पानी के लिए लोन लिया, पर सरकार त्रासदी के बाद जागी

इंदौर में दूषित पानी से मौत को लेकर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने शनिवार को प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्हें सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा कि इंदौर में गंदा पानी पीने से अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। जबकि इंदौर और भोपाल में सप्लाई किए जा रहे गंदे और दूषित पानी की बात कैग ने 2019 में ही कही थी, और उसे ठीक करने के सुझाव भी दिए थे। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 2004 में एशियन डेवलपमेंट बैंक से चार बड़े शहरों भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में पानी के प्रबंधन के लिए 200 मिलियन डॉलर, तब 906.4 करोड़ रुपये का कर्ज 25 साल के लिए लिया था। यह पैसा शहरों में पानी की आपूर्ति को बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता सुधारने के लिए था। प्रोजेक्ट के अनुसार हर किसी को पर्याप्त और साफ पानी मुहैया कराने का लक्ष्य रखा गया था। कर्ज लेने के लगभग 15 साल बाद भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, कैग ने 2019 में भोपाल और इंदौर के पानी प्रबंधन पर रिपोर्ट जारी की।
आईपीएस मीट 16 जनवरी से, तैयारियों में जुटा महकमा
हर बार की तरह इस बार भी आईपीएस मीट का आयोजन होने जा रहा है। आयोजन की तिथि आगामी 16 और 17 जनवरी निर्धारित की गई है। पुलिस महकमा पूरे जोर-शोर के साथ आईपीएस मीट की तैयारियों में जुट गया है। आईपीएस ऐसोसिएशन की ओर से दो दिवसीय मीट का आयोजन कराया जाता है। आईपीएस मीट में सडक़ सुरक्षा, साइबर क्राइम, स्मार्ट पुलिसिंग और क्राइम कंट्रोल सहित अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर पुलिस अफसरों की चर्चा होगी। इसके अलावा दो दिन होने वाले इस आयोजन में पुलिस अफसर अपने परिवार के साथ खेल और सांस्कृतिक आयोजन सहित अन्य गतिविधियों में सहभागी बनेंगे। आईपीएस मीट में विशिष्ट विषयों पर चर्चा के लिए रिटायर्ड पुलिस अधिकारियों और विषय विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया जाएगा।
फॉर्मेसी आवेदन प्रक्रिया हुई डिजिटल, दो हजार आवेदकों को घर बैठे लाइसेंस मिला
मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल की सभी प्रक्रियाओं को डिजिटल कर दिया गया है। इससे न केवल फार्मासिस्ट पंजीकरण और नवीनीकरण की प्रक्रिया आसान हुई है, बल्कि पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही भी सुनिश्चित हुई है। शनिवार को फार्मेसी काउंसिल की समीक्षा के बाद उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा कि मध्य प्रदेश फार्मेसी काउंसिल द्वारा प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण राज्य सरकार की डिजिटल गवर्नेस और नागरिक केन्द्रित सेवा व्यवस्था को सशक्त करता है। उन्होंने कहा कि परिषद ने मैनुअल और विवेकाधीन प्रणाली से आगे बढ़ते हुए नियम-आधारित, स्वचालित और तकनीक संचालित व्यवस्था को अपनाया है। इससे न केवल फार्मासिस्टों को सुविधा मिली है, बल्कि एक मजबूत और विश्वसनीय डिजिटल डेटाबेस भी तैयार हुआ है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि मप्र सरकार नागरिक सेवाओं को सरल सहज बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जा रहा है। राज्य शासन की मंशानुसार मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल ने अपनी सभी प्रक्रियाओं का डिजिटलीकरण किया गया है।
नकली खाद पर दिग्विजय सिंह का मुख्यमंत्री को पत्र
राज्यसभा सांसद एवं प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राजग जिले में नकली खाद बेचे जाने के मामले में कृषि विभाग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा है कि उनके गृह जिले में खाद की कालबाजारी की जा रही है और सिंगल सुपर फास्फेट में भारी मात्रा में रेत मिली हुई पाई गई है, जिससे फसलों को गंभीर नुकसाने की आशंका है। उन्होंने इस संबंध में कृषि विभाग के द्वारा खाद विक्रेता पर कराई गई एफआईआर को नाकाफी बताते हुए इस खाद की सप्लाई करने वाली कंपनी पर भी सख्त कारर्रवाई की मांग उठाई है। उन्होंने इस मामले में विभाग द्वारा धीमी गति से की जा रही कार्रवाई पर भी सवाल खड़े करते हुए सीएम से इस मामले पर संज्ञान लेने का आग्रह किया है। उन्होंने नकली खाद खरीदने वाले किसानों को मुआवजा देने की भी मांग सीएम से की है।