मप्र को हाई-वैल्यू सेक्टरों का फायदा नहीं मिला

मप्र ने पिछले दो साल में निवेश का कीर्तिमान स्थापित किया है। मप्र तेजी से उभरते हुए औद्योगिक और निवेश हब के रूप में स्थापित हो रहा है। मप्र के लिए साल 2025 स्टार्टअप, निवेश और औद्योगिक सुधार के लिहाज से ऐतिहासिक और निर्णायक साल के रूप में दर्ज हो गया। बीते एक साल में राज्य में निवेश के लिए बड़े शहरों के अलावा दूसरे जिलों में भी रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए गए। भोपाल, इंदौर के अलावा सागर, रीवा, जबलपुर, रतलाम, शहडोल जैसे शहरों में भी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए गए। निवेश के क्षेत्र में साल 2025 की सबसे बड़ी उपलब्धि भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस-2025) रहा। इस समिट में करीब 26.61 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। साल के जाते-जाते ग्वालियर में भी अभ्युदय एमपी ग्रोथ समिट आयोजित की गई। लेकिन इतनी सारी उपलब्धियों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर मप्र निवेश में पीछे हैं।
गौरतलब है कि भोपाल में फरवरी 2025 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (जीआईएस) में राज्य सरकार ने 30.77 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिलने का दावा किया था। इसे राज्य की निवेश क्षमता और औद्योगिक संभावनाओं के संकेत के रूप में प्रस्तुत किया गया। लेकिन इसके बाद सामने आए राष्ट्रीय निवेश आंकड़े एक अलग तस्वीर दिखाते हैं। हाल ही में आई बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में देश में हुए निवेश में मप्र में की हिस्सेदारी महज 3.2 प्रतिशत दर्ज की गई। निवेश में मप्र के पीछे होने की बड़ी वजह रही है देश में पावर (22.6 प्रतिशत) व मेटल्स (17.3 प्रतिशत) में निवेश बढ़ा, लेकिन मप्र को हाई-वैल्यू सेक्टरों जैसे एआई, डेटा सेंटर, मेगा एनर्जी और पोर्ट-प्रोजेक्ट्स का फायदा नहीं मिला।
आंध्र प्रदेश में सबसे अधिक निवेश
बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों (अप्रैल से दिसंबर 2025) के दौरान देशभर में कुल 26.6 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव सामने आए। इस रिपोर्ट में अकेले 25.3 प्रतिशत निवेश प्रस्ताव आंध्र प्रदेश को मिले। यानी हर चार में से एक रुपया निवेश प्रस्ताव के रूप में आंध्र में गया। इसके बाद ओडिशा (13.1 प्रतिशत), महाराष्ट्र (12.8 प्रतिशत), तेलंगाना (9.5 प्रतिशत) और गुजरात (7.1 प्रतिशत) का स्थान रहा। मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी महज 3.2 प्रतिशत दर्ज की गई। इस तरह, जीआईएस में किए गए बड़े दावों के बावजूद, चालू वित्त वर्ष के राष्ट्रीय निवेश आंकड़ों में मध्य प्रदेश अपेक्षाकृत पीछे दिखाई देता है। जीआईएस के आंकड़े फरवरी 2025 के हैं, जो वित्त वर्ष 2024-25 के अंतिम चरण से संबंधित हैं और एमओयू, आशय पत्र व निवेश रुचि प्रस्ताव शामिल करते हैं। रिपोर्ट वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों की है, जिसमें राष्ट्रीय स्तर पर घोषित निवेश प्रस्तावों को दोहराव हटाकर तुलनात्मक रूप से आंका गया है। आंध्र में 1.3 लाख करोड़ रुपए की एआई आधारित डेटा सेंटर परियोजना, 98,000 करोड़ रुपए की 1 गीगावाट डेटा सेंटर योजना, 1.1 लाख करोड़ रुपए की स्वच्छ ऊर्जा परियोजनाएं और 82,000 करोड़ रुपए का नवीकरणीय ऊर्जा निवेश शामिल हैं।