कैग की एक रिपोर्ट में मोदी सरकार की प्रमुख योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के क्रियान्वयन में गंभीर ख़ामियां सामने आई हैं. योजना के तहत 94.53% लाभार्थियों के बैंक खाते विवरण अमान्य या अनुपलब्ध मिले, साथ ही कई जगह किसी उम्मीदवार की एक तस्वीर की कई जगह लगी मिली, साथ ही फ़र्ज़ी मोबाइल नंबर जैसी गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं.

नई दिल्ली: उद्योग की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रशिक्षण और प्रमाणन देने के उद्देश्य से चलाई जा रही मोदी सरकार की प्रमुख योजना प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (पीएमकेवीवाई) के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां सामने आई हैं. भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की प्रदर्शन ऑडिट रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है.
रिपोर्ट के अनुसार, राज्यों में योजना के तहत दर्ज 94.53% लाभार्थियों के बैंक खाते विवरण या तो शून्य दर्ज हैं, खाली छोड़े गए हैं या उपलब्ध ही नहीं हैं. इसके अलावा लाभार्थियों की तस्वीरों की नकल, अमान्य या बार-बार दोहराए गए मोबाइल नंबर जैसी गंभीर अनियमितताएं भी पाई गई हैं.
कैग का यह ऑडिट एमएसडीई, एनएसडीसी और आठ राज्यों- असम, बिहार, झारखंड, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश में किया गया था. रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में पेश की गई थी.
कैग ने यह भी पाया कि विशिष्ट नौकरी भूमिकाओं के लिए बाज़ार की मांग का कोई ठोस आकलन नहीं किया गया, और न ही उसके अनुरूप प्रशिक्षण दिया गया. इसका नतीजा यह रहा कि योजना के तहत कुल प्लेसमेंट दर केवल 41% रही. रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में योजना के दिशानिर्देशों में तय आयु, शिक्षा और कार्य-अनुभव से जुड़े मानदंडों को नजरअंदाज करते हुए उम्मीदवारों को प्रशिक्षण के लिए नामांकित किया गया.
ऑडिट में राज्य घटक (component) के तहत फंड जारी करने में देरी और उनके उपयोग न होने, साथ ही केंद्रीय घटक के तहत 222.63 करोड़ रुपये की राशि के आकलन और स्थानांतरण में भी त्रुटियां और देरी पाई गई.
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) की यह योजना जुलाई 2015 में शुरू की गई थी. 2015 से 2022 के बीच पीएमकेवीवाई के तीन चरण लागू किए गए, जिन पर लगभग 4,450 करोड़ रुपये खर्च हुए और 1.32 करोड़ उम्मीदवारों को कौशल प्रशिक्षण या प्रमाणन देने का लक्ष्य रखा गया.
योजना का संचालन केंद्रीय और राज्य घटकों के माध्यम से किया गया, जिसमें 75% लक्ष्य और बजट राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) और 25% राज्य कौशल विकास मिशनों को आवंटित किए गए.
अमान्य बैंक खाते, ईमेल और मोबाइल नंबर
पीएमकेवीवाई दिशानिर्देशों के अनुसार प्रमाणन के बाद प्रत्येक उम्मीदवार को 500 रुपये की राशि डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए दी जानी थी, जिसके लिए वैध बैंक खाता जरूरी है. लेकिन पीएमकेवीवाई 2.0 और 3.0 के आंकड़ों के विश्लेषण में पाया गया कि 95.9 लाख प्रतिभागियों में से 90.66 लाख के बैंक खाते विवरण शून्य, ‘नल’, ‘एनए’ या खाली दर्ज थे.
रिपोर्ट में कहा गया है कि शेष 5,24,537 उम्मीदवारों में से 12,122 बैंक खाता नंबर 52,381 प्रतिभागियों के लिए दो या उससे अधिक बार दर्ज पाए गए.
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन मामलों में प्रत्येक उम्मीदवार के लिए अलग-अलग बैंक खाते दर्ज थे (कुल 4,72,156 विशिष्ट खाते), उनमें भी स्पष्ट रूप से गलत खाता नंबर पाए गए, जैसे ‘11111111111…’, ‘123456…’, एक अंक वाले खाता नंबर, या केवल टेक्स्ट, नाम, पता अथवा विशेष चिन्ह. रिपोर्ट के मुताबिक, इसलिए पीएमकेवीवाई 2.0 और 3.0 के खाते से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण योजना के प्रतिभागियों की पहचान को लेकर पर्याप्त भरोसा नहीं देता.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मंत्रालय ने कैग को बताया था कि सिर्फ़ शुरुआत में ही बैंक खाते का विवरण अनिवार्य किया गया था और बाद में भुगतान आधार सीडिंग के आधार पर किया गया, जिससे राशि सीधे आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी जाती है और अलग से बैंक खाता नंबर लेने की ज़रूरत नहीं रहती.
मंत्रालय ने कैग को बताया कि बाद में भुगतान आधार-सीडिंग के जरिए किया गया, लेकिन ऑडिट में पाया गया कि 2023 में केवल 25.58% मामलों में ही डीबीटी भुगतान प्रोसेस हुआ, और इनमें से सिर्फ 18.44% भुगतान सफल रहे. अक्टूबर 2024 तक यह आंकड़ा बढ़कर 63.75% हुआ.
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि बड़ी संख्या में अमान्य ईमेल आईडी जैसे abc@gmail.com, 123@gmail.com या केवल अंकों वाले ईमेल दर्ज थीं. वहीं 36,49,344 उम्मीदवारों के मामलों में ‘Candidate_Email’ वाला कॉलम ‘माइग्रेटेड डेटा’ के रूप में दर्ज पाया गया. कई मोबाइल नंबर 10 अंकों से कम, बार-बार दोहराए गए या स्पष्ट रूप से गलत पाए गए.
जब ऑडिट में अक्टूबर 2024 तक के अपडेटेड पीएमकेवीवाई डेटा के तहत 9.45 लाख प्रमाणित उम्मीदवारों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, तब इसमें अब भी अमान्य (175) और दोहराए गए (2,263) मोबाइल नंबर पाए गए.
रिपोर्ट में कहा गया कि इसके अलावा 2.72 लाख से अधिक मामलों में ईमेल पते ‘नल’ दर्ज थे और 3.08 लाख से अधिक मामलों में ईमेल पते दोहराए गए थे. इससे साफ होता है कि मई 2023 में मंत्रालय द्वारा जिन आवश्यक आईटी नियंत्रणों का आश्वासन दिया गया था, वे अब तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाए हैं.
तस्वीरों की नकल
पीएमकेवीवाई-आरपीएल (पूर्व शिक्षण की मान्यता) के दिशानिर्देशों में प्रमाणन प्रक्रिया की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें और वीडियो अपलोड करने का प्रावधान है, जिसमें उम्मीदवारों की बैचवार तस्वीरें भी शामिल हैं. लेकिन ऑडिट में ऐसे मामले सामने आए, जहां एक ही तस्वीरें अलग-अलग राज्यों में इस्तेमाल की गईं.
उदाहरण के तौर पर- ऑडिट में पाया गया कि नीलिमा मूविंग पिक्चर्स (एनएमपी) नामक एक नियोक्ता, जो कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ में पंजीकृत नहीं था, ने जनवरी 2020 से नवंबर 2020 के बीच आठ राज्यों में 21 जॉब रोल्स के लिए 33,493 प्रतिभागियों (कर्मचारियों) को मीडिया एंड एंटरटेनमेंट सेक्टर स्किल काउंसिल के माध्यम से कौशल प्रमाणन दिया.
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि ऑडिट प्रक्रिया (3 अक्टूबर 2022) के दौरान एनएमपी अस्तित्व में ही नहीं पाया गया. इसके जवाब में संबंधित सेक्टर स्किल काउंसिल ने अक्टूबर 2022 में बताया कि यह इकाई कोविड-19 के दौरान बंद हो गई थी.
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि सेक्टर स्किल काउंसिल (एसएससी) द्वारा उपलब्ध कराए गए 24 बैचों की तस्वीरों के विश्लेषण से यह सामने आया कि एनएमपी ने अलग-अलग राज्यों के अलग-अलग बैचों में किए गए कौशल प्रमाणन के लिए एक ही तस्वीरों को साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया.
मंत्रालय द्वारा मई 2023 में दिए गए नए साक्ष्यों की दोबारा जांच में पाया गया कि इन 24 बैचों के 812 उम्मीदवारों में से केवल 694 के प्रोफाइल फोटो और महज 132 उम्मीदवारों के आधार विवरण उपलब्ध थे. इसके अलावा, 58 प्रोफाइल तस्वीरों में भी इसी तरह की कॉपी पाई गई.
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि पीएमकेवीवाई के तहत विभिन्न जॉब रोल्स के लिए पंजीकृत कई प्रशिक्षण केंद्र (ट्रेनिंग सेंटर्स) ऑडिट के दौरान बंद पाए गए.
मंत्रालय/एनएसडीसी द्वारा सितंबर 2022 में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत करीब 14,800 प्रशिक्षण केंद्र विभिन्न कौशल प्रशिक्षण परियोजनाओं में शामिल थे. प्रदर्शन ऑडिट के दौरान चयनित राज्यों में 90 प्रशिक्षण केंद्रों का निरीक्षण किया गया और प्रशिक्षण ले रहे 1,045 उम्मीदवारों का सर्वे भी किया गया, ताकि बुनियादी ढांचे की उपलब्धता की जांच हो सके.
हालांकि, निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि बिहार में 10 में से 3 प्रशिक्षण केंद्र और ओडिशा में 17 में से 1 प्रशिक्षण केंद्र सर्वे के समय बंद थे.
प्लेसमेंट दर सिर्फ 41%
रिपोर्ट में पाया गया कि विशिष्ट नौकरी भूमिकाओं के लिए बाज़ार की मांग का कोई ठोस आकलन नहीं किया गया और न ही उसके अनुरूप प्रशिक्षण दिया गया. इसका नतीजा यह रहा कि योजना के तहत कुल प्लेसमेंट दर केवल 41% रही.
पीएमकेवीवाई के कौशल प्रशिक्षण डेटा के विश्लेषण से पता चला कि एसटीटी/एसपी घटक के तहत 724 जॉब रोल्स में कुल 56.14 लाख उम्मीदवारों को प्रमाणन दिया गया. इनमें से करीब 40% प्रमाणन केवल 10 जॉब रोल्स तक सीमित रहे, जो मुख्य रूप से परिधान, इलेक्ट्रॉनिक्स, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, आईटी, निर्माण, टेलीकॉम और स्वास्थ्य जैसे कुछ ही क्षेत्रों से जुड़े थे.
रिपोर्ट में कहा गया कि मई 2023 में मंत्रालय ने कम प्लेसमेंट दर के लिए कोविड-19 के बाद की आर्थिक अनिश्चितता को जिम्मेदार ठहराया था.
इस्तेमाल नहीं हुई राशि
ऑडिट में पाया गया कि योजना के लिए जारी की गई राशि का पूरा उपयोग नहीं किया गया.
हालांकि मंत्रालय ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान कामकाज में बाधा आई, लेकिन ऑडिट के मुताबिक 2016 से 2024 के बीच पीएमकेवीवाई 2.0 और 3.0 के तहत राज्यों को जारी 1,380.87 करोड़ रुपये में से मार्च 2024 तक केवल 20.09% (277.40 करोड़) राशि खर्च ही नहीं हो पाई.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कोविड से पहले की अवधि (2016–19) में जारी 757.82 करोड़ रुपये में से केवल 149.85 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए.