गुवाहाटी के दिसपुर थाने में दर्ज शिकायत में विपक्षी दलों ने दावा किया कि असम भाजपा अध्यक्ष और सांसद दिलीप सैकिया ‘वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने’ की कथित साज़िश का नेतृत्व कर रहे हैं. उनका दावा है कि भाजपा विधायकों को निर्देश दिया गया है कि वे राज्य की 126 विधानसभा सीटों में से कम से कम 60 सीटों पर भाजपा-विरोधी वोटर्स के नाम मतदाता सूची से हटवाना सुनिश्चित करें.

नई दिल्ली: असम में पांच विपक्षी दलों ने शुक्रवार (9 जनवरी) को संयुक्त रूप से पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर राज्य की मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है.
इन दलों में कांग्रेस, रायजोर दल, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) और असम जातीय परिषद शामिल हैं.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, रायजोर दल ने इस मामले में अलग से निर्वाचन आयोग से भी शिकायत की और भाजपा पर मतदाता सूचियों में सुनियोजित और असंवैधानिक तरीके से हेरफेर करने का आरोप लगाया.
गुवाहाटी के दिसपुर थाने में दर्ज शिकायत में विपक्षी दलों ने दावा किया कि असम भाजपा अध्यक्ष और सांसद दिलीप सैकिया इस कथित साजिश का नेतृत्व कर रहे हैं. आरोप है कि पार्टी विधायकों को निर्देश दिया गया है कि वे राज्य की 126 विधानसभा सीटों में से कम से कम 60 सीटों पर भाजपा-विरोधी मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवाना सुनिश्चित करें.
ज्ञात हो कि असम में मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण जारी है, जहां मई तक विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. अपडेट मसौदा मतदाता सूची 27 दिसंबर 2025 को प्रकाशित की गई थी, जबकि अंतिम सूची 10 फरवरी को जारी होने की उम्मीद है.
‘मोबाइल और वीडियो साक्ष्य जब्त किए जाएं’
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि 4 जनवरी को हुई एक ऑनलाइन बैठक में दिलीप सैकिया ने यह ‘नाम हटाने का मिशन’ स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल को सौंपा.
शिकायत में कहा गया, ‘यह विपक्षी दलों के समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने की एक दुर्भावनापूर्ण साजिश है. राज्य भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया से जुड़ी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग फुटेज को तुरंत सुरक्षित किया जाना चाहिए और संरक्षित रखा जाना चाहिए, क्योंकि इसमें अहम साक्ष्य मौजूद हैं.’
विपक्षी दलों ने पुलिस से मांग की कि राज्य में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी विशेष पुनरीक्षण सुनिश्चित करने के लिए ‘दोषियों और साजिशकर्ताओं’ के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए.
रायजोर दल के प्रमुख और शिवसागर से विधायक अखिल गोगोई ने सबसे पहले इस ‘खतरनाक योजना’ की ओर ध्यान दिलाया था. शुक्रवार को उन्होंने निर्वाचन आयोग को पत्र लिखकर 4 जनवरी की वर्चुअल बैठक और ‘मतदाता सूची प्रबंधन’ से जुड़े मुद्दे की उच्चस्तरीय, स्वतंत्र जांच की मांग की.
उन्होंने आयोग से भाजपा नेतृत्व से जुड़े सभी डिजिटल रिकॉर्ड और संचार लॉग सुरक्षित करने, ‘प्रति विधानसभा क्षेत्र 10,000 वोट’ संबंधी निर्देश की जांच करने, राज्यभर में पिछले तीन महीनों में दाखिल सभी फॉर्म-7 (नाम शामिल करने पर आपत्ति) आवेदनों का गहन ऑडिट कराने और मामले के निपटारे तक विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की.
भाजपा ने कहा- बदनाम करने की साजिश
भाजपा ने अखिल गोगोई के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विधायक ने गोलाघाट जिले के सरुपथार विधानसभा क्षेत्र के उरियामघाट इलाके से बेदखल किए गए 11,000 मुसलमानों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के मामले को तोड़-मरोड़ कर पेश किया है.
भाजपा प्रवक्ता जयंत कुमार गोस्वामी ने कहा कि रायजोर दल प्रमुख ने इन ‘मियाओं’ (बंगाली भाषी मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाला एक अपमानजनक शब्द) के नाम हटने से रोकने के लिए दिलीप सैकिया के खिलाफ बदनाम करने का अभियान छेड़ा है.
उन्होंने कहा, ‘विपक्षी दलों ने भाजपा अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर इस साजिश को हवा दी है और ‘मिया तुष्टिकरण’ में लिप्त हैं, जिससे उनकी आदिवासी-विरोधी मानसिकता उजागर होती है.’
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, वहीं, दिलीप सैकिया ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, ‘नाम जोड़ने और हटाने का काम निर्वाचन आयोग करता है. विपक्ष में इतनी सामान्य समझ भी नहीं है. उन्होंने यही कोशिश बिहार में भी की थी, लेकिन वह पूरी तरह विफल रही.’
उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया का हिस्सा होते हैं.
सैकिया ने कहा, ‘मतदाता सूची में ऐसे लोगों के नाम दशकों से बने हुए हैं, जिनकी 30 साल पहले मृत्यु हो चुकी है. ऐसे लोग भी हैं जो स्थान बदल चुके हैं या पिछले चार चुनावों से मतदान के लिए नहीं आए हैं. इन मामलों में मतदाता सूची को ठीक करना निर्वाचन आयोग और जनता – दोनों की जिम्मेदारी है. हम एक सही और शुद्ध मतदाता सूची चाहते हैं.’