेटर के साथ काम करना होगा। अगर वह एक से ज्यादा एग्रीगेटर्स के साथ काम करता है तो पिछले फाइनेंशियल ईयर में कुल मिलाकर 120 दिन का काम पूरा किया हो। एक वर्कर को उस दिन से एग्रीगेटर के साथ जुड़ा हुआ माना जाएगा, जिस दिन से वह कमाई करना शुरू करता है। चाहे कमाई की रकम कितनी भी हो। जिस भी कैलेंडर दिन इनकम कमाई जाएगी, वह एलिजिबिलिटी के लिए गिना जाएगा।