ठाकरे बंधुओं पर शिंदे का करारा हमला, कहा- मराठी मानूस के प्रति उनका प्रेम दिखावटी

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शनिवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ठाकरे भाइयों का ‘मराठी मानूस’ के प्रति प्रेम दिखावटी है और उनकी असली दिलचस्पी पैसों से भरपूर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) पर कब्जा जमाने में है। सेंट्रल मुंबई के वर्ली में महायुति की रैली को संबोधित करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा कि मुंबई का अगला मेयर मराठी ही होगा। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के बयान को दोहराते हुए कहा कि भाजपा और शिवसेना मिलकर नगर निगम चुनाव लड़ रही हैं। एकनाथ शिंदे ने शिवसेना (यूबीटी) नेता आदित्य ठाकरे और एमएनएस नेता अमित ठाकरे पर भी निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि जब ठाकरे सत्ता में थे, तब उनका विजन कहां था। शिंदे ने आरोप लगाया कि वर्षों तक इन लोगों ने केवल पैसा कमाया और मुंबई को लूटा। उन्होंने कहा कि 2017 से पहले लंबे समय तक नगर निगम पर उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली अविभाजित शिवसेना का कब्जा रहा, लेकिन जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया। अब हार के बाद वे विजन स्टेटमेंट की बात कर रहे हैं। इस दौरान एकनाथ शिंदे ने ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिन योजना’ का बचाव करते हुए कहा कि इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये मिलते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस योजना की आलोचना करने वाले अब खुद वैसी ही योजनाएं घोषित कर रहे हैं।
दक्षिण अमेरिकी देशों पर कब्जे की तैयारी में ट्रंप? वेनेजुएला के बाद क्यूबा को भी धमकी
वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने के बाद अब अमेरिका की ट्रंप सरकार के हौसलें बुलंद हैं और अब वे दक्षिण अमेरिका के अन्य देशों को भी धमकाने पर उतर आए हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने क्यूबा के नेता को चेतावनी देते हुए कहा कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति की गिरफ्तारी के बाद अगर मैं क्यूबा की सरकार में होता तो यकीनन मुझे चिंता होती। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, क्यूबा पूरी तरह से तबाह है। इसे पूरी तरह से अयोग्य सरकार और इसे एक वृद्ध व्यक्ति द्वारा चलाया जा रहा है। इसकी कोई अर्थव्यवस्था नहीं बची है। यह पूरी तरह से तबाह देश हैं। मादुरो की सुरक्षा में लगे सभी गार्ड भी क्यूबा के थे। क्यूबा ने कुछ मामलों में वेनेजुएला पर कब्जा किया हुआ है। क्यूबा ने वेनेजुएला को अपनी कालोनी बनाने की कोशिश की। अगर हम सुरक्षा के लिहाज से देखें तो अगर मैं हवाना में रह रहा होता और मैं सरकार में होता तो में घटनाक्रम से थोड़ा चिंतित तो जरूर होता। अमेरिका और क्यूबा के बीच रिश्ते दशकों से तनावपूर्ण हैं।
आम्रपाली की 99 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति कुर्क, मुंबई के ठिकाने शामिल
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली समूह पर शिकंजा कसते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उसकी 99.26 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की है। ये संपत्तियां कोलकाता, फरीदाबाद व मुंबई में हैं। ईडी अब तक समूह की 300 करोड़ की संपत्ति कुर्क कर चुका है। ईडी के मुताबिक, जो संपत्तियां कुर्क की गई हैं, उनमें मेसर्स मौर्या उद्योग लि. का कार्यालय और फैक्टरी की जमीन है। सुरेका समूह की संस्थाओं में शामिल इस कंपनी का एक भवन भी है। इसके प्रमोटर नवनीत सुरेका और अखिल सुरेका हैं। इन संपत्तियों का कुल उचित बाजार मूल्य 30 दिसंबर, 2016 तक 99.26 करोड़ रुपये आंका गया था। अभी कीमत और भी अधिक होगी। ईडी की जांच में खुलासा हुआ था कि आम्रपाली समूह ने ग्राहकों से भारी रकम ली थी, लेकिन तय समय में फ्लैट, जमीन देने में नाकाम रहे थे। समूह ने धोखाधड़ी कर ग्राहकों की रकम गबन कर ली थी। कई थानों में केस दर्ज किए गए थे। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था।
कोर्ट ने कहा- जांच पूरी करने की समयसीमा तय करना अपवाद…, बढ़ाने से हो सकती है समस्या
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतें जांच एजेंसियों के लिए जांच पूरी करने को लेकर समयसीमा एहतियात के तौर पर नहीं, बल्कि तभी तय करती हैं जब जांच में बहुत ज्यादा देरी होने लगे। उससे लोगों को नुकसान होने का खतरा पैदा हो जाए। यह समयसीमा नियम नहीं बल्कि अपवाद है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एनके सिंह की पीठ ने ये टिप्पणियां इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश पर गौर करते हुए कीं। हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को दस्तावेजों में हेरफेर कर शस्त्र लाइसेंस प्राप्त करने के एक मामले में जांच पूरी करने के लिए 90 दिन का समय दिया था और आरोपी को किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण प्रदान किया था। पीठ ने कहा, समय-सीमाएं तब तय की जाती हैं जब देरी के कारण समस्या पैदा हो रही हो, न कि केवल इस आधार पर कि भविष्य में समस्या हो सकती है। पीठ ने शीर्ष अदालत के पिछले फैसलों का विश्लेषण करते हुए यह भी कहा कि अदालतों ने लगातार यह माना है कि समयबद्ध जांच का निर्देश देना नियम नहीं, बल्कि अपवाद होना चाहिए।